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Barabanki News: जिला महिला अस्पताल की लैब होगी और हाईटेक, लगेंगी कोगुलेशन और इलेक्ट्रोलाइट मशीन
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जिला महिला अस्पताल में बनी आधुनिक लैब।
- फोटो : जिला महिला अस्पताल में बनी आधुनिक लैब।
बाराबंकी। जिला महिला अस्पताल की लैब को और हाईटेक किया जा रहा है। यहां दो और नई मशीनें लगाई जा रही हैं। इनमें से एक मशीन महिलाओं में होने वाले रक्तस्राव (ब्लीडिंग) का समय बताएगी तो दूसरी मशीन से नवजात व न बोल पाने वाले बीमार बच्चों की जांच हो सकेगी। दोनों मशीनों को लगाने की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि नए साल से इसका लाभ मरीजों को मिलने लगेगा।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 350 से 400 गर्भवती महिलाएं आती हैं। प्रतिदिन 15 से 20 सिजेरियन और 10 से 15 सामान्य प्रसव होते हैं। करीब 250 की प्रतिदिन जांच कराई जाती है। इसके अलावा मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। यहां पहले से बनी आधुनिक लैब को अब और हाईटेक किया जा रहा है। यहां लगाई जा रही नई कोगुलेशन मशीन से महिलाओं में होने वाले रक्तस्राव के समय की जानकारी मिल सकेगी। अस्पताल में ज्यादातर सिजेरियन प्रसव होते हैं, ऐसे में यह जांच बहुत कारगर साबित होगी। इसके अलावा दूसरी इलेक्ट्रोलाइट मशीन है। यह मशीन बीमार नवजात व न बोल पाने वाले बच्चों की जांच कर बताएगी कि उनके रक्त में कौन से तत्वों की कमी है।
अभी लखनऊ की लगानी पड़ती है दौड़
जिले में इस तरह की दोनों जांच कराए जाने की अभी सुविधा न होने से तीमारदारों को अपने मरीजों को लखनऊ ले जाना पड़ता है। यह जांच काफी महंगी भी है। जिला महिला अस्पताल में दोनों आधुनिक मशीनें लगने से गर्भवती महिलाओं व बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी।
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महिला अस्पताल की लैब को और हाइटेक बनाया जा रहा है। यहां पर कोगुलेशन और इलेक्ट्रोलाइट मशीन लगाई जाएगी। इसको लेकर प्रक्रिया चल रही है। अगले महीने से इन मशीनों का लाभ मरीजों को मिलने लगेगा। -डॉ. प्रदीप कुमार, जिला महिला अस्पताल
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जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 350 से 400 गर्भवती महिलाएं आती हैं। प्रतिदिन 15 से 20 सिजेरियन और 10 से 15 सामान्य प्रसव होते हैं। करीब 250 की प्रतिदिन जांच कराई जाती है। इसके अलावा मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। यहां पहले से बनी आधुनिक लैब को अब और हाईटेक किया जा रहा है। यहां लगाई जा रही नई कोगुलेशन मशीन से महिलाओं में होने वाले रक्तस्राव के समय की जानकारी मिल सकेगी। अस्पताल में ज्यादातर सिजेरियन प्रसव होते हैं, ऐसे में यह जांच बहुत कारगर साबित होगी। इसके अलावा दूसरी इलेक्ट्रोलाइट मशीन है। यह मशीन बीमार नवजात व न बोल पाने वाले बच्चों की जांच कर बताएगी कि उनके रक्त में कौन से तत्वों की कमी है।
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अभी लखनऊ की लगानी पड़ती है दौड़
जिले में इस तरह की दोनों जांच कराए जाने की अभी सुविधा न होने से तीमारदारों को अपने मरीजों को लखनऊ ले जाना पड़ता है। यह जांच काफी महंगी भी है। जिला महिला अस्पताल में दोनों आधुनिक मशीनें लगने से गर्भवती महिलाओं व बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी।
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महिला अस्पताल की लैब को और हाइटेक बनाया जा रहा है। यहां पर कोगुलेशन और इलेक्ट्रोलाइट मशीन लगाई जाएगी। इसको लेकर प्रक्रिया चल रही है। अगले महीने से इन मशीनों का लाभ मरीजों को मिलने लगेगा। -डॉ. प्रदीप कुमार, जिला महिला अस्पताल