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Barabanki News: संबल बन सुमन बदल रहीं महिलाओं की तकदीर
Sun, 04 Jan 2026 01:57 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 04 Jan 2026 01:57 AM IST
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सिलाई सिखाती बनीकोडर ब्लॉक के सुरजवापुर गांव की रहने वाली सुमन वर्मा ।
रामसनेहीघाट। बनीकोडर ब्लॉक के सुरजवापुर गांव की रहने वाली सुमन वर्मा ने एनआरएलएम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लखपति दीदी बनने के लक्ष्य को हालिस कर लिया है। स्वावलंबन और आर्थिक तरक्की की राह पर चल रहीं सुमन क्षेत्र की कई महिलाओं के लिए एक संबल भी बन गई हैं। तीन सौ से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित कर स्वरोजगार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।
इंटरमीडिएट तक शिक्षित सुमन वर्मा की शादी 2005 में हुई थी। पति खेती करते हैं। दो बच्चों की जिम्मेदारी है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण सुमन ने कुछ करने की ठानी। वर्ष 2021 में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत सुमन साईं बाबा स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद स्वरोजगार का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद लखनऊ-अयोध्या हाईवे किनारे एक किराये की दुकान लेकर महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और मेहंदी लगाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया। वह मांगलिक आयोजनों में मेहंदी लगाने का काम भी करने लगीं। इससे सुमन की हर माह करीब 12 से 15 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। लगभग 300 महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई और मेहंदी का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
सुमन से प्रशिक्षण लेकर कई महिलाएं घर बैठे ही काम कर अपने परिवार की आजीविका चला रही हैं। वह अपने घर की पूरी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। सुमन का कहना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं। प्रधानमंत्री के लखपति दीदी बनने का लक्ष्य इसी आत्मनिर्भरता के कारण हासिल हुआ। संवाद
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इंटरमीडिएट तक शिक्षित सुमन वर्मा की शादी 2005 में हुई थी। पति खेती करते हैं। दो बच्चों की जिम्मेदारी है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण सुमन ने कुछ करने की ठानी। वर्ष 2021 में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत सुमन साईं बाबा स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद स्वरोजगार का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद लखनऊ-अयोध्या हाईवे किनारे एक किराये की दुकान लेकर महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और मेहंदी लगाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया। वह मांगलिक आयोजनों में मेहंदी लगाने का काम भी करने लगीं। इससे सुमन की हर माह करीब 12 से 15 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। लगभग 300 महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई और मेहंदी का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।
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सुमन से प्रशिक्षण लेकर कई महिलाएं घर बैठे ही काम कर अपने परिवार की आजीविका चला रही हैं। वह अपने घर की पूरी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। सुमन का कहना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं। प्रधानमंत्री के लखपति दीदी बनने का लक्ष्य इसी आत्मनिर्भरता के कारण हासिल हुआ। संवाद
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