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Barabanki News: हरख के क्रांतिकारियों ने अंग्रेज अफसर को पहनाई थी जूतों की माला
Tue, 13 Aug 2024 12:33 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 13 Aug 2024 12:33 AM IST
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बाराबंकी। जिला मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर बसे हरख गांव के क्रांतिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम में न भुलाने वाला योगदान दिया था। अंग्रेजों के छक्के छुड़वाने वाले हरख के क्रांतिकारियों ने वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय अंग्रेज अफसर हार्डी को पंचायत बुलाकर जूतों की माला पहनाई थी। इसके लिए चतुराई के साथ अंग्रेज अफसर को पंचायत में नाटक देखने का न्योता देकर बुलाया गया था।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. रामचंदर की पत्नी रामकांति बताती हैं कि नाटक समाप्त होने के बाद किसी ने अवधी भाषा में प्रस्तुत नाटक की पूरी कहानी अंग्रेज अफसर को बताई तो वह क्रोधित हो उठा और उसने पुलिस कर्मियों को गांव में भेजकर कार्यक्रम में बुलाने वालों को खूब यातनाएं दिए। साथ ही घरों से खाद्यान्न लूटकर कुएं में फिंकवाने के बाद उसमें आग भी लगा दी थी। बताया कि इस मामले में उनके पति समेत गांव के 18 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया गया, जहां यातनाएं देने के साथ ही उनसे जुर्माना भी वसूला गया।
देश आजाद होने के बाद वर्ष 1972 में 25वीं वर्षगांठ पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने ताम्र पत्र देकर स्वर्णिम योगदान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। स्वतंत्रता सेनानियों की याद में हरख में शहीद स्मारिका बनाई गई। (संवाद)
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हरख के दस प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी व उनका योगदान कल्लूदास- 1932 में छह माह, 12 माह नजरबंद। कालीचरण- छह सितंबर 1942 से 19 दिसंबर 1943 तक नजरबंद
द्वारिका प्रसाद- 1942 में छह माह कठोर कारावास प्यारेलाल- 1942 में 18 माह कारावास व 100 रुपये जुर्माना। पुत्तूलाल वर्मा- 1930 से 1942 तक 19 माह कारावास व अर्थदंड। बच्चूलाल वर्मा- कलकत्ता कांग्रेस में गिरफ्तारी के दौरान मृत्यु। दीन दयाल- 1943 में 18 माह कारावास। बैजनाथ प्रसाद- 1943 में छह माह कारावास व 50 रुपये जुर्माना।
रामगोपाल- 1942 में नौ माह कैद। रामकिशुन- 1942 में डेढ़ वर्ष सपरिवार कारावास।
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. रामचंदर की पत्नी रामकांति बताती हैं कि नाटक समाप्त होने के बाद किसी ने अवधी भाषा में प्रस्तुत नाटक की पूरी कहानी अंग्रेज अफसर को बताई तो वह क्रोधित हो उठा और उसने पुलिस कर्मियों को गांव में भेजकर कार्यक्रम में बुलाने वालों को खूब यातनाएं दिए। साथ ही घरों से खाद्यान्न लूटकर कुएं में फिंकवाने के बाद उसमें आग भी लगा दी थी। बताया कि इस मामले में उनके पति समेत गांव के 18 क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया गया, जहां यातनाएं देने के साथ ही उनसे जुर्माना भी वसूला गया।
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देश आजाद होने के बाद वर्ष 1972 में 25वीं वर्षगांठ पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने ताम्र पत्र देकर स्वर्णिम योगदान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। स्वतंत्रता सेनानियों की याद में हरख में शहीद स्मारिका बनाई गई। (संवाद)
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हरख के दस प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी व उनका योगदान कल्लूदास- 1932 में छह माह, 12 माह नजरबंद। कालीचरण- छह सितंबर 1942 से 19 दिसंबर 1943 तक नजरबंद
द्वारिका प्रसाद- 1942 में छह माह कठोर कारावास प्यारेलाल- 1942 में 18 माह कारावास व 100 रुपये जुर्माना। पुत्तूलाल वर्मा- 1930 से 1942 तक 19 माह कारावास व अर्थदंड। बच्चूलाल वर्मा- कलकत्ता कांग्रेस में गिरफ्तारी के दौरान मृत्यु। दीन दयाल- 1943 में 18 माह कारावास। बैजनाथ प्रसाद- 1943 में छह माह कारावास व 50 रुपये जुर्माना।
रामगोपाल- 1942 में नौ माह कैद। रामकिशुन- 1942 में डेढ़ वर्ष सपरिवार कारावास।