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डेढ़ से दोगुने रेट पर बेचे जा रहे स्टांप
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बाराबंकी। फर्जीवाड़े पर अंकुश, समय की बचत व कमीशनखोरी से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार ने जनरल स्टांप की छपाई बंद कराकर ई-स्टांप की सुविधा शुरू की। मगर, इस दौरान 10, 50 और 100 रुपये के छोटे स्टांप की किल्लत स्टांप वेंडर व ई-स्टांप के अधिकृत संग्रह केंद्र संचालकों की कमाई का जरिया बन गया हैं।
कलेक्ट्रेट व उप निबंधन कार्यालय में डेढ़ से दोगुनी कीमत पर स्टांप बेचे जा रहे हैं। अगर, किसी ग्राहक ने भूल से ई-स्टांप के कमीशन का विरोध किया तो तकनीकी कमी बताकर उसे लौटाया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यालयों के पास हो रही स्टांप की कालाबाजारी से अधिकारी अंजान बने है।
फर्जीवाड़े व कमीशनखोरी से ग्राहकों को छुटकारा दिलाने सरकार ने जनरल स्टांप की छपाई बंद करा दी। उसकी जगह अब ई-स्टांप के लिए स्टाक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया नाम की कंपनी को नामित किया। जिसका कार्यालय उप निबंधन कार्यालय नवाबगंज के गेट पर बनाया गया हैं।
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वहीं जिले में 15 एसीसी (अधिकृत संग्रह केंद्र) भी बनाए गए हैं। इस दौरान छोटे 10, 50 व 100 रुपये के जनरल स्टांप न आने से किल्लत पैदा हो गई है। ऐसे में डीएम व एआईजी स्टांप के कार्यालय व कोषागार के पास स्थित अधिकृत संग्रह केंद्र एसीसी डेढ़ से दोगुने रेट पर ग्राहकों को छोटे स्टांप बेच रहे हैं।
यह अकेला एसीसी नहीं है। उप निबंधन कार्यालय के अंदर व बाहर तीन अधिकृत संग्रह केंद्र पर छोटे व बड़े स्टांप खरीदने में कमीशनखोरी से ग्राहकों की जेब ढीली हो रही है। सोमवार को आदर्श मिश्रा व अखिलेश वर्मा बैंक में स्टांप की आवश्यकता को लेकर स्टांप लेने अधिकृत संग्रह केंद्र पर गए। जहां पर फार्म भरकर जमा किया।
मगर, उसके बाद सौ रुपये के स्टांप पर 25 रुपये कमीशन के साथ रुपये की डिमांड एसीसी ने की। उन्होंने इस पर विरोध व्यक्त किया तो तकनीकी खामियां बताकर एसीसी ने स्टांप का प्रिंटआउट न निकलने की बात कहते हुए लौटा दिया। इस पर वह उप निबंधक कार्यालय में स्थित अधिकृत संग्रह केंद्र पर स्टांप लेने पहुंचे। मगर, यहां भी सम्पत्ति खरीदने में लगने वाले ई-स्टांप पर दो प्रतिशत कमीशन तो छोटे ई-स्टांप न मिलने की बात बताकर टरका दिया गया। (संवाद)
ई-स्टांप तय कीमत पर ही मिल रहे हैं। पहले तो डेढ़ से दोगुने रेट पर स्टांप बेचने की बात गलत है। वहीं अगर किसी ने अधिक रुपये ले भी लिए तो उसमें हम क्या कर सकते हैं। जिसे जरूरत होगी वह ई-स्टांप लेगा ही।
-वंदना सिंह, एआईजी स्टांप एवं निबंधन
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कलेक्ट्रेट व उप निबंधन कार्यालय में डेढ़ से दोगुनी कीमत पर स्टांप बेचे जा रहे हैं। अगर, किसी ग्राहक ने भूल से ई-स्टांप के कमीशन का विरोध किया तो तकनीकी कमी बताकर उसे लौटाया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यालयों के पास हो रही स्टांप की कालाबाजारी से अधिकारी अंजान बने है।
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फर्जीवाड़े व कमीशनखोरी से ग्राहकों को छुटकारा दिलाने सरकार ने जनरल स्टांप की छपाई बंद करा दी। उसकी जगह अब ई-स्टांप के लिए स्टाक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया नाम की कंपनी को नामित किया। जिसका कार्यालय उप निबंधन कार्यालय नवाबगंज के गेट पर बनाया गया हैं।
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वहीं जिले में 15 एसीसी (अधिकृत संग्रह केंद्र) भी बनाए गए हैं। इस दौरान छोटे 10, 50 व 100 रुपये के जनरल स्टांप न आने से किल्लत पैदा हो गई है। ऐसे में डीएम व एआईजी स्टांप के कार्यालय व कोषागार के पास स्थित अधिकृत संग्रह केंद्र एसीसी डेढ़ से दोगुने रेट पर ग्राहकों को छोटे स्टांप बेच रहे हैं।
यह अकेला एसीसी नहीं है। उप निबंधन कार्यालय के अंदर व बाहर तीन अधिकृत संग्रह केंद्र पर छोटे व बड़े स्टांप खरीदने में कमीशनखोरी से ग्राहकों की जेब ढीली हो रही है। सोमवार को आदर्श मिश्रा व अखिलेश वर्मा बैंक में स्टांप की आवश्यकता को लेकर स्टांप लेने अधिकृत संग्रह केंद्र पर गए। जहां पर फार्म भरकर जमा किया।
मगर, उसके बाद सौ रुपये के स्टांप पर 25 रुपये कमीशन के साथ रुपये की डिमांड एसीसी ने की। उन्होंने इस पर विरोध व्यक्त किया तो तकनीकी खामियां बताकर एसीसी ने स्टांप का प्रिंटआउट न निकलने की बात कहते हुए लौटा दिया। इस पर वह उप निबंधक कार्यालय में स्थित अधिकृत संग्रह केंद्र पर स्टांप लेने पहुंचे। मगर, यहां भी सम्पत्ति खरीदने में लगने वाले ई-स्टांप पर दो प्रतिशत कमीशन तो छोटे ई-स्टांप न मिलने की बात बताकर टरका दिया गया। (संवाद)
ई-स्टांप तय कीमत पर ही मिल रहे हैं। पहले तो डेढ़ से दोगुने रेट पर स्टांप बेचने की बात गलत है। वहीं अगर किसी ने अधिक रुपये ले भी लिए तो उसमें हम क्या कर सकते हैं। जिसे जरूरत होगी वह ई-स्टांप लेगा ही।
-वंदना सिंह, एआईजी स्टांप एवं निबंधन