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अव्यवस्थाओं के बीच आज से खुलेंगे परिषदीय स्कूल
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बाराबंकी। परिसर में उगी बड़ी-बड़ी घास, गिरी पड़ी बाउंड्रीवाल समेत अन्य अव्यवस्थाओं के बीच बुधवार से परिषदीय स्कूल खुल जाएंगे। एक दो स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर में सैनिटाइजेशन का कार्य तक नहीं कराया गया। जबकि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है।
इसके बावजूद विद्यालयों में तैनात शिक्षकों द्वारा जमकर लापरवाही बरती जा रही है। जबकि बीएसए ने इसको लेकर बीईओ की बैठक में सख्त निर्देश भी जारी किए थे। इसके बाद भी विद्यालयों की साफ-सफाई कराने में जमकर लापरवाही बरती गई है।
जिले में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या करीब 1700 है और इनमें पंजीकृत छात्रों की संख्या करीब ढाई लाख बताई जा रही है। शासन ने एक सितंबर से जिले के सभी परिषदीय विद्यालय खोलने के आदेश दिए हैं। शासन से मिले निर्देशों के बाद बीएसए ने सभी बीईओ को निर्देशित करते हुए कहा था कि विद्यालय खुलने से पहले साफ-सफाई सैनिटाइजेशन आदि का कार्य करा लिया जाए।
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इसमें किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए। क्योंकि यह बच्चों के जीवन से जुड़ा मामला है। कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। लेकिन बीईओ और शिक्षकों ने बीएसए के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। जिसका नतीजा है कि ज्यादातर विद्यालयों में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है।
कई विद्यालयों में पानी भरा हुआ तो कई विद्यालयों को जाने वाले मार्गों पर कीचड़ भरा है। यहां तक इन विद्यालयों को खोलने से पहले सैनिटाइजेशन तक नहीं कराया गया है। इससे साफ है कि बीईओ और शिक्षकों के लिए बीएसए का आदेश कोई मायने नहीं रखता है।
पूरे दिन चमकाए जाते रहे निजी विद्यालय
परिषदीय विद्यालयों में जहां अव्यवस्थाएं हावी दिखी वहीं निजी विद्यालयों को पूरे दिन चमकाने का कार्य चलता रहा। कक्षाओं की साफ-सफाई, परिसर की साफ-सफाई और रंगाई पुताई के साथ ही सैनिटाइजेशन का कार्य कराया गया। शिक्षकों को निर्देश दिए गए कि बिना मास्क के किसी को भी विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इस दौरान अभिभावकों से अपील की जाती है कि वह बच्चों को मास्क लगाकर ही घर से विद्यालय भेजें। जहां पर भी अव्यवस्थाएं है उन विद्यालयों के शिक्षकों के साथ ही संबंधित बीईओ से भी जवाब तलब किया जाएगा।
-अजय कुमार सिंह, बीएसए
कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए सभी से अपील की जाती है कि कोविड नियमों का पूरी तरह से पालन करें। कक्षों का संचालन भी कोविड प्रोटोकॉल के तहत किया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा और बच्चों को कक्षाओं में बिठाने में उचित दूरी अपनाई जाए।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ
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इसके बावजूद विद्यालयों में तैनात शिक्षकों द्वारा जमकर लापरवाही बरती जा रही है। जबकि बीएसए ने इसको लेकर बीईओ की बैठक में सख्त निर्देश भी जारी किए थे। इसके बाद भी विद्यालयों की साफ-सफाई कराने में जमकर लापरवाही बरती गई है।
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जिले में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या करीब 1700 है और इनमें पंजीकृत छात्रों की संख्या करीब ढाई लाख बताई जा रही है। शासन ने एक सितंबर से जिले के सभी परिषदीय विद्यालय खोलने के आदेश दिए हैं। शासन से मिले निर्देशों के बाद बीएसए ने सभी बीईओ को निर्देशित करते हुए कहा था कि विद्यालय खुलने से पहले साफ-सफाई सैनिटाइजेशन आदि का कार्य करा लिया जाए।
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इसमें किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए। क्योंकि यह बच्चों के जीवन से जुड़ा मामला है। कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। लेकिन बीईओ और शिक्षकों ने बीएसए के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। जिसका नतीजा है कि ज्यादातर विद्यालयों में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है।
कई विद्यालयों में पानी भरा हुआ तो कई विद्यालयों को जाने वाले मार्गों पर कीचड़ भरा है। यहां तक इन विद्यालयों को खोलने से पहले सैनिटाइजेशन तक नहीं कराया गया है। इससे साफ है कि बीईओ और शिक्षकों के लिए बीएसए का आदेश कोई मायने नहीं रखता है।
पूरे दिन चमकाए जाते रहे निजी विद्यालय
परिषदीय विद्यालयों में जहां अव्यवस्थाएं हावी दिखी वहीं निजी विद्यालयों को पूरे दिन चमकाने का कार्य चलता रहा। कक्षाओं की साफ-सफाई, परिसर की साफ-सफाई और रंगाई पुताई के साथ ही सैनिटाइजेशन का कार्य कराया गया। शिक्षकों को निर्देश दिए गए कि बिना मास्क के किसी को भी विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इस दौरान अभिभावकों से अपील की जाती है कि वह बच्चों को मास्क लगाकर ही घर से विद्यालय भेजें। जहां पर भी अव्यवस्थाएं है उन विद्यालयों के शिक्षकों के साथ ही संबंधित बीईओ से भी जवाब तलब किया जाएगा।
-अजय कुमार सिंह, बीएसए
कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए सभी से अपील की जाती है कि कोविड नियमों का पूरी तरह से पालन करें। कक्षों का संचालन भी कोविड प्रोटोकॉल के तहत किया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा और बच्चों को कक्षाओं में बिठाने में उचित दूरी अपनाई जाए।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ