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Barabanki News: मशीन है नहीं लेकिन लाखों का वेतन ले रहे एक्सरे टेक्नीशियन
Thu, 06 Jul 2023 12:42 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 06 Jul 2023 12:42 AM IST
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क्रासर
- जिले की 13 सीएचसी पर बिना मशीन तैनात हैं एक्सरे टेक्नीशियन व सहायक
- रोजाना 400 से 500 मरीज निजी केंद्रों के भरोसे, गरीबों की होती जेब ढीली
संवाद न्यूज एजेंसी
बाराबंकी। स्वास्थ्य विभाग के खेल निराले हैं। जिले की करीब 13 सीएचसी पर जहां बिना एक्सरे मशीन के ही टेक्नीशियन व सहायकों को तैनात कर हर माह 10 लाख रुपये से अधिक वेतन दिया जा रहा है वहीं जरूरतमंद लोग निजी केंद्रों पर हर माह यही जांच कराने में करीब 30 लाख रूपये खर्च कर रहे हैं। हैरत वाली बात यह है कि पिछले छह-सात सालों से स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर भी सबकुछ जान कर अंजान बैठे हैं।
करीब 38 लाख की आबादी वाले जिले में 20 सीएचसी व 57 पीएचसी हैं। इन जगहों पर रोजाना करीब पांच से छह हजार मरीज रोज पहुंचते हैं। रविवार को पीएसची पर आयोजित स्वास्थ्य मेलों में भी भीड़ उमड़ती है। इनमें सैैकड़ों लोगों को चिकित्सक एक्सरे जांच लिखते हैं। इन 20 सीएचसी में टेक्नीशियन व सहायकों को तैनात कर दिया गया है मगर हैदरगढ़, फतेहपुर, सूरतगंज, टिकैतनगर, जैदपुर व सिरौलीगौसपुर सीएचसी को छोड़कर बाकी जगहों पर आज तक एक्सरे मशीन ही नहीं लगी। बाकी 13 सीएचसी पर पिछले छह-सात साल से तैनात एक्सरे टेक्नीशियन व सहायकों के वेतन पर हर महीने करीब 10 लाख रुपया खर्च हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले के शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में संचालित निजी केंद्रों पर रोजाना करीब 400 से 500 लोग एक्सरे जांच करवा रहे हैं। एक एक्सरे में 250 से 300 रुपये तक खर्च हो रहे हैं। अर्थात हर माह 30 लाख रुपये की एक्सरे जांच बाहर मजबूरी में करवाई जा रही हैं। सीएमओ डॉ. अवधेश यादव कहते हैं कि टेक्नीशियन व सहायकों की तैनाती शासन स्तर से हुई थी। एक्सरे मशीन लगवाने को लेकर शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है।
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जिला अस्पताल में रोज 150 से अधिक जांचें
सीएचसी से निराश होकर शहर से बहुत दूर न रहने वाले गांवों के लोग जिला अस्पताल में एक्सरे जांच करवाने पहुंचते हैं। इस कारण यहां सुबह से ही कतार लग जाती है। घायलों व भर्ती मरीजों की जांच प्राथमिकता के आधार पर होती है। दोपहर 12 बजे के बाद जांच होती नहीं है। जब भी रोजाना 150 से अधिक जांच हो रही है। बुधवार को 154 लोगों की डिजिटल एक्सरे जांच की गई।
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इन्सेट-
इन बीमारियों में लिखी जाती है एक्सरे जांच
हड्डी में फ्रेक्चर होने, फेफड़ों में समस्या, पाचन क्रिया गड़बड़ होने, संक्रमण, अर्थराइटिस, टीबी, खाने-पीने की वस्तुओं को निगलने में परेशानी होने पर व हृदय संबंधी परेशानियों में एक्सरे जांच लिखी जाती हैं।
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- जिले की 13 सीएचसी पर बिना मशीन तैनात हैं एक्सरे टेक्नीशियन व सहायक
- रोजाना 400 से 500 मरीज निजी केंद्रों के भरोसे, गरीबों की होती जेब ढीली
संवाद न्यूज एजेंसी
बाराबंकी। स्वास्थ्य विभाग के खेल निराले हैं। जिले की करीब 13 सीएचसी पर जहां बिना एक्सरे मशीन के ही टेक्नीशियन व सहायकों को तैनात कर हर माह 10 लाख रुपये से अधिक वेतन दिया जा रहा है वहीं जरूरतमंद लोग निजी केंद्रों पर हर माह यही जांच कराने में करीब 30 लाख रूपये खर्च कर रहे हैं। हैरत वाली बात यह है कि पिछले छह-सात सालों से स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर भी सबकुछ जान कर अंजान बैठे हैं।
करीब 38 लाख की आबादी वाले जिले में 20 सीएचसी व 57 पीएचसी हैं। इन जगहों पर रोजाना करीब पांच से छह हजार मरीज रोज पहुंचते हैं। रविवार को पीएसची पर आयोजित स्वास्थ्य मेलों में भी भीड़ उमड़ती है। इनमें सैैकड़ों लोगों को चिकित्सक एक्सरे जांच लिखते हैं। इन 20 सीएचसी में टेक्नीशियन व सहायकों को तैनात कर दिया गया है मगर हैदरगढ़, फतेहपुर, सूरतगंज, टिकैतनगर, जैदपुर व सिरौलीगौसपुर सीएचसी को छोड़कर बाकी जगहों पर आज तक एक्सरे मशीन ही नहीं लगी। बाकी 13 सीएचसी पर पिछले छह-सात साल से तैनात एक्सरे टेक्नीशियन व सहायकों के वेतन पर हर महीने करीब 10 लाख रुपया खर्च हो रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले के शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में संचालित निजी केंद्रों पर रोजाना करीब 400 से 500 लोग एक्सरे जांच करवा रहे हैं। एक एक्सरे में 250 से 300 रुपये तक खर्च हो रहे हैं। अर्थात हर माह 30 लाख रुपये की एक्सरे जांच बाहर मजबूरी में करवाई जा रही हैं। सीएमओ डॉ. अवधेश यादव कहते हैं कि टेक्नीशियन व सहायकों की तैनाती शासन स्तर से हुई थी। एक्सरे मशीन लगवाने को लेकर शासन को कई बार पत्र भेजा जा चुका है।
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जिला अस्पताल में रोज 150 से अधिक जांचें
सीएचसी से निराश होकर शहर से बहुत दूर न रहने वाले गांवों के लोग जिला अस्पताल में एक्सरे जांच करवाने पहुंचते हैं। इस कारण यहां सुबह से ही कतार लग जाती है। घायलों व भर्ती मरीजों की जांच प्राथमिकता के आधार पर होती है। दोपहर 12 बजे के बाद जांच होती नहीं है। जब भी रोजाना 150 से अधिक जांच हो रही है। बुधवार को 154 लोगों की डिजिटल एक्सरे जांच की गई।
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इन्सेट-
इन बीमारियों में लिखी जाती है एक्सरे जांच
हड्डी में फ्रेक्चर होने, फेफड़ों में समस्या, पाचन क्रिया गड़बड़ होने, संक्रमण, अर्थराइटिस, टीबी, खाने-पीने की वस्तुओं को निगलने में परेशानी होने पर व हृदय संबंधी परेशानियों में एक्सरे जांच लिखी जाती हैं।