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Barabanki News: शहनाइयों पर विराम, अब देवोत्थान के बाद होंगे मांगलिक कार्य
Thu, 16 Jul 2026 01:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 16 Jul 2026 01:54 AM IST
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बाराबंकी। अब शादी-विवाह और अन्य मांगलिक आयोजनों पर करीब चार माह का विराम लगने जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 15 जुलाई से गुरु ग्रह के अस्त होने और 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ होने के कारण विवाह सहित सभी शुभ कार्य स्थगित रहेंगे। अब शहनाइयों की गूंज सीधे 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के बाद सुनाई देगी।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि गुरु ग्रह 15 जुलाई से अस्त हो जाएंगे और 12 अगस्त को वापस उदय होंगे। हालांकि इसके बाद भी विवाह नहीं हो सकेंगे क्योंकि 25 जुलाई से भगवान विष्णु के शयनकाल यानी चातुर्मास का शुरू हो जाएगा। मान्यता है कि इस अवधि में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। मुड़कटी देवी मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य पं. वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि चातुर्मास को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वहीं विवाह के लिए देवोत्थान एकादशी के बाद मिलने वाले शुभ मुहूर्तों का इंतजार करना होगा।
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इस वर्ष के विवाह मुहूर्त--
नवंबर – 21, 24, 25, 26
दिसंबर – 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12
शुरू हुए गुप्त नवरात्र
आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र बुधवार से शुरू हो गए हैं जो 23 जुलाई तक चलेंगे। पं. वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि आषाढ़ गुप्त नवरात्र शक्ति साधना और मां भगवती की आराधना का पावन पर्व है। इन नौ दिनों में प्रातः स्नान कर कलश स्थापना, अखंड दीप प्रज्ज्वलित करना, दुर्गा सप्तशती या देवी कवच का पाठ, माता को लाल पुष्प, चुनरी, फल और नैवेद्य अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है।
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ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि गुरु ग्रह 15 जुलाई से अस्त हो जाएंगे और 12 अगस्त को वापस उदय होंगे। हालांकि इसके बाद भी विवाह नहीं हो सकेंगे क्योंकि 25 जुलाई से भगवान विष्णु के शयनकाल यानी चातुर्मास का शुरू हो जाएगा। मान्यता है कि इस अवधि में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
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20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। मुड़कटी देवी मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य पं. वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि चातुर्मास को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वहीं विवाह के लिए देवोत्थान एकादशी के बाद मिलने वाले शुभ मुहूर्तों का इंतजार करना होगा।
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इस वर्ष के विवाह मुहूर्त
नवंबर – 21, 24, 25, 26
दिसंबर – 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12
शुरू हुए गुप्त नवरात्र
आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र बुधवार से शुरू हो गए हैं जो 23 जुलाई तक चलेंगे। पं. वीरेंद्र व्यास शास्त्री ने बताया कि आषाढ़ गुप्त नवरात्र शक्ति साधना और मां भगवती की आराधना का पावन पर्व है। इन नौ दिनों में प्रातः स्नान कर कलश स्थापना, अखंड दीप प्रज्ज्वलित करना, दुर्गा सप्तशती या देवी कवच का पाठ, माता को लाल पुष्प, चुनरी, फल और नैवेद्य अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है।