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मिनी बाईपास रोड से चंद कदम दूर एक और अवैध कॉलोनी
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बरेली। बीडीए ने भले ही रिहायशी इलाकों में कामर्शियल गतिविधियां संचालित होेने पर कंपाउंडिंग अभियान शुरू किया हो, लेकिन नई अवैध कालोनियों का निर्माण नहीं रुक रहा है। मिनी बाईपास रोड के उस पार किला नदी किनारे एक अवैध कालोनी के निर्माण का समाचार प्रकाशित होने के बाद इसी रोड पर एक अन्य अवैध कॉलोनी के निर्माण का मामला सामने आया। ये कॉलोनी तो ग्रीनबेल्ट की जमीन पर बनाई जा रही है। कर्मचारी नगर में ही रहने वाले किसी जागरूक नागरिक ने अमर उजाला को सूचना दी कि कर्मचारी नगर रोड की ओर चलने पर पेट्रोल पंप से आगे एक कार बाजार के पीछे एक फील्ड पड़ी है, जो देवरनियां नदी तक जाती है। पड़ोस में एक मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनी है। उसके ठीक सामने खाली जगह में तीन से चार मकान बन रहे हैं। उसके पीछे भी नदी किनारे तक निर्माण चल रहा है। अमर उजाला टीम ने मौके पर जाकर देखा तो वहां अवैध निर्माण चल रहा था। यहां रहने वाले एक व्यक्ति ने नाम न प्रकाशित करने की गुजारिश पर बताया कि जिस खाली जगह में अवैध निर्माण चल रहा है, वह जमीन ग्रीन बेल्ट की है। बीडीए से इसका ले आउट भी स्वीकृत नहीं है। यहां अवैध निर्माण स्थानीय स्तर पर ही कई पार्टनर मिलकर करा रहे हैं। प्रापर्टी से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस अवैध कारोबार में सपा और भाजपा नेताओं का भी पैसा लगा है।
नियमानुसार ग्रीन बेल्ट की जमीन पर किसी भी तरह की कॉलोनी का निर्माण नहीं किया जा सकता है। न ही प्राधिकरण ग्रीन बेल्ट की जमीन पर ले आउट स्वीकृत कर सकता है। इसके बाद भी अनधिकृत कालोनाइजर (जिनका रेरा में पंजीकरण नहीं है) अवैध निर्माण में जुटे हैं। रोड के दूसरी ओर भी नदी के किनारे अवैध निर्माण चल रहे हैं।
बीडीए के जेई सब जानते हैं..
क्रेडाई के एक पदाधिकारी की मानें तो शहर में जितने भी अवैध निर्माण चल रहे हैं, उस इलाके में तैनात बीडीए के जेई सब जानते हैं। मगर वह खुद ही कालोनाइजरों को अवैध निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। बताया जाता है कि जेई कालोनाइजरों से स्वयं ही कहते हैं कि नक्शे या ले आउट के झंझट में पड़ोगे तो आपको महीनों बीडीए दफ्तर की दौड़ लगानी पड़ेगी। हर जगह से एनओसी चाहिए। इतने झंझट से अच्छा है कि उनको (जेई को) समझ लो और निर्माण चुपचाप शुरू कर दो। जब जरूरत पड़ेगी तो पहले चालान करेंगे। फिर सील कर देंगे। सील तोड़कर बना लेना तो अधिक से अधिक एफआईआर होगी। सब निपट जाएगा। जेई के कहने पर ही कालोनाइजर बिना डर या भय के अनधिकृत निर्माण कर रहे हैं।
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‘जिस इलाके में भी अवैध निर्माण हो रहे हैं, उनका बीडीए टीम लगातार सर्वे कर रही है। किसी भी अवैध निर्माण को छोड़ा नहीं जाएगा। सब पर प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई होगी।’
आशीष शिवपुरी, चीफ टाउन प्लानर
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नियमानुसार ग्रीन बेल्ट की जमीन पर किसी भी तरह की कॉलोनी का निर्माण नहीं किया जा सकता है। न ही प्राधिकरण ग्रीन बेल्ट की जमीन पर ले आउट स्वीकृत कर सकता है। इसके बाद भी अनधिकृत कालोनाइजर (जिनका रेरा में पंजीकरण नहीं है) अवैध निर्माण में जुटे हैं। रोड के दूसरी ओर भी नदी के किनारे अवैध निर्माण चल रहे हैं।
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बीडीए के जेई सब जानते हैं..
क्रेडाई के एक पदाधिकारी की मानें तो शहर में जितने भी अवैध निर्माण चल रहे हैं, उस इलाके में तैनात बीडीए के जेई सब जानते हैं। मगर वह खुद ही कालोनाइजरों को अवैध निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। बताया जाता है कि जेई कालोनाइजरों से स्वयं ही कहते हैं कि नक्शे या ले आउट के झंझट में पड़ोगे तो आपको महीनों बीडीए दफ्तर की दौड़ लगानी पड़ेगी। हर जगह से एनओसी चाहिए। इतने झंझट से अच्छा है कि उनको (जेई को) समझ लो और निर्माण चुपचाप शुरू कर दो। जब जरूरत पड़ेगी तो पहले चालान करेंगे। फिर सील कर देंगे। सील तोड़कर बना लेना तो अधिक से अधिक एफआईआर होगी। सब निपट जाएगा। जेई के कहने पर ही कालोनाइजर बिना डर या भय के अनधिकृत निर्माण कर रहे हैं।
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‘जिस इलाके में भी अवैध निर्माण हो रहे हैं, उनका बीडीए टीम लगातार सर्वे कर रही है। किसी भी अवैध निर्माण को छोड़ा नहीं जाएगा। सब पर प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई होगी।’
आशीष शिवपुरी, चीफ टाउन प्लानर