{"_id":"61575f9f8ebc3e090418e543","slug":"sugar-mill-barabanki-news-lko59820112","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बंद शुगर मिल सील","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बंद शुगर मिल सील
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाराबंकी। बंद बाराबंकी शुगर मिल को बसपा सरकार में कौड़ियों के भाव बेचे जाने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। ईडी व प्रशासन की टीम ने मिल को सील कर मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू कर दी है। इस मिल सम्पत्ति की जितनी स्टांप ड्यूटी बनती थी, उसके आधे से कम में नीलामी करने का मामला पकड़ में आने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग का केस सेशन कोर्ट में पहुंचा। इसके बाद पूरे मामला प्रवर्तन निदेशालय का स्थानांतरित कर दिया। जिसके क्रम में शुक्रवार को पहुंची प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने शुगर मिल की सीलिंग कर पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया।
देवा व ग्वारी रोड के किनारे स्थित बाराबंकी शुगर मिल वर्ष 1996 में बंद हो गई थी। धीरे-धीरे यहां के पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों ने चोरीछिपे स्क्रैप बेचने का काम शुरू कर दिया। इसमें पड़ोस के गांव मंझपुरवा के लोगों ने तो शुगर मिल की चोरी की ईंटों से मकान तक बना लिए। वर्ष 2010 में चोरी के स्क्रैप लदी एक गाड़ी तत्कालीन एसपी आलोक सिंह ने पकड़वाई थी। जिसमें मिल के पूर्व कर्मचारी नेता सुभाष का नाम सामने आने पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।
इसी बीच बसपा सरकार में बंद शुगर मिल कौड़ियों के भाव महज करीब 11 करोड़ में नीलाम कर दी गई। जबकि शुगर मिल की सम्पति की स्टांप ड्यूटी अकेले करीब 25 करोड़ रुपये की पाई गई। ऐसे में सेशन कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत मुकदमा अभी भी लंबित है। वहीं बसपा शासनकाल में नीलाम (बेची गई) शुगर मिल का मामला प्रवर्तन निदेशालय को हस्तांतरित कर दिया गया।
विज्ञापन
इस मामले में शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय लखनऊ से प्रवर्तन विभाग के अधिकारी अजय गुप्ता व अनुभाग अधिकारी तुषार मलिक जिले में पहुंचे। जहां पर तहसीलदार तपन मिश्र, कानूनगो आशुतोष उपाध्याय व पुलिस टीम के साथ शुगर मिल पहुंचे। शुगर मिल की सीलिंग कराने के साथ पूरी संपत्ति को अपने कब्जे में लिया।
विज्ञापन
देवा व ग्वारी रोड के किनारे स्थित बाराबंकी शुगर मिल वर्ष 1996 में बंद हो गई थी। धीरे-धीरे यहां के पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों ने चोरीछिपे स्क्रैप बेचने का काम शुरू कर दिया। इसमें पड़ोस के गांव मंझपुरवा के लोगों ने तो शुगर मिल की चोरी की ईंटों से मकान तक बना लिए। वर्ष 2010 में चोरी के स्क्रैप लदी एक गाड़ी तत्कालीन एसपी आलोक सिंह ने पकड़वाई थी। जिसमें मिल के पूर्व कर्मचारी नेता सुभाष का नाम सामने आने पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।
विज्ञापन
इसी बीच बसपा सरकार में बंद शुगर मिल कौड़ियों के भाव महज करीब 11 करोड़ में नीलाम कर दी गई। जबकि शुगर मिल की सम्पति की स्टांप ड्यूटी अकेले करीब 25 करोड़ रुपये की पाई गई। ऐसे में सेशन कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत मुकदमा अभी भी लंबित है। वहीं बसपा शासनकाल में नीलाम (बेची गई) शुगर मिल का मामला प्रवर्तन निदेशालय को हस्तांतरित कर दिया गया।
विज्ञापन
इस मामले में शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय लखनऊ से प्रवर्तन विभाग के अधिकारी अजय गुप्ता व अनुभाग अधिकारी तुषार मलिक जिले में पहुंचे। जहां पर तहसीलदार तपन मिश्र, कानूनगो आशुतोष उपाध्याय व पुलिस टीम के साथ शुगर मिल पहुंचे। शुगर मिल की सीलिंग कराने के साथ पूरी संपत्ति को अपने कब्जे में लिया।