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शिक्षामित्रों ने किया प्रदर्शन
अमर उजाला/बाराबंकी
Updated Fri, 08 Sep 2017 11:58 PM IST
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प्रदर्शन करते शिक्षामित्र
- फोटो : अमर उजाला
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सरकार के फैसले से आक्रोशित शिक्षामित्रों ने शुक्रवार को बैठक के बाद लखनऊ-फैजाबाद हाइवे जाम कर दिया। दो चरणों में आधा घंटा तक हाइवे जाम होने से यातायात प्रभावित हो गया। कई थानों की पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए प्रदर्शनकारियों को समझाकर शांत करा दिया। करीब बीस मिनट तक जाम रहने से वाहनों की कतारें लगना शुरू हुई तो, पुलिस ने मार्ग डायवर्जन कर यातायात जारी रखा।
शिक्षामित्रों का 3500 रुपये से बढ़ाकर दस हजार मानदेय किए जाने का आदेश जारी होने पर शिक्षामित्रों ने इसका विरोध करते हुए शिक्षण कार्य का बहिष्कार कर दिया। विरोध के तीसरे दिन शिक्षामित्र बड़ेल स्थित एक पैलेस में शुक्रवार को एकत्र हुए। उसके बाद दोपहर डेढ़ बजे हाइवे जाम करने के लिए रवाना हो गए। पूर्व निर्धारित कार्र्यक्रम होने के कारण पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
शिक्षामित्रों ने हैदरगढ़ मार्ग के पास रसौली की ओर जाने वाले हाइवे को जाम कर दिया। तेज धूप के साथ शिक्षामित्रों का पारा चढ़ता गया। मोदी व योगी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षामित्र समान कार्य का समान वेतन दिए जाने की मांग करते रहे।
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पुलिस द्वारा सतरिख बाईपास से होते हुए व बड़ेल की ओर से मार्ग डायवर्जन कर वाहनों को निकालते रहे। उसके बाद शिक्षामित्रों की भीड़ सफेदाबाद की ओर जाते हुए पुल के आखिरी छोर पर लेट गए और मार्ग जाम कर दिया। यहां पर करीब 20 मिनट तक हाइवे जाम कर नारेबाजी करने से वाहनों की लाइने लग गई। पुलिस ने शिक्षामित्रों को समझाकर वापस कर दिया।
शिक्षामित्र हाइवे जाम कर आर पार की लड़ाई लड़ने की रणनीति तैयार करके गए थे। शिक्षामित्रों ने तेज धूप में लेटकर एक ओर मार्ग जाम कर रखा था वहीं दूसरी ओर संघ के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार वर्मा ने पुुलिस से समझौता कर सबको वापस करने लगे। जिस पर धर्मी देवी, गीतांजलि, सुनीता रावत, विनोद वर्मा, रवींद्र सिंह, रामशंकर ने जिलाध्यक्ष पर अधूरी लड़ाई छोड़कर भागने की बात कहते हुए आक्रोशित हो गए।
हाइवे पर हजारों की भीड़ देख एक लैया चना बेचने वाला ठेला लेकर पहुंच गया। पुलिस ने भीड़ न एकत्र हो इसके लिए उसे वहां से भगा दिया। भूखे प्यासे शिक्षामित्रों ने उसे किनारे ले जाकर सामान खरीदा और खुद को थोड़ी राहत दी।
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शिक्षामित्रों का 3500 रुपये से बढ़ाकर दस हजार मानदेय किए जाने का आदेश जारी होने पर शिक्षामित्रों ने इसका विरोध करते हुए शिक्षण कार्य का बहिष्कार कर दिया। विरोध के तीसरे दिन शिक्षामित्र बड़ेल स्थित एक पैलेस में शुक्रवार को एकत्र हुए। उसके बाद दोपहर डेढ़ बजे हाइवे जाम करने के लिए रवाना हो गए। पूर्व निर्धारित कार्र्यक्रम होने के कारण पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
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शिक्षामित्रों ने हैदरगढ़ मार्ग के पास रसौली की ओर जाने वाले हाइवे को जाम कर दिया। तेज धूप के साथ शिक्षामित्रों का पारा चढ़ता गया। मोदी व योगी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षामित्र समान कार्य का समान वेतन दिए जाने की मांग करते रहे।
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पुलिस द्वारा सतरिख बाईपास से होते हुए व बड़ेल की ओर से मार्ग डायवर्जन कर वाहनों को निकालते रहे। उसके बाद शिक्षामित्रों की भीड़ सफेदाबाद की ओर जाते हुए पुल के आखिरी छोर पर लेट गए और मार्ग जाम कर दिया। यहां पर करीब 20 मिनट तक हाइवे जाम कर नारेबाजी करने से वाहनों की लाइने लग गई। पुलिस ने शिक्षामित्रों को समझाकर वापस कर दिया।
शिक्षामित्र हाइवे जाम कर आर पार की लड़ाई लड़ने की रणनीति तैयार करके गए थे। शिक्षामित्रों ने तेज धूप में लेटकर एक ओर मार्ग जाम कर रखा था वहीं दूसरी ओर संघ के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार वर्मा ने पुुलिस से समझौता कर सबको वापस करने लगे। जिस पर धर्मी देवी, गीतांजलि, सुनीता रावत, विनोद वर्मा, रवींद्र सिंह, रामशंकर ने जिलाध्यक्ष पर अधूरी लड़ाई छोड़कर भागने की बात कहते हुए आक्रोशित हो गए।
हाइवे पर हजारों की भीड़ देख एक लैया चना बेचने वाला ठेला लेकर पहुंच गया। पुलिस ने भीड़ न एकत्र हो इसके लिए उसे वहां से भगा दिया। भूखे प्यासे शिक्षामित्रों ने उसे किनारे ले जाकर सामान खरीदा और खुद को थोड़ी राहत दी।