{"_id":"5c30d940bdec22571d7e089a","slug":"101546705216-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिजन नहीं आए तो बेड़ियों से बंधे रहे नौ मनोरोगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिजन नहीं आए तो बेड़ियों से बंधे रहे नौ मनोरोगी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं। जिला प्रशासन ने उन मनोरोगियों को बंधन मुक्त करा दिया, जिनके परिवार वाले साथ रहते थे लेकिन नौ मनोरोगी दूसरे दिन भी बेड़ियों से जकड़े रहे। लोगो का कहना है कि अगर उन्हें खोल दिया गया तो उनका कुछ पता नहीं कि कहां चले जाएं। इससे बेड़ियां खोलने से पहले उनके परिवार वालों के आने का इंतजार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर आपत्ति जताई थी कि एक धर्मस्थल में मनोरोगियों को बेड़ियों से बांधकर रखा जाता है। इस पर शुक्रवार को डीएम दिनेश कुमार सिंह और एसएसपी अशोक कुमार के निर्देशन में एक कमेटी बनाई गई। टीम ने धर्मस्थल की कमेटी के सदस्यों के साथ मीटिंग की। उसके बाद धर्मस्थल जाकर मनोरोगियों को देखा। 17 मनोरोगी बेड़ियों से बंधे मिले थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने आठ मनोरोगियों को तुरंत बंधनमुक्त करा दिया था। उनके परिवार वाले साथ मौजूद थे, जबकि नौ मनोरोगी ऐसे मिले, जो अकेले थे। शनिवार देर शाम तक भी उनके परिवार वाले धर्मस्थल नहीं पहुंच सके। स्थानीय लोगों की मानें तो अगर इन्हें खोल दिया जाए तो वे नासमझी में कहीं दूर निकल सकते हैं। फिर उन्हें खोजना मुश्किल हो जाएगा।
हम लोग शुक्रवार शाम गए थे, तो उस समय 17 लोग जंजीरों से बंधे मिले। जिनके परिजन मौजूद थे, उन्हें परिवार वालों के हवाले कर दिया। बाकी लोगों को धर्मस्थल की कमेटी और कोतवाली पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।
-रामनिवास शर्मा, एडीएम प्रशासन
अभी किसी मनोरोगी के परिवार वाले नहीं आए हैं। सूचना सभी के परिवार वालों को दे दी गई है। जो भी आता जाएगा, उन्हें मनोरोगियों को सौंपते जाएंगे। जंजीरें तो उसी समय खुलवा दी गईं थीं। बाद में किसी ने बांध दिया हो तो पता नहीं।
विज्ञापन
-प्रवेश पाठक, सब इंस्पेक्टर कोतवाली
विज्ञापन
हम लोग शुक्रवार शाम गए थे, तो उस समय 17 लोग जंजीरों से बंधे मिले। जिनके परिजन मौजूद थे, उन्हें परिवार वालों के हवाले कर दिया। बाकी लोगों को धर्मस्थल की कमेटी और कोतवाली पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया गया है।
विज्ञापन
-रामनिवास शर्मा, एडीएम प्रशासन
अभी किसी मनोरोगी के परिवार वाले नहीं आए हैं। सूचना सभी के परिवार वालों को दे दी गई है। जो भी आता जाएगा, उन्हें मनोरोगियों को सौंपते जाएंगे। जंजीरें तो उसी समय खुलवा दी गईं थीं। बाद में किसी ने बांध दिया हो तो पता नहीं।
विज्ञापन
-प्रवेश पाठक, सब इंस्पेक्टर कोतवाली