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Barabanki News: देवी मूर्तियों के शृंगार में जुटी परिवार की महिलाएं
Thu, 18 Sep 2025 01:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 18 Sep 2025 01:36 AM IST
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बाराबंकी। नवरात्र में पूजा पंडालों में स्थापित होने वाली देवी मूर्तियों को बनाने के काम में जुटे मूर्तिकार इसे तेजी के साथ पूरा करने में जुटे हैं। इस काम में परिवार की महिलाएं भी बराबर का साथ दे रही है। मूर्तिकार द्वारा तैयार देवी मूर्तियों को सजाने व संवारने का काम परिवार की महिलाओं ने संभाल रखा है। इस काम से वह परिवार की आमदनी बढ़ाने में भी मददगार साबित हो रही है। मूर्तियों को सजाने के दौरान पूरा माहौल महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले देवी गीतों से गूंजता रहता है।
जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर मसौली ब्लॉक के खैरातीपुर गांव में एक दर्जन परिवार मूर्तियां बनाकर अपनी जीविका चला रहें हैं। इस दौरान आस्था और आत्मनिर्भरता दोनों की मिसाल यहां देखने को मिलती है। गांव में घुसते ही मूर्तियां बनाने के लिए तैयार की गई मिट्टी, सूखती मूर्तियों के आकार, मूर्ति बनाने की सामग्री और रंग की खुशबू का अहसास होता है।
मां दुर्गा समेत अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं बनाने वाली जगदई ने बताया कि वह 25 साल से इस काम के जरिए अपने परिवार का भरण पोषण कर रही है। परिवार के आठ सदस्य मिलकर मूर्तियां बनाते हैं। परिवार से जुड़ी महिलाएं दामिनी, पूनम देवी, सुधा, शशि कुमारी व राजी पूरे उत्साह के साथ तैयार मूर्तियों में रंग भरकर उनके शृंगार का काम करती हैं। यहां मूर्तिकारों द्वारा बनाई जाने वाली मूर्तियां पांच से पचास हजार रुपये तक में बिकती हैं। मूर्ति बनाने में तालाब और खेत की मिट्टी के साथ बांस व धान की पुआल का इस्तेमाल किया जाता है।
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जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर मसौली ब्लॉक के खैरातीपुर गांव में एक दर्जन परिवार मूर्तियां बनाकर अपनी जीविका चला रहें हैं। इस दौरान आस्था और आत्मनिर्भरता दोनों की मिसाल यहां देखने को मिलती है। गांव में घुसते ही मूर्तियां बनाने के लिए तैयार की गई मिट्टी, सूखती मूर्तियों के आकार, मूर्ति बनाने की सामग्री और रंग की खुशबू का अहसास होता है।
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मां दुर्गा समेत अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं बनाने वाली जगदई ने बताया कि वह 25 साल से इस काम के जरिए अपने परिवार का भरण पोषण कर रही है। परिवार के आठ सदस्य मिलकर मूर्तियां बनाते हैं। परिवार से जुड़ी महिलाएं दामिनी, पूनम देवी, सुधा, शशि कुमारी व राजी पूरे उत्साह के साथ तैयार मूर्तियों में रंग भरकर उनके शृंगार का काम करती हैं। यहां मूर्तिकारों द्वारा बनाई जाने वाली मूर्तियां पांच से पचास हजार रुपये तक में बिकती हैं। मूर्ति बनाने में तालाब और खेत की मिट्टी के साथ बांस व धान की पुआल का इस्तेमाल किया जाता है।
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