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Barabanki News: मंडी से निकलते ही दोगुने हो जाते आलू के दाम
Fri, 04 Aug 2023 01:26 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 04 Aug 2023 01:26 AM IST
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बाराबंकी। मंडी से बाहर निकलते ही आलू के दाम दोगुने हो जाते हैं, मगर इसका लाभ न तो किसानों को मिल रहा है और न ही उपभोक्ताओं को। बिचौलिए इसका लाभ उठाकर मालामाल हो रहे हैं। यही कारण है कि किसान इस बार कोल्ड स्टोरों से आलू निकालने में कोई खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं, जिसका नतीजा है कि अभी 85 प्रतिशत तक आलू स्टोरों पर डंप है। फसल का वाजिब दाम न मिलने से किसान भी परेशान हैं।
जिले में मौजूदा समय में करीब 50 कोल्ड स्टोर संचालित हैं और इनकी भंडारण क्षमता चार लाख एमटी के आसपास है। लेकिन अभी तक महज 15 प्रतिशत आलू ही स्टोरों से निकल सका है। 85 प्रतिशत आलू स्टोरों में रखा हुआ है। इसके पीछे की वजह के लिए जब किसानों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मंडी से बाहर आते ही आलू के दाम दोगुने हो जाते हैं। 1000 रुपये क्विंटल आलू जो किसानों से खरीदा जा रहा है, वह खुलेबाजार में व्यापारी 2000 रुपये क्विंटल खुलेआम बेच रहे हैं। एक हजार रुपये में बेचने में किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि किसान स्टोरों से आलू निकालने में कोई खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं, क्योंकि इसका लाभ किसानों को कम व्यापारियों और बिचौलियों को ज्यादा हो रहा है।
एक हजार में नहीं निकलेगी लागत
एक हजार रुपये क्विंटल में आलू बेचकर इसकी लागत निकाल पाना मुश्किल है। यही कारण है कि हम लोग बाजार भाव का इंतजार कर रहे हैं।
अवधराम, काजीपुर देवा
आलू की भी हो सरकारी खरीद
जिस तरह से धान और गेहूं की सरकारी खरीद बड़े पैमाने पर की जाती है, जब तक आलू की खरीद उसी तरह नहीं की जाएगी। किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।
सियाराम, मऊजानीपुर
जल्द सुधरेंगे बाजार के हालात
अभी तक आलू 800 रुपये क्विंटल तक बिक रहा था। लेकिन जब से यह बिहार और झारखंड जाने लगा है, तब से भाव में सुधार हुआ है और बाजार भाव एक हजार रुपये क्विंटल तक पहुंच गया है अभी भाव और बढ़ेगें।
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मो. शरीफ राइन, आढ़ती
स्टोर खाली करने का तीन माह का है समय
हम लोगों पर स्टोर समय से खाली कराने का दबाव रहता है, लेकिन इसके लिए अभी तीन माह का समय है। बाजार भाव में तेजी से सुधार हो रहा है। किसान भी आलू की निकासी के लिए आने लगे हैं।
मोइनुद्दीन, कोल्ड स्टोर मालिक
किसानाें को समय-समय पर बाजार को देखते हुए स्टोर से आलू निकालते रहना चाहिए। एकदम से ज्यादा मात्रा में आलू निकालने से इसका असर बाजार पर पड़ सकता है और किसानों को फायदा मिलने के बजाय नुकसान हो सकता है। इसलिए एक अंतराल में आलू की निकासी करते रहें, जिससे स्टोर भी समय से खाली हो सकें।
-महेश कुमार श्रीवास्तव, जिला उद्यान अधिकारी
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जिले में मौजूदा समय में करीब 50 कोल्ड स्टोर संचालित हैं और इनकी भंडारण क्षमता चार लाख एमटी के आसपास है। लेकिन अभी तक महज 15 प्रतिशत आलू ही स्टोरों से निकल सका है। 85 प्रतिशत आलू स्टोरों में रखा हुआ है। इसके पीछे की वजह के लिए जब किसानों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मंडी से बाहर आते ही आलू के दाम दोगुने हो जाते हैं। 1000 रुपये क्विंटल आलू जो किसानों से खरीदा जा रहा है, वह खुलेबाजार में व्यापारी 2000 रुपये क्विंटल खुलेआम बेच रहे हैं। एक हजार रुपये में बेचने में किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। यही कारण है कि किसान स्टोरों से आलू निकालने में कोई खास रुचि नहीं दिखा रहे हैं, क्योंकि इसका लाभ किसानों को कम व्यापारियों और बिचौलियों को ज्यादा हो रहा है।
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एक हजार में नहीं निकलेगी लागत
एक हजार रुपये क्विंटल में आलू बेचकर इसकी लागत निकाल पाना मुश्किल है। यही कारण है कि हम लोग बाजार भाव का इंतजार कर रहे हैं।
अवधराम, काजीपुर देवा
आलू की भी हो सरकारी खरीद
जिस तरह से धान और गेहूं की सरकारी खरीद बड़े पैमाने पर की जाती है, जब तक आलू की खरीद उसी तरह नहीं की जाएगी। किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।
सियाराम, मऊजानीपुर
जल्द सुधरेंगे बाजार के हालात
अभी तक आलू 800 रुपये क्विंटल तक बिक रहा था। लेकिन जब से यह बिहार और झारखंड जाने लगा है, तब से भाव में सुधार हुआ है और बाजार भाव एक हजार रुपये क्विंटल तक पहुंच गया है अभी भाव और बढ़ेगें।
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मो. शरीफ राइन, आढ़ती
स्टोर खाली करने का तीन माह का है समय
हम लोगों पर स्टोर समय से खाली कराने का दबाव रहता है, लेकिन इसके लिए अभी तीन माह का समय है। बाजार भाव में तेजी से सुधार हो रहा है। किसान भी आलू की निकासी के लिए आने लगे हैं।
मोइनुद्दीन, कोल्ड स्टोर मालिक
किसानाें को समय-समय पर बाजार को देखते हुए स्टोर से आलू निकालते रहना चाहिए। एकदम से ज्यादा मात्रा में आलू निकालने से इसका असर बाजार पर पड़ सकता है और किसानों को फायदा मिलने के बजाय नुकसान हो सकता है। इसलिए एक अंतराल में आलू की निकासी करते रहें, जिससे स्टोर भी समय से खाली हो सकें।
-महेश कुमार श्रीवास्तव, जिला उद्यान अधिकारी