{"_id":"5c61d5b8bdec227367366f9a","slug":"101549915576-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिस जुर्म में उम्रकैद तक सजा, उसमें डेढ़ महीने में बाहर आया सुधीश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिस जुर्म में उम्रकैद तक सजा, उसमें डेढ़ महीने में बाहर आया सुधीश
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। दिवाली से पहले भी सुधीश इन्हीं साथियों के साथ बुखारपुरा में शराब फैक्ट्री चलाते पकड़ा गया था। इस मामले में पुलिस ने सुधीश और उसके साथियों पर गंभीर धाराएं लगाई, जिनमें उम्रकैद तक की सजा है, लेकिन कमजोर पैरवी के चलते सभी डेढ़ महीने में ही बाहर आ गए। इसके बाद उन्होंने दोबारा धंधा जमा लिया।
बुखारपुरा में एक किराये के मकान में सुधीश ने इन्हीं दोस्तों के साथ मिलावटी शराब बनाने और ब्रांडेड कंपनियों के ढक्कन आदि से पैकिंग करने का काम शुरू किया था। आबकारी टीम ने दिवाली से पहले पुलिस के साथ दबिश देकर इन्हें पकड़ा था। तब इन पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 व 60 आबकारी अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। थाना पुलिस के मुताबिक जनवरी 2019 में इनके खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई। सूत्र बताते हैं कि इससे पहले ही ये लोग दिसंबर में जमानत पर बाहर आ गए थे। चौंकाने वाली बात ये है कि इन पर लगी अधिकांश धाराएं गंभीर है, जिनमें उम्रकैद तक की सजा है। बावजूद इसके पुलिस की कोर्ट में लचर पैरवी का फायदा आरोपियों को मिला और जल्द ही जमानत पर छूट गए। बाद में इनकी निगरानी भी नहीं की गई। इसके पीछे बारादरी पुलिस का तर्क है कि आरोपी किला और सुभाषनगर क्षेत्र के रहने वाले हैं, इसलिए उनकी नजर से बचे रहे।
किस धारा में कितनी सजा का प्रावधान
धारा 420- धोखाधड़ी, सजा- 5 से 7 साल तक, जुर्माना भी।
धारा 467- मूल्यवान प्रतिभूति को बनाने या हस्तांतरण की कूटरचना, सजा- आजीवन कारावास या दस साल, जुर्माना भी।
धारा 468- धोखे के लिए कूटरचना, सजा- सात साल व आर्थिक दंड।
धारा 471- कूटरचित दस्तावेज का असली की तरह इस्तेमाल करना, सजा- जमानतीय व संज्ञेय अपराध, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के विचारणीय।
60 आबकारी अधिनियम - शराब की मात्रा के हिसाब से आर्थिक दंड।
विज्ञापन
बुखारपुरा में एक किराये के मकान में सुधीश ने इन्हीं दोस्तों के साथ मिलावटी शराब बनाने और ब्रांडेड कंपनियों के ढक्कन आदि से पैकिंग करने का काम शुरू किया था। आबकारी टीम ने दिवाली से पहले पुलिस के साथ दबिश देकर इन्हें पकड़ा था। तब इन पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 व 60 आबकारी अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। थाना पुलिस के मुताबिक जनवरी 2019 में इनके खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई। सूत्र बताते हैं कि इससे पहले ही ये लोग दिसंबर में जमानत पर बाहर आ गए थे। चौंकाने वाली बात ये है कि इन पर लगी अधिकांश धाराएं गंभीर है, जिनमें उम्रकैद तक की सजा है। बावजूद इसके पुलिस की कोर्ट में लचर पैरवी का फायदा आरोपियों को मिला और जल्द ही जमानत पर छूट गए। बाद में इनकी निगरानी भी नहीं की गई। इसके पीछे बारादरी पुलिस का तर्क है कि आरोपी किला और सुभाषनगर क्षेत्र के रहने वाले हैं, इसलिए उनकी नजर से बचे रहे।
विज्ञापन
किस धारा में कितनी सजा का प्रावधान
धारा 420- धोखाधड़ी, सजा- 5 से 7 साल तक, जुर्माना भी।
धारा 467- मूल्यवान प्रतिभूति को बनाने या हस्तांतरण की कूटरचना, सजा- आजीवन कारावास या दस साल, जुर्माना भी।
धारा 468- धोखे के लिए कूटरचना, सजा- सात साल व आर्थिक दंड।
धारा 471- कूटरचित दस्तावेज का असली की तरह इस्तेमाल करना, सजा- जमानतीय व संज्ञेय अपराध, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के विचारणीय।
60 आबकारी अधिनियम - शराब की मात्रा के हिसाब से आर्थिक दंड।