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जुलूस से बंद हुआ स्टेडियम रोड, व्यवस्था ध्वस्त
Updated Thu, 22 Nov 2018 01:47 AM IST
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बरेली। ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के दौरान बुधवार शाम शहर में पुलिस प्रशासन के रूट डायवर्जन समेत जाम न लगने देने के सारे इंतजाम धरे रह गए। श्यामगंज से ईंट पजाया रोड पर बदइंतजामी की हद तब दिखी जब दोनों तरफ का रास्ता जुलूस की वजह से बंद हो गया। अंजुमन पर उनके संचालकों का कोई जोर नहीं दिखा, पुलिस भी चुपचाप तमाशा देखती रही।
जुलूस के रास्तों पर कोई व्यवधान न हो, इसके लिए रास्तों पर चार पहिया वाहनों का प्रवेश निषेध किया गया था। मगर इस पर पूरी तरह अमल नहीं हो सका। कुछ लोग वाहन लेकर जुलूस वाले रास्तों पर आए तो जाम लग गया। अंजुमन के संचालकों के साथ कमेटी के सदर को सख्त हिदायत के बावजूद हुड़दंग पर भी नियंत्रण नहीं हो सका। शाम पांच बजे से देर रात तक जुलूस के रास्ते पर बेतहाशा जाम लगा रहा। श्यामगंज से शाहदाना चौराहे तक अंजुमन से रास्ता जाम था। गाड़ियां रेंगकर बढ़ रही थीं। जो दुपहिया वाहन फंसे, वे वापस तक नहीं लौट पाए। शाहदाना चौराहे को पूरी तरह जाम करके डीजे बजाए गए। इस दौरान चौराहा भी ब्लॉक रहा। यहां से ईंट पजाया चौराहे तक डिवाइडर के दोनों ओर जुलूस में शामिल वाहन थे। जहां डिवाइडर में कट था, वहां वाहनों को सड़क पर तिरछा खड़ा करके रास्ता बंद कर दिया गया। ईंट पजाया से मूर्ति नर्सिंग होम तक पैदल निकलने तक का रास्ता नहीं था। पुलिस हर जगह मौजूद थी पर व्यवस्था बनाने और रास्ता खुलवाने के लिए कुछ नहीं कर रही थी। संजय नगर पेट्रोल पंप तिराहा आदि स्थानों पर बैरियर लगाकर केवल दो पहिया और चार पहिया वाहनों को रोकने का काम पुलिस ने किया।
एंबुलेंस भी फंसी जुलूस में
जुलूस में जानबूझकर की गई बदइंतजामी से परेशानी केवल राहगीरों को ही नहीं हुई, मरीजों को भी झेलनी पड़ी। हेमित अस्पताल की एक एंबुलेंस ओवरब्रिज के नीचे जाम में फंस गई जिसमें मरीज भी मौजूद था। जुलूस में शामिल लोगों ने फिर भी उसकी परवाह नहीं की। तीमारदार काफी मशक्कत के बाद उसे निकलवा सके।
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पुलिस के सामने फिर लहराईं तलवारें
मंगलवार के बाद बुधवार को भी जुलूस में तलवारें लहराई गईं। बारादरी थाने के सामने और शाहदाना चौराहे पर उत्साही नौजवानों ने जमकर तलवारें लहराईं। युवक तलवारें लेकर डीजे की धुन पर थिरकते रहे। पुलिस आसपास थी पर किसी को टोका तक नहीं गया।
मेरठ-कानपुर से मंगाए डीजे से दहलीं दीवारें
दरगाह से डीजे न बजाने का फतवा जारी होने और पुलिस की लाख कोशिशों के बाद भी हैवी साउंड वाले डीजे सिस्टम जुलूस में शामिल थे। इनमें ज्यादा ध्वनि क्षमता के डीजे मेरठ, कानपुर व आगरा आदि शहरों से मंगाए गए थे। इनकी धमक से आसपास के मकानों की दीवारें दहल रही थीं। लोगों को कान बंद करने को मजबूर होना पड़ा। बच्चों-बुजुर्गों को खासी परेशानी हुई।
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जुलूस के रास्तों पर कोई व्यवधान न हो, इसके लिए रास्तों पर चार पहिया वाहनों का प्रवेश निषेध किया गया था। मगर इस पर पूरी तरह अमल नहीं हो सका। कुछ लोग वाहन लेकर जुलूस वाले रास्तों पर आए तो जाम लग गया। अंजुमन के संचालकों के साथ कमेटी के सदर को सख्त हिदायत के बावजूद हुड़दंग पर भी नियंत्रण नहीं हो सका। शाम पांच बजे से देर रात तक जुलूस के रास्ते पर बेतहाशा जाम लगा रहा। श्यामगंज से शाहदाना चौराहे तक अंजुमन से रास्ता जाम था। गाड़ियां रेंगकर बढ़ रही थीं। जो दुपहिया वाहन फंसे, वे वापस तक नहीं लौट पाए। शाहदाना चौराहे को पूरी तरह जाम करके डीजे बजाए गए। इस दौरान चौराहा भी ब्लॉक रहा। यहां से ईंट पजाया चौराहे तक डिवाइडर के दोनों ओर जुलूस में शामिल वाहन थे। जहां डिवाइडर में कट था, वहां वाहनों को सड़क पर तिरछा खड़ा करके रास्ता बंद कर दिया गया। ईंट पजाया से मूर्ति नर्सिंग होम तक पैदल निकलने तक का रास्ता नहीं था। पुलिस हर जगह मौजूद थी पर व्यवस्था बनाने और रास्ता खुलवाने के लिए कुछ नहीं कर रही थी। संजय नगर पेट्रोल पंप तिराहा आदि स्थानों पर बैरियर लगाकर केवल दो पहिया और चार पहिया वाहनों को रोकने का काम पुलिस ने किया।
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एंबुलेंस भी फंसी जुलूस में
जुलूस में जानबूझकर की गई बदइंतजामी से परेशानी केवल राहगीरों को ही नहीं हुई, मरीजों को भी झेलनी पड़ी। हेमित अस्पताल की एक एंबुलेंस ओवरब्रिज के नीचे जाम में फंस गई जिसमें मरीज भी मौजूद था। जुलूस में शामिल लोगों ने फिर भी उसकी परवाह नहीं की। तीमारदार काफी मशक्कत के बाद उसे निकलवा सके।
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पुलिस के सामने फिर लहराईं तलवारें
मंगलवार के बाद बुधवार को भी जुलूस में तलवारें लहराई गईं। बारादरी थाने के सामने और शाहदाना चौराहे पर उत्साही नौजवानों ने जमकर तलवारें लहराईं। युवक तलवारें लेकर डीजे की धुन पर थिरकते रहे। पुलिस आसपास थी पर किसी को टोका तक नहीं गया।
मेरठ-कानपुर से मंगाए डीजे से दहलीं दीवारें
दरगाह से डीजे न बजाने का फतवा जारी होने और पुलिस की लाख कोशिशों के बाद भी हैवी साउंड वाले डीजे सिस्टम जुलूस में शामिल थे। इनमें ज्यादा ध्वनि क्षमता के डीजे मेरठ, कानपुर व आगरा आदि शहरों से मंगाए गए थे। इनकी धमक से आसपास के मकानों की दीवारें दहल रही थीं। लोगों को कान बंद करने को मजबूर होना पड़ा। बच्चों-बुजुर्गों को खासी परेशानी हुई।