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Barabanki News: तराई में तबाही, टापू बनें 50 गांव, 25000 लोग बेघर
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बाराबंकी /कोटवाधाम /सूरतगंज (बाराबंकी)। बैराजों से छोड़े जा रहे पानी ने तराई में तबाही मचानी शुरू कर दी है। उफनाई सरयू से दर्जनाें गांव टापू बन गए हैं और यहां की हजारों की आबादी बेघर हो गई है। स्कूल और अस्पताल में पानी भर जाने से दिक्कतें बहुत बढ़ गई हैं। लोग निजी नावों के सहारे परिजनों के साथ सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन कर रहे हैं। वहीं तटबंध पर पहुंच लोगों ने अपना आशियाना बनाना शुरू कर दिया है।
तीनों तहसीलाें के करीब 50 से ज्यादा गांव टापू बन गए हैं इन गांवों की करीब 25 हजार की आबादी घर से बेघर हो गई है। पीड़ित परिजनों के साथ व निजी नावाें व पानी में होकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं। सड़कों पर पानी तेजी से बह रहा है जिससे गांवों का संपर्क टूट गया है। लोग गांवों से बाहर निकलने के लिए ट्रैक्टर ट्राली का सहारा ले रहे हैं। नदी का पानी खतरे के निशान से अभी भी 57 सेमी ऊपर बह रहा है। इसके बावजूद बुधवार को एक बार फिर चार लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ दिए जाने से तैराई के हालात और बिगड़ेंगे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। तराई के टेपरा, सनावा कहारनपुरवा, भयकपुरवा, विहड़, सिरौलीगुंग, कोठीडीहा, मनीरामपुरवा, परसा, बबुरी, टटेरवा, सरदहा,बघौलीपुरवा,भैरवकोल, सरायसुर्जन, गोबरहा, तेलवारी इटाहुआपुर्व, करौनी, पसिनटेपरा, रायपुर, माझा, रेता, बेहटा, परसवाल, जमका, खुज्जी, फाजिलपुर, परशुरामपुरवा सुंदरनगर, कोडरी,लालपुरवा, बेलहरी, बलाईपुर,बबुरिहा सरसंडा, कचनापुर, हेतमापुर समेत करीब 50 गांव पूरी तरह से बाढ की चपेट में आ गए हैं।
यहां के लोग नदी का रुप देख अपने पक्के मकान तोड़ ईंट आदि सामग्री निकाल सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं। पीड़िताें का आराेप है कि नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है लेकिन प्रशासन हम लोगों की समस्याओं से अनजान बना हुआ है।
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बाढ़ की चपेट में स्कूल और अस्पताल
नदी का जलस्तर बढ़ने से तेलवारी में बने प्राथमिक विद्यालय में तीन फुट पानी भर गया है। गोबरहा गांव में बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। स्कूल के बच्चों की पढ़ाई और अस्पताल तटबंध पर चलाया जा रहा है। नदी का पानी बढ़ने के बाद प्रशासन के सारे दावों की हवा निकल गयी है। नदी के तेवर देख आनन फानन में सनावा बाढ़ चौकी को चालू किया गया है। वहीं पीडितों को पका पकाया भोजन देने की योजना कहीं साकार होती दिखाई नहीं दे रही है।
नदी की धारा में समाए पांच मकान
नदी के किनारे पर बसे इटाहुआपुर्व गांव में भीषण कटान शुरू हो गयी है। कटान में पांच पक्के मकान समा गए है। यहां के निवासी मंगल, दुखीराम, पवन, रामपाल, सोहनलाल के पक्के मकान नदी में समा गए हैं। यहा के निवासी श्यामलाल, नौमिलाल, राजकुमार, काशीराम, विनोद, मनोज, अजित ने बताया कि नदी के किनारे पर बने मकान तोड़कर उसकी ईंट निकाल रिश्तेदाराें के यहां जा रहे हैं। बताया की जिस प्रकार नदी कटान कर रही है उससे कभी भी घर नदी में समा सकतेे हैं।
नदी का पानी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रहा है इसे देखते हुए तीनों तहसीलों के एसडीएम को अलर्ट कर दिया गया है। राजस्व कर्मियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं और पीड़ितों को यथा संभव मदद के आदेश दिए गए हैं।
अरुण कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी
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तीनों तहसीलाें के करीब 50 से ज्यादा गांव टापू बन गए हैं इन गांवों की करीब 25 हजार की आबादी घर से बेघर हो गई है। पीड़ित परिजनों के साथ व निजी नावाें व पानी में होकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं। सड़कों पर पानी तेजी से बह रहा है जिससे गांवों का संपर्क टूट गया है। लोग गांवों से बाहर निकलने के लिए ट्रैक्टर ट्राली का सहारा ले रहे हैं। नदी का पानी खतरे के निशान से अभी भी 57 सेमी ऊपर बह रहा है। इसके बावजूद बुधवार को एक बार फिर चार लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ दिए जाने से तैराई के हालात और बिगड़ेंगे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। तराई के टेपरा, सनावा कहारनपुरवा, भयकपुरवा, विहड़, सिरौलीगुंग, कोठीडीहा, मनीरामपुरवा, परसा, बबुरी, टटेरवा, सरदहा,बघौलीपुरवा,भैरवकोल, सरायसुर्जन, गोबरहा, तेलवारी इटाहुआपुर्व, करौनी, पसिनटेपरा, रायपुर, माझा, रेता, बेहटा, परसवाल, जमका, खुज्जी, फाजिलपुर, परशुरामपुरवा सुंदरनगर, कोडरी,लालपुरवा, बेलहरी, बलाईपुर,बबुरिहा सरसंडा, कचनापुर, हेतमापुर समेत करीब 50 गांव पूरी तरह से बाढ की चपेट में आ गए हैं।
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यहां के लोग नदी का रुप देख अपने पक्के मकान तोड़ ईंट आदि सामग्री निकाल सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे हैं। पीड़िताें का आराेप है कि नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है लेकिन प्रशासन हम लोगों की समस्याओं से अनजान बना हुआ है।
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बाढ़ की चपेट में स्कूल और अस्पताल
नदी का जलस्तर बढ़ने से तेलवारी में बने प्राथमिक विद्यालय में तीन फुट पानी भर गया है। गोबरहा गांव में बना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बाढ़ की चपेट में आ गया है। स्कूल के बच्चों की पढ़ाई और अस्पताल तटबंध पर चलाया जा रहा है। नदी का पानी बढ़ने के बाद प्रशासन के सारे दावों की हवा निकल गयी है। नदी के तेवर देख आनन फानन में सनावा बाढ़ चौकी को चालू किया गया है। वहीं पीडितों को पका पकाया भोजन देने की योजना कहीं साकार होती दिखाई नहीं दे रही है।
नदी की धारा में समाए पांच मकान
नदी के किनारे पर बसे इटाहुआपुर्व गांव में भीषण कटान शुरू हो गयी है। कटान में पांच पक्के मकान समा गए है। यहां के निवासी मंगल, दुखीराम, पवन, रामपाल, सोहनलाल के पक्के मकान नदी में समा गए हैं। यहा के निवासी श्यामलाल, नौमिलाल, राजकुमार, काशीराम, विनोद, मनोज, अजित ने बताया कि नदी के किनारे पर बने मकान तोड़कर उसकी ईंट निकाल रिश्तेदाराें के यहां जा रहे हैं। बताया की जिस प्रकार नदी कटान कर रही है उससे कभी भी घर नदी में समा सकतेे हैं।
नदी का पानी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रहा है इसे देखते हुए तीनों तहसीलों के एसडीएम को अलर्ट कर दिया गया है। राजस्व कर्मियों को पूरी तरह से मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं और पीड़ितों को यथा संभव मदद के आदेश दिए गए हैं।
अरुण कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी