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Barabanki News: पानी व दोना-पत्तल बेचकर लखपति दीदी बनने का जज्बा
Sun, 13 Apr 2025 12:53 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 13 Apr 2025 12:53 AM IST
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रामनगर (बाराबंकी)। जिले के बिरौली गांव की महिलाएं लखपति दीदी बनने के सपने को साकार बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पानी व दोना-पत्तल बेच रही हैं। समूह की दीदियों का पीने के पानी को बोतल व जार में बेचने से शुरू हुआ सफर अब दोना पत्तल बनाकर बेचने तक फैल चुका है। हर कोई गांव के महिलाओं के स्वावलंबन की मिसाल देकर इसे अपनाने व साकार बनाने में जुटा है।
बिरौली गांव की कुछ महिलाओं ने राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत पेयजल सहायता समूह का गठन फरवरी 2020 में किया था। इस समूह की अध्यक्ष किरन देवी और कोषाध्यक्ष रीना देवी हैं। इनके समूह में माधुरी देवी, प्रेमावती, छाया, मूर्ति, गुड़िया व सुशीला समेत 10 महिलाएं हैं। शुरुआती कुछ सालों तक समूह की महिलाओं ने पीने के पानी को छोटी बोतलों व जार में पैक्ड कर बेचने का काम किया। इनके ब्रांड की तैयार पैक्ड वाटर बोतल व जार की सप्लाई जिले के कई इलाकों में हो रही है।
समूह की कोषाध्यक्ष रीना देवी ने बताया कि पैक्ड वाटर सप्लाई का काम ठीक ठाक चलने के बाद समूह की महिलाओं ने दोना पत्तल बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद फिरोजाबाद से हाथ से चलने वाली दोना बनाने की मशीन खरीदी और इसे घर पर स्थापित कर दोना पत्तल बनाने का काम भी शुरू कर दिया। लखनऊ से कच्चे माल के रूप में कागज व पन्नी मंगवाकर प्रतिदिन दो से तीन हजार तक दोने-पत्तल तक तैयार कर लेती है।
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बताया कि इससे काम करने वाली समूह की महिलाओं का पारिश्रमिक, कच्चे माल व अन्य खर्चों को निकाल कर भी 10-12 हजार रुपये महीने की आमदनी हो जाती है। तैयार दोना पत्तल की सप्लाई क्षेत्र के बिन्दौरा, मसौली व त्रिलोकपुर के आसपास तथा जिले के अन्य क्षेत्रों में हो रही है। 30 पीस दोने वाला पैकेट आठ रुपये में बेचा जाता है। (संवाद)
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बिरौली गांव की कुछ महिलाओं ने राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत पेयजल सहायता समूह का गठन फरवरी 2020 में किया था। इस समूह की अध्यक्ष किरन देवी और कोषाध्यक्ष रीना देवी हैं। इनके समूह में माधुरी देवी, प्रेमावती, छाया, मूर्ति, गुड़िया व सुशीला समेत 10 महिलाएं हैं। शुरुआती कुछ सालों तक समूह की महिलाओं ने पीने के पानी को छोटी बोतलों व जार में पैक्ड कर बेचने का काम किया। इनके ब्रांड की तैयार पैक्ड वाटर बोतल व जार की सप्लाई जिले के कई इलाकों में हो रही है।
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समूह की कोषाध्यक्ष रीना देवी ने बताया कि पैक्ड वाटर सप्लाई का काम ठीक ठाक चलने के बाद समूह की महिलाओं ने दोना पत्तल बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद फिरोजाबाद से हाथ से चलने वाली दोना बनाने की मशीन खरीदी और इसे घर पर स्थापित कर दोना पत्तल बनाने का काम भी शुरू कर दिया। लखनऊ से कच्चे माल के रूप में कागज व पन्नी मंगवाकर प्रतिदिन दो से तीन हजार तक दोने-पत्तल तक तैयार कर लेती है।
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बताया कि इससे काम करने वाली समूह की महिलाओं का पारिश्रमिक, कच्चे माल व अन्य खर्चों को निकाल कर भी 10-12 हजार रुपये महीने की आमदनी हो जाती है। तैयार दोना पत्तल की सप्लाई क्षेत्र के बिन्दौरा, मसौली व त्रिलोकपुर के आसपास तथा जिले के अन्य क्षेत्रों में हो रही है। 30 पीस दोने वाला पैकेट आठ रुपये में बेचा जाता है। (संवाद)