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Barabanki News: अल्ट्रासाउंड मशीन के अभाव से गर्भवती महिलाओं को परेशानी
Mon, 23 Feb 2026 09:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 23 Feb 2026 09:57 PM IST
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- सीएचसी सूरतगंज नहीं है अल्ट्रासाउंड मशीन
संवाद न्यूज एजेंसी
सूरतगंज। स्थानीय ब्लॉक मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अल्ट्रासाउंड मशीन की अनुपलब्धता के कारण गर्भवती महिलाओं को निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर महंगी जांच करानी पड़ रही है। इस समस्या से न केवल महिलाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सूरतगंज सीएचसी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं जांच और उपचार के लिए आती हैं। यहां रोजाना लगभग 80 से 90 गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है, जबकि ओपीडी में कुल मरीजों की संख्या करीब 150 तक पहुंच जाती है। गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच के लिए डॉक्टरों द्वारा अक्सर अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है। ऐसे में, अस्पताल में मशीन उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 700 से 800 रुपये तक का शुल्क लिया जाता है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली कई महिलाओं के लिए काफी अधिक है। आर्थिक तंगी से जूझ रहीं कुछ महिलाएं तो इस महत्वपूर्ण जांच को करा ही नहीं पाती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
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स्थानीय ग्रामीणों की मांग और सीएचसी प्रभारी का आश्वासन
स्थानीय ग्रामीणों ने सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित करने की पुरजोर मांग की है। उनका कहना है कि मशीन उपलब्ध होने से उन्हें काफी सहूलियत मिलेगी और इलाज का खर्च भी कम होगा। इस संबंध में, सीएचसी प्रभारी डॉ. राजर्षि त्रिपाठी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीन और विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि शीघ्र ही यह आवश्यक सुविधा सीएचसी में उपलब्ध हो जाएगी, जिससे गर्भवती महिलाओं को राहत मिल सकेगी।
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सूरतगंज। स्थानीय ब्लॉक मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में अल्ट्रासाउंड मशीन की अनुपलब्धता के कारण गर्भवती महिलाओं को निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर महंगी जांच करानी पड़ रही है। इस समस्या से न केवल महिलाओं पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सूरतगंज सीएचसी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं जांच और उपचार के लिए आती हैं। यहां रोजाना लगभग 80 से 90 गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है, जबकि ओपीडी में कुल मरीजों की संख्या करीब 150 तक पहुंच जाती है। गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच के लिए डॉक्टरों द्वारा अक्सर अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी जाती है। ऐसे में, अस्पताल में मशीन उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों का रुख करना पड़ता है।
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निजी पैथोलॉजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 700 से 800 रुपये तक का शुल्क लिया जाता है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली कई महिलाओं के लिए काफी अधिक है। आर्थिक तंगी से जूझ रहीं कुछ महिलाएं तो इस महत्वपूर्ण जांच को करा ही नहीं पाती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
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स्थानीय ग्रामीणों की मांग और सीएचसी प्रभारी का आश्वासन
स्थानीय ग्रामीणों ने सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित करने की पुरजोर मांग की है। उनका कहना है कि मशीन उपलब्ध होने से उन्हें काफी सहूलियत मिलेगी और इलाज का खर्च भी कम होगा। इस संबंध में, सीएचसी प्रभारी डॉ. राजर्षि त्रिपाठी ने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीन और विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि शीघ्र ही यह आवश्यक सुविधा सीएचसी में उपलब्ध हो जाएगी, जिससे गर्भवती महिलाओं को राहत मिल सकेगी।