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तीन हजार बीघा धान की फसल चट कर गए कीड़े

Tue, 18 Aug 2015 11:08 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 18 Aug 2015 11:08 PM IST
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पत्ती लपेटक कीट ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। बंकी ब्लॉक के बाद अब सिद्धौर ब्लॉक के लगभग 850 किसानों की तीन हजार बीघे धान की फसल इसकी चपेट में आ गई है। इससे किसानों को लगभग तीन करोड़ की चपत लगने की आशंका जताई जा रही है।
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जिले में इस वर्ष करीब 1 लाख 98 हजार 577 बीघे भूमि पर धान की बोआई किसानों ने की है, लेकिन पत्ता लपेटक कीट किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। पहले बंकी ब्लॉक के सैकड़ों किसानों की एक हजार बीघे से अधिक धान की फसल इस रोग की चपेट में आ गई थी। सिद्घौर ब्लॉक में इस वर्ष किसानों ने 14 हजार 700 हेक्टेयर भूमि पर धान की बोआई की है।
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मुबारकपुर, लाखूपुर, वतियामऊ, दीनपनाह, असदामऊ, काजीपुर श्याम नगर, बकरापुर, सोहवां, अचकामऊ, बुधनई, अज्जवा, कोटवा, अलुहामऊ, चियारा, कैसरगंज, पिपरौली, नियामतपुर, कैसरगंज, नसीरपुर, कोठी आदि के करीब 850 किसानों की लगभग तीन हजार बीघे धान की फसल पत्ता लपेटक कीट की चपेट में आ गई है। फसल की बर्बादी देख इन किसानों की रातों की नींद गायब हो गई है।
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किसानों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर इस रोग से किस प्रकार से फसल को बचाया जाए। किसान कीटनाशक का प्रयोग भी कर चुके हैं, लेकिन रोग पर रोक नहीं लग पा रही है। एक बीघे में अगर दस क्विंटल भी पैदावार मानी जाए तो किसानों को लगभग तीन करोड़ के चपत लगने की आशंका है।

कम बारिश से फैला रोग
कृषि विशेषज्ञों की मानें तो धान की फसल में यह रोग लगने की वजह बारिश न होना है। बारिश न होने से धान की फसल में पत्ता लपेटक रोग लग रहा है। इससे पहले भी ये रोग धान की फसल को अपनी चपेट में ले चुका है। यदि तेज बारिश हो जाती है तो कीट समाप्त हो जाता है। वैसे भी कीटनाशक का प्रयोग कर इस कीट पर रोक लगाई जा सकती है।


बंकी ब्लॉक के सैकड़ों किसानों की धान की फसल इससे पहले पत्ता लपेटक कीट की चपेट में आ चुकी है। इस रोग की रोकथाम के लिए किसान क्लोरोपाइरीफास 30 प्रतिशत, क्यूनालफास 25 प्रतिशत मोनोपोटोफास 36 प्रतिशत डेढ़ लीटर प्रति हेक्टेयर 4 से 5 सौ लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कराएं।

इसके अलावा इस रोग में एक दवा और कारगर साबित हो रही है। वह है इमीडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत आधा लीटर प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें। इसमें दस ग्राम वाशिंग पाउडर मिला लें तो दवा और ज्यादा असरकारक साबित होगी।
- डॉ. एलएस यादव, जिला कृषि रक्षा अधिकारी

ऐसे तो बर्बाद हो जाएंगे किसान

नियामतपुर निवासी किसान मयाराम बताते हैं कि 11 बीघे भूमि पर धान की फसल लगाई है। लेकिन फसल रोग की चपेट में आ गई है इसको लेकर कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर क्या किया जाए। कीटनाशकों का भी प्रयोग किया लेकिन रोग रुक नहीं रहा है।

नसीरपुर निवासी किसान सत्यनाम ने बताया कि 18 बीघे भूमि पर धान लगाया  है। लेकिन फसल पत्ता लपेटक रोग की चपेट में आ गई। इससे रात की नींद गायब है।

कोठी निवासी किसान संतप्रकाश तिवारी बताते हैं कि 9 बीघे भूमि पर धान की बोआई की है। लेकिन फसल रोग की चपेट में आ गई। कई बार कीटनाशक का प्रयोग कर चुका हूं लेकिन रोग पर रोक नहीं लग पा रही है। यदि यही हाल रहा तो किसान पूरी तरह से बर्बाद हो जाएंगे।


सत्येन्द्र मिश्रा कहते हैं कि 14 बीघे भूमि पर धान की बोआई की है। धान की फसल पत्ता लपेटक रोग की चपेट में आ गई है। गेहूं की फसल ओलाबृष्टि की भेंट चढ़ गई और धान की फसल को रोग खाए जा रहा है।
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