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दो लाख बच्चे जमीन पर बैठ पढ़ाई को मजबूर

Wed, 19 Aug 2015 11:17 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 19 Aug 2015 11:17 PM IST
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नौनिहालों को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए जनपद में लगभग हर दो किलोमीटर एक सरकारी स्कूल स्थापित है। शिक्षा स्तर सुधारने के लिए भी सरकार हर साल अरबों रुपये खर्च करती है।
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लेकिन उसके बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। जिले में आज भी लगभग दो लाख बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कहीं कहीं तो टाट भी नहीं मिलता, बच्चों को घर से बोरा लाना पड़ता है।
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 सिर्फ शहरी इलाकों के स्कूलों में बच्चों के लिए बेंच का इंतजाम है। वो भी बहुत कम संख्या में। इसके अलावा हर स्कूल में शिक्षकों की संख्या भी 80 फीसदी पूरी है। फिर कक्षा पांच के प्रदेश का मुख्यमंत्री राहुल गांधी बताते हैं।
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 ऐसे में हाईकोर्ट के आदेेश से कुछ आशा जगी है कि जब अफसरों और नेताओं के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे तो शायद हालात में बदलाव आए। जनपद  में 2171 प्राथमिक विद्यालय व 846 पूर्व माध्यमिक विद्यालय हैं। प्राथमिक  विद्यालयों में करीब दो लाख सत्तावन हजार छह सौ बच्चे और पूर्व माध्यमिक  विद्यालय में 83,468 बच्चे पंजीकृत हैं।
स्टेटस सिंबल बने निजी स्कूल

निजी व महंगे स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना तो स्टेटस सिंबल बन गया है। सेंट एंथोनी इंटर कॉलेज व आनंद भवन कॉलेज में जनपद में कई अधिकारियों के बच्चे पढ़ रहे हैं। सरकारी व निजी कारों पर लगी नीली व लाल बत्ती से इन अधिकारियों के बच्चे स्कूल आते व जाते हैं। एएसपी दक्षिणी शफीक अहमद के दोनों बच्चे भी सेंट एंथोनी इंटर कॉलेज में पढ़ रहे हैं।

बच्चों के साथ खुद सरकारी स्कूल में ली शिक्षा
मेरी पूूूरी शिक्षा सरकारी स्कूल में हुई। बच्चे भी कुछ साल सरकारी स्कूलों में पढ़े हैं। हाईकोर्ट का फैसला एक क्रांतिकारी कदम है। सरकारी स्कूलों का स्तर सुधरे इससे बात कुछ नहीं हो सकती। आगे बदलाव होता है परिवार के बच्चे सरकारी स्कूल में ही पढ़ेंगे।
सुरेश यादव, विधायक सदर

सरकारी स्कूल का स्तर सुधरा तो बच्चे को जरूर पढ़ायेंगे
 
इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद जगी है। अधिकारी और नेता सचेत हों तो सरकारी स्कूलों में बदलाव आएगा। मैं तो कांवेंट में पढ़ी हूं। मेरे बच्चे अभी छोटे हैं। हमारी कोशिश होगी कि सरकारी स्कूलों का स्तर सुुधरे। ऐसा होने पर मेरे परिवार के बच्चे जरूर सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे।
प्रियंका रावत, सांसद

सुधार होने पर सभी सरकारी स्कूल में पढ़ाना करेंगे पसंद
मेरी मां सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल थीं। सरकारी स्कूलों में ही पढ़कर हमारे घर नौ लोग पीसीएस ओर आईएएस बने हैं। सरकारी कॉलेजों का स्तर सुधारने के लिए हर संभव प्रयास जारी है। हायर एजुकेशन में सुधार की जरूरत है। सुुधार होने पर सभी लोग अपने बच्चों को पढ़ाना पसंद करेंगे।
योगेश्वर राम मिश्रा, डीएम

बच्चे को पढ़ाऐंगे सरकारी स्कूल में
मैंने अपनी प्राइमरी स्तर से लेकर इंटर तक की शिक्षा सरकारी स्कूल केंद्रीय विद्यालय में ग्रहण की है। अभी बच्चा छोटा है, बच्चे को भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ाने की योजना है।
- अब्दुल हमीद, एसपी

खुद सरकारी स्कूल में पढ़ा, बच्चों का भी वहीं भेजूंगा
होश संभालने के बाद गांव के प्राइमरी स्कूल में पांचवीं तक की शिक्षा ग्रहण की थी। इसके बाद आगे की पढ़ाई भी सरकारी स्कूलों मेें की है और अब बच्चों को भी सरकारी स्कूलों में ही पढ़ा रहा हूं।
- कुंवर ज्ञानजंय सिंह, एएसपी उत्तरी

सुधार के लिए कदम उठाया जाए प्रतिबंध न लगाया जाए
मैंने अपनी शिक्षा सरकारी व प्राइवेट दोनों स्कूलों से ग्रहण की है। अपने बच्चों को भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ा रहा हूं। प्राइमरी स्तर की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए अन्य कदम उठाने चाहिए न कि किसी पर कोई ऐसा प्रतिबंध लगाया जाए कि वह अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में ही पढ़ाए।
- विशाल विक्रम सिंह, सीओ सदर

सरकारी स्कूलों की दशा सुधरे तो निजी स्कूलों खाली
अपनी पूरी शिक्षा सरकारी स्कूलों से ही ग्रहण की है। अब बच्चों को भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ा रहा हूं। यदि प्राथमिक स्तर के स्कूलों की दशा में सुधार हो जाए तो कोई भी अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए निजी स्कूलों की ओर न जाए।

राजेश सिंह, सीओ सिटी

शिक्षा में बदलाव जरूरी
मैंने तो कांवेंट स्कूल में पढ़ाई की है। आगे अगर सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरता है तो इसमें पढ़ाई कराने में कोई हिचक नहीं होगी। हम लोगों का प्रयास है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षा व्यवस्था में बदलाव आए।
- नीलम यादव, एसडीएम सदर
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