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एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल से प्रभावित हो रही सेवाएं, बेहाल हो रहे मरीज
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बाराबंकी। एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका विपरीत असर पड़ने लगा है। जिससे लोगों की दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। एंबुलेंस नहीं मिलने से लोग मरीजों को निजी वाहनों से ले जाते दिखाई दिए। जिला महिला अस्पताल की स्थिति तो और खराब होती जा रही है। यहां पर भर्ती मरीजों के तीमारदारों को जच्चा-बच्चा को घर ले जाने के लिए निजी वाहन तक नहीं मिल रहे हैं और जो मिल भी रहे वह इतने ज्यादा पैसे मांग रहे हैं जो तीमारदारों की पहुंच से बाहर हैं। ऐसे में इनकी समस्याएं और ज्यादा बढ़ती जा रही हैं।
मांगों को लेकर एंबुलेंस कर्मियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हाईवे किनारे लाइन से एंबुलेंस खड़ी कर प्रदर्शन किया। एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। जिसके चलते मरीजों के साथ ही उनके तीमारदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जीवनदायिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हनुमान प्रसाद पांडेय ने बताया कि जब तक हम लोगों की मांगों को नहीं मान लिया जाता है हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। एंबुलेंस कर्मियों द्वारा चक्का जाम किए जाने के बाद भी शासन स्तर पर कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। संगठन के जिलाध्यक्ष योगेश कुमार ने कहा कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती हैं कर्मचारी काम पर वापस नहीं आएंगे।
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एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल का जिले में व्यापक असर देखने को मिला। सूचना दिए जाने के बावजूद लोगों को एंबुलेंस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा और इसके बाद भी जब एंबुलेंस नहीं मिली तो लोग मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल लेकर पहुंचे।
पड़ोसी के वाहन से मरीज लेकर पहुंच रहे तीमारदार
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में निजी वाहन से मरीज लेकर पहुंचे राजेन्द्र ने बताया कि पत्नी की हालत बिगड़ने पर एंबुलेंस के लिए फोन किया गया। लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं आई तो पड़ोसी के वाहन से मरीज को अस्पताल लाया गया।
इसी प्रकार विश्वनाथ ने बताया कि पत्नी को प्रसव होने के बाद मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। निजी वाहन चालक इतना ज्यादा पैसा मांग रहे हैं जो उसके बस से बाहर है। दोस्त की मदद से उसकी कार से जच्चा-बच्चा को घर पहुंचाया गया।
एंबुलेंस चालकों का मुद्दा शासन स्तर का है फिर भी एंबुलेंस कर्मियों से बराबर वार्ता की जा रही है। उम्मीद है, बहुत जल्द एंबुलेंस कर्मी कार्य पर वापस आ जाएंगे।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ
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मांगों को लेकर एंबुलेंस कर्मियों ने सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हाईवे किनारे लाइन से एंबुलेंस खड़ी कर प्रदर्शन किया। एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। जिसके चलते मरीजों के साथ ही उनके तीमारदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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जीवनदायिनी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हनुमान प्रसाद पांडेय ने बताया कि जब तक हम लोगों की मांगों को नहीं मान लिया जाता है हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। एंबुलेंस कर्मियों द्वारा चक्का जाम किए जाने के बाद भी शासन स्तर पर कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। संगठन के जिलाध्यक्ष योगेश कुमार ने कहा कि जब तक मांगें नहीं मानी जाती हैं कर्मचारी काम पर वापस नहीं आएंगे।
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एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल का जिले में व्यापक असर देखने को मिला। सूचना दिए जाने के बावजूद लोगों को एंबुलेंस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा और इसके बाद भी जब एंबुलेंस नहीं मिली तो लोग मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल लेकर पहुंचे।
पड़ोसी के वाहन से मरीज लेकर पहुंच रहे तीमारदार
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में निजी वाहन से मरीज लेकर पहुंचे राजेन्द्र ने बताया कि पत्नी की हालत बिगड़ने पर एंबुलेंस के लिए फोन किया गया। लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं आई तो पड़ोसी के वाहन से मरीज को अस्पताल लाया गया।
इसी प्रकार विश्वनाथ ने बताया कि पत्नी को प्रसव होने के बाद मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी कर दी गई। निजी वाहन चालक इतना ज्यादा पैसा मांग रहे हैं जो उसके बस से बाहर है। दोस्त की मदद से उसकी कार से जच्चा-बच्चा को घर पहुंचाया गया।
एंबुलेंस चालकों का मुद्दा शासन स्तर का है फिर भी एंबुलेंस कर्मियों से बराबर वार्ता की जा रही है। उम्मीद है, बहुत जल्द एंबुलेंस कर्मी कार्य पर वापस आ जाएंगे।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ