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अब चिप बताएगी धरती के कोख में कितना है जलस्तर
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बाराबंकी। भूगर्भ जल की जानकारी अब चिप के माध्यम से मिलेगी। इसके जिले में बोरिंग कराकर उसमें चिप स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी गई है। यह इलेक्ट्रॉिनिक चिप भूगर्भ जलस्तर ऑनलाइन बताती रहेगी। खास बात यह है कि पहली बार मोबाइल के जरिए भी जलस्तर कहीं से भी देखा सकेगा। जिले में करीब आधा दर्जन स्थानों पर सरकारी भवनों में डिजिटल वॉटर लेबल रिकॉर्डर की चिप लगाने की तैयारी है।
वाहनों की धुलाई के साथ कई अलग-अलग तरीकों से पानी को अनावश्यक रूप से बर्बाद किया जा रहा है। जल का दोहन तेजी से होने के चलते जिले में दो से तीन ब्लॉक सेमी क्रिटिकल की श्रेणी में आ गए हैं। इस श्रेणी में आने के बाद बोरिंग, नलकूपों और जलदोहन पर प्रतिबंध लग सकता है। क्रिटिकल स्थिति में बचाव के लिए जिले में करीब एक दर्जन डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर (चिप) बोरिंग कराकर जमीन के अंदर रखी जाएगी। मोबाइल पर अधिकारी जलस्तर का रिकॉर्ड व उसकी गतिविधियां ले सकेंगे। सेमी क्रिटिकल में पहुंचते ही उस ब्लॉक या क्षेत्र में रिचार्ज की सुविधाएं बढ़ाते हुए जल दोहन पर रोक लगाई जा सकेगी। इसे लेकर जिले के कई सरकारी भवनों में डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर लगाने की तैयारी है।
छह हजार पोजीमीटर पर लिया जाता जलस्तर
जिले में भूगर्भ की स्थिति जांचने के लिए 40 जगहों पर पोजीमीटर लगे हैं। इनके जरिए हर साल ग्रीष्मकाल के समय भूगर्भ विभाग जलस्तर की जांच करता है। विभागीय जानकारी के अनुसार छह हजार पोजीमीटर जलस्तर की स्थिति का आकलन किया जाता है। चिप लगने से नई तकनीकी की शुरुआत हो जाएगी।
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नई तकनीक के तहत चिप लगने के बाद कहीं से भी मोबाइल के जरिए भूगर्भ का जलस्तर नापा जा सकेगा। जल्द ही सरकारी भवनों में यह डिजिटल लेवल रिकॉर्डर चिप लगाई जाएगी।
आमोद कुमार, अधिशाषी अभियंता, भूगर्भ।
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वाहनों की धुलाई के साथ कई अलग-अलग तरीकों से पानी को अनावश्यक रूप से बर्बाद किया जा रहा है। जल का दोहन तेजी से होने के चलते जिले में दो से तीन ब्लॉक सेमी क्रिटिकल की श्रेणी में आ गए हैं। इस श्रेणी में आने के बाद बोरिंग, नलकूपों और जलदोहन पर प्रतिबंध लग सकता है। क्रिटिकल स्थिति में बचाव के लिए जिले में करीब एक दर्जन डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर (चिप) बोरिंग कराकर जमीन के अंदर रखी जाएगी। मोबाइल पर अधिकारी जलस्तर का रिकॉर्ड व उसकी गतिविधियां ले सकेंगे। सेमी क्रिटिकल में पहुंचते ही उस ब्लॉक या क्षेत्र में रिचार्ज की सुविधाएं बढ़ाते हुए जल दोहन पर रोक लगाई जा सकेगी। इसे लेकर जिले के कई सरकारी भवनों में डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर लगाने की तैयारी है।
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छह हजार पोजीमीटर पर लिया जाता जलस्तर
जिले में भूगर्भ की स्थिति जांचने के लिए 40 जगहों पर पोजीमीटर लगे हैं। इनके जरिए हर साल ग्रीष्मकाल के समय भूगर्भ विभाग जलस्तर की जांच करता है। विभागीय जानकारी के अनुसार छह हजार पोजीमीटर जलस्तर की स्थिति का आकलन किया जाता है। चिप लगने से नई तकनीकी की शुरुआत हो जाएगी।
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नई तकनीक के तहत चिप लगने के बाद कहीं से भी मोबाइल के जरिए भूगर्भ का जलस्तर नापा जा सकेगा। जल्द ही सरकारी भवनों में यह डिजिटल लेवल रिकॉर्डर चिप लगाई जाएगी।
आमोद कुमार, अधिशाषी अभियंता, भूगर्भ।