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कटान हुई तेज, नदी की धारा में समाई 80 बीघे भूमि

Sat, 19 Jun 2021 12:19 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 12:19 AM IST
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saryu river
बाराबंकी। सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के गोबरहा गांव के पास खेतों में कटान कर रहा सरयू नदी की बाढ? - फोटो : BARABANKI
कोटवाधाम (बाराबंकी)। सरयू नदी का जलस्तर भले ही स्थिर हो गया हो लेकिन कटान तेज हो गई है। नदी की धारा की चपेट में आकर करीब 80 बीघे खेती योग्य भूमि सरयू में समा गई है। इससे तराई के लोगों में भले ही हड़कंप मच गया हो लेकिन बाढ़ खंड के अधिकारी इसको लेकर पूरी तरह से उदासीन है।
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तराई के लोगों का आरोप है कि बाढ़ खंड के अधिकारियों ने कराए गए कार्यों में जमकर लापरवाही बरती है जिसका खामियाजा इस बार भी तराई की लोगों को भुगतना पड़ेगा। परियोजनाओं पर भले ही करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए हैं लेकिन तराई की जनता को बाढ़ से बचा पाना संभव नहीं दिख रहा है।
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सिरौलीगौसपुर के गोबरहा, टेपरा गांव के पास शुक्रवार सुबह से कटान शुरू हो गई, देखते ही देखते खेती योग्य लगभग 80 बीघा जमीन नदी की धारा में समा गई। गांव के पवन कुमार, अशोक, गोमती प्रसाद, सुंदरलाल, ज्वाला प्रसाद, राकेश कुमार, लवकुश, दयाशंकर, भवानी, अजय कुमार, विजय कुमार, ओम प्रकाश आदि की गन्ना व मेंथा की फसल लगी हुई थी जो नदी की धारा में समा जाने से किसानों की रातों की नींद गायब हो गई है।
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इनका आरोप है कि बाढ़ खंड ने हाल ही में कटान से तराई के लोगों और खेतों को बचाने के लिए करोड़ों रुपए की परियोजनाएं शुरू की थीं। जिन्हें कागजों पर पूरा भी दिखा दिया गया है लेकिन तराई की जनता को बाढ़ से बचा पाना आसान नहीं दिखाई दे रहा है।
जलस्तर बढ़ते ही फेल हो गए दावे
सरयू नदी का जलस्तर जैसे ही बढ़ा वैसे ही प्रशासन के दावे फेल होते दिखाई दिए। जहां पर बाढ़ से निपटने के लिए अधिकारी बाढ़ चौकी व नाव लगाने का दावा कर रहे हैं वहां पर ऐसा अभी कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। गांवों से सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए लोग निजी नावों के सहारे हैं।
तैयारियों का आलम ये है कि अभी तक न तो बाढ़ चौकी बनाई गई है और न ही सरकारी नावें दिखाई पड़ रही हैं। जबकि नदी किनारे बसे गांव के लोग अभी भी डरे सहमे हुए हैं। क्योंकि इन्हें आशंका है कि जिस तरह नदी फसल को अपने आगोश में ले रही है उसी तरह यदि पानी बढ़ा तो कहीं उनके मकान भी नदी की धारा में समा जाएं।
खतरे के निशान से 42 सेमी नीचे पहुंचा पानी
नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ रात में टूटने के बाद सुबह से स्थिर हो गया है। एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रुम की मानें तो नदी का पानी खतरे के निशान से 42 सेमी नीचे पहुंचकर रुक गया है। लेकिन खतरा अभी बरकरार है। क्योंकि जैसे ही नेपाल पानी छोड़ेगा वैसे ही नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगेगा।

सरयू नदी में बढ़े जलस्तर व कटान की जानकारी मिलते ही अवर अभियंता घनश्याम बाजपेयी, धनजय तिवारी और राहुल को तत्काल मौके पर भेजा गया। जहां पर इनके द्वारा कटान रोकने तथा बचाव कराए शुरू करा दिए गए हैं। नदी के जलस्तर पर बराबर नजर रखी जा रही है।
-शशिकांत सिंह, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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