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राष्ट्रपति के सामने बुनकर आज बनाएंगे स्टोल
Amarujala
Updated Thu, 09 Aug 2018 11:54 PM IST
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लखनऊ में होगा समारोह
- फोटो : Amarujala
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जिले के हथकरघा उद्योग को एक बार फिर पंख लग गए हैं। 32 वर्षों के लंबे उतार चढ़ाव का गवाह रहे यहां के बुनकर जीएसटी लागू होने के बाद निराश थे किन्तु सरकार द्वारा वन डिस्ट्रिक वन प्रोडेक्ट के तहत यहां के स्टोल और उसके बाद सभी उत्पादों को शामिल होने से बुनकर एक बार फिर उत्साहित हैैं। केंद्र और प्रदेश सरकार से करीब दो करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत होने के साथ ही सीएम और पीएम के बाद शुक्रवार को राष्ट्रपति के सामने भी बुनकर स्टोल बनाकर दिखाएंगे।
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बाराबंकी जिले के आलापुर, जैदपुर, मसौली, सहादतगंज, रामपुर, दरहरा, बड़ागांव, शहावपुर, नैनामऊ समेत दर्जनों कस्बे बुनकरी की कला के लिए विदेशों तक में अपनी धाक जमा चुके हैं। प्रतिमाह करोड़ों का उत्पाद विदेशों को भेजने वाले इस जिले के बुनकरों को कई उतार चढ़ाव देखने पड़े। बताते हैं कि देश के कोने-कोने में यहां का लुंगी, गमछा व रुमाल की खूब डिमांड रही है। विदेशों में शेखों के सिर पर यहां का गमछा हमेशा पसंदीदा रहा है।
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कुछ दिन बाद इसका नाम स्टोल के रूप में बना जिसका चयन राज्य सरकार ने ओडीओपी में कर दिया। बुनकरों की मानें तो आजादी के बाद हथकरघा उत्पाद शुरु हुआ और वर्ष 1986 में विदेशों को एक्सपोर्ट होने पर यह धंधा पनपने लगा। धंधे की यह तेजी वर्ष 2008 तक देखने को मिली। संसाधन के अभाव, सूत के दामों में बढ़ोत्तरी, बिचौलिये व नई डिजाइन के चलन का धंधे पर विपरीत असर पड़ा। धंधा मंदा होने से कई बुनकर परिवार इस कार्य से पलायन कर गए। वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट के तहत जिले के हथकरघा उत्पाद का चयन होने पर बुनकरों में एक बार फिर आस जगी।
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