{"_id":"60f0889f8ebc3e5468256fd3","slug":"vaccination-barabanki-news-lko5871099132","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय से नहीं लग पा रहे टीके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय से नहीं लग पा रहे टीके
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाराबंकी। कोरोना टीकाकरण की वजह से नियमित टीकाकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है जिसके चलते गर्भवती महिलाओं और बच्चों को समय से टीके नहीं लग पा रहे हैं। जबकि ये लोग टीका लगवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं लेकिन इनकी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। विभाग का कहना है कि अभी हमारे पास पर्याप्त समय है। जो लक्ष्य हमें मिला है वह हम निर्धारित समय में पूरा कर लेंगे।
वर्ष 2021-22 में शासन ने एक लाख गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन देखा जाए तो अप्रैल से अब तक महज 20 हजार गर्भवती महिलाओं को ही टीके लगाए जा सके हैं। इसी प्रकार इस सत्र में 95 हजार बच्चों को टीका लगाए जाने का लक्ष्य शासन स्तर से निर्धारित किया गया है लेकिन इसके सापेक्ष अप्रैल से अब तक महज पांच हजार बच्चों को ही टीके लगाए जा सके हैं।
कोरोना काल की वजह से इन्हें समय से टीके नहीं लग पा रहे हैं। जबकि यह टीका लगवाने के लिए सीएचसी और उपकेंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। जिन लोगों को टीका लगाने का जिम्मा सौंपा गया है उनकी ड्यूटी कोरोना टीकाकरण में लगा दिए जाने से नियमित टीकाकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है। परंतु विभाग इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
निजी अस्पतालों में टीका लगवाने को मजबूर
कोविड टीकाकरण के आगे नियमित टीकाकरण का कार्य हाशिये पर चला गया है। विभागीय अधिकारियों से लेकर एएनएम तक इस कार्य में रुचि नहीं ले रही है जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को नियमित टीकाकरण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों की माने तो ज्यादातर गर्भवती महिलाएं खुद तथा अपने बच्चों को निजी अस्पतालों में जाकर टीका लगवाने के लिए मजबूर हैं।
कोविड टीकाकरण के चलते नियमित टीकाकरण का कार्य प्रभावित हुआ है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन शासन स्तर से जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है उसे पाने के लिए हमारे पास अभी करीब नौ माह का समय है। इस अवधि में हम निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में हासिल कर लेंगे।
-डॉ. राजीव सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
विज्ञापन
वर्ष 2021-22 में शासन ने एक लाख गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। लेकिन देखा जाए तो अप्रैल से अब तक महज 20 हजार गर्भवती महिलाओं को ही टीके लगाए जा सके हैं। इसी प्रकार इस सत्र में 95 हजार बच्चों को टीका लगाए जाने का लक्ष्य शासन स्तर से निर्धारित किया गया है लेकिन इसके सापेक्ष अप्रैल से अब तक महज पांच हजार बच्चों को ही टीके लगाए जा सके हैं।
विज्ञापन
कोरोना काल की वजह से इन्हें समय से टीके नहीं लग पा रहे हैं। जबकि यह टीका लगवाने के लिए सीएचसी और उपकेंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। जिन लोगों को टीका लगाने का जिम्मा सौंपा गया है उनकी ड्यूटी कोरोना टीकाकरण में लगा दिए जाने से नियमित टीकाकरण का कार्य प्रभावित हो रहा है। परंतु विभाग इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
निजी अस्पतालों में टीका लगवाने को मजबूर
कोविड टीकाकरण के आगे नियमित टीकाकरण का कार्य हाशिये पर चला गया है। विभागीय अधिकारियों से लेकर एएनएम तक इस कार्य में रुचि नहीं ले रही है जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं और बच्चों को नियमित टीकाकरण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सूत्रों की माने तो ज्यादातर गर्भवती महिलाएं खुद तथा अपने बच्चों को निजी अस्पतालों में जाकर टीका लगवाने के लिए मजबूर हैं।
कोविड टीकाकरण के चलते नियमित टीकाकरण का कार्य प्रभावित हुआ है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन शासन स्तर से जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है उसे पाने के लिए हमारे पास अभी करीब नौ माह का समय है। इस अवधि में हम निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में हासिल कर लेंगे।
-डॉ. राजीव सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी