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Barabanki News: राष्ट्रपति से पुरस्कार लेकर लौटी पूजा पाल, बोलीं-जहां साधन खत्म होते हैं, वहीं से सपने भरते हैं उड़ान
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अमर उजाला में छपी अपनी खबर पढ़ती बाल वैज्ञानिक पूजा पाल।
- फोटो : अमर उजाला में छपी अपनी खबर पढ़ती बाल वैज्ञानिक पूजा पाल।
बाराबंकी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार प्राप्त कर लौटने के बाद बाराबंकी की पूजा पाल लखनऊ एयरपोर्ट से सीधे अमर उजाला कार्यालय पहुंचीं। रास्ते भर और कार्यालय में पूजा ने न सिर्फ अपनी सफलता का अनुभव साझा किया, बल्कि यह भी बताया कि सीमित संसाधनों के बीच भी असाधारण सफलता कैसे हासिल की जा सकती है।
मजदूरी करने वाले परिवार में जन्मी पूजा ने झोपड़ी में रहकर, बिना बिजली, इंटरनेट और मोबाइल के, विज्ञान के क्षेत्र में वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े संसाधनों वाले संस्थानों के लिए भी चुनौती है। धूल और भूसे को अलग करने का उनका विज्ञान मॉडल आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन चुका है।
जब उनसे पूछा गया कि बिना संसाधनों के यह ताकत कहां से आई, तो पूजा ने सादगी से कहा- जब देश के लिए कुछ करने का जज्बा मन में होता है, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। मेरे हालात ने मुझे कमजोर नहीं बनाया, बल्कि उन्होंने मुझे यह सिखाया कि बिना साधन के भी सपनों को सच किया जा सकता है। मैंने कभी संसाधनों की कमी को अपनी मजबूरी नहीं बनने दिया, मैंने उसे अपनी ताकत बना लिया। पूजा ने कहा-अगर सोच साफ और इरादा मजबूत हो, तो झोपड़ी से भी देश के लिए कुछ बड़ा किया जा सकता है।
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पूजा ने बताया कि उनके गाइड शिक्षक ने हमेशा यही सिखाया कि तुम्हारे पास जो है, उसी से अपने विकास की राह बनाओ। जिस सरकारी स्कूल में वह पढ़ती थीं, वहीं उनकी मां रसोइया के रूप में कार्यरत हैं। मां के साथ स्कूल में समय बिताना, वहीं भोजन करना और फिर झोपड़ी में लौटकर पढ़ाई करना।
उन्होंने कहा कि संसाधन जितने अधिक होते हैं, निर्भरता उतनी बढ़ जाती है। पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा कि मैंने यह मॉडल यह सोचकर नहीं बनाया था कि इसे इतना बड़ा मंच मिलेगा। पूजा का सपना है कि वह इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी कर किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला ले और आगे चलकर वैज्ञानिक बने। पूजा बोली कि वह ऐसे आविष्कार करना चाहती हैं, जो गरीब और ग्रामीण तबके के लोगों के लिए उपयोगी साबित हों। (संवाद)
अमर उजाला ने बढ़ाया हौसला
अमर उजाला कार्यालय पहुंची पूजा ने खुले दिल से स्वीकार किया कि अमर उजाला ने समय-समय पर खबरें प्रकाशित कर उनका उत्साहवर्धन किया। जब कोई अखबार आपकी मेहनत को पहचान देता है, तो आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है
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एयरपोर्ट पर सम्मान, डीएम ने भेजा वाहन
दोपहर करीब 1:30 बजे पूजा पाल अपने गाइड शिक्षक राजीव श्रीवास्तव और पिता पुत्तीलाल पाल के साथ लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचीं। वहां अमर उजाला टीम और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी दिलीप तिवारी ने उनका स्वागत किया। डीएम शशांक त्रिपाठी की ओर से भेजे गए कर्मचारियों ने पूजा को सम्मान के साथ वाहन में बैठाकर बाराबंकी पहुंचाया।
पिता का संघर्ष, बेटी की उड़ान
दिहाड़ी मजदूरी करने वाले पूजा के पिता पुत्तीलाल पाल ने कहा कि मेरी जिंदगी का एक ही सपना था बिटिया को पढ़ाना। उन्होंने बताया कि गांव के लोग आज कहते हैं कि हर घर में पूजा जैसी बेटी होनी चाहिए। गरीब थे, लेकिन बेटी की पढ़ाई में कभी पीछे नहीं हटे। यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।
सबसे बड़े मार्गदर्शक....राजीव सर
पूजा ने बताया कि कई बार उन्हें कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके गाइड शिक्षक राजीव श्रीवास्तव हमेशा ढाल बनकर खड़े रहे। उन्होंने शिक्षक के साथ-साथ पिता और भाई की भूमिका भी निभाई। पूजा ने कहा। राजीव सर और उनके परिवार के सहयोग के बिना यह सफलता संभव नहीं थी।
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मजदूरी करने वाले परिवार में जन्मी पूजा ने झोपड़ी में रहकर, बिना बिजली, इंटरनेट और मोबाइल के, विज्ञान के क्षेत्र में वह कर दिखाया जो बड़े-बड़े संसाधनों वाले संस्थानों के लिए भी चुनौती है। धूल और भूसे को अलग करने का उनका विज्ञान मॉडल आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन चुका है।
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जब उनसे पूछा गया कि बिना संसाधनों के यह ताकत कहां से आई, तो पूजा ने सादगी से कहा- जब देश के लिए कुछ करने का जज्बा मन में होता है, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। मेरे हालात ने मुझे कमजोर नहीं बनाया, बल्कि उन्होंने मुझे यह सिखाया कि बिना साधन के भी सपनों को सच किया जा सकता है। मैंने कभी संसाधनों की कमी को अपनी मजबूरी नहीं बनने दिया, मैंने उसे अपनी ताकत बना लिया। पूजा ने कहा-अगर सोच साफ और इरादा मजबूत हो, तो झोपड़ी से भी देश के लिए कुछ बड़ा किया जा सकता है।
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पूजा ने बताया कि उनके गाइड शिक्षक ने हमेशा यही सिखाया कि तुम्हारे पास जो है, उसी से अपने विकास की राह बनाओ। जिस सरकारी स्कूल में वह पढ़ती थीं, वहीं उनकी मां रसोइया के रूप में कार्यरत हैं। मां के साथ स्कूल में समय बिताना, वहीं भोजन करना और फिर झोपड़ी में लौटकर पढ़ाई करना।
उन्होंने कहा कि संसाधन जितने अधिक होते हैं, निर्भरता उतनी बढ़ जाती है। पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा कि मैंने यह मॉडल यह सोचकर नहीं बनाया था कि इसे इतना बड़ा मंच मिलेगा। पूजा का सपना है कि वह इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी कर किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला ले और आगे चलकर वैज्ञानिक बने। पूजा बोली कि वह ऐसे आविष्कार करना चाहती हैं, जो गरीब और ग्रामीण तबके के लोगों के लिए उपयोगी साबित हों। (संवाद)
अमर उजाला ने बढ़ाया हौसला
अमर उजाला कार्यालय पहुंची पूजा ने खुले दिल से स्वीकार किया कि अमर उजाला ने समय-समय पर खबरें प्रकाशित कर उनका उत्साहवर्धन किया। जब कोई अखबार आपकी मेहनत को पहचान देता है, तो आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है
एयरपोर्ट पर सम्मान, डीएम ने भेजा वाहन
दोपहर करीब 1:30 बजे पूजा पाल अपने गाइड शिक्षक राजीव श्रीवास्तव और पिता पुत्तीलाल पाल के साथ लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचीं। वहां अमर उजाला टीम और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी दिलीप तिवारी ने उनका स्वागत किया। डीएम शशांक त्रिपाठी की ओर से भेजे गए कर्मचारियों ने पूजा को सम्मान के साथ वाहन में बैठाकर बाराबंकी पहुंचाया।
पिता का संघर्ष, बेटी की उड़ान
दिहाड़ी मजदूरी करने वाले पूजा के पिता पुत्तीलाल पाल ने कहा कि मेरी जिंदगी का एक ही सपना था बिटिया को पढ़ाना। उन्होंने बताया कि गांव के लोग आज कहते हैं कि हर घर में पूजा जैसी बेटी होनी चाहिए। गरीब थे, लेकिन बेटी की पढ़ाई में कभी पीछे नहीं हटे। यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।
सबसे बड़े मार्गदर्शक....राजीव सर
पूजा ने बताया कि कई बार उन्हें कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके गाइड शिक्षक राजीव श्रीवास्तव हमेशा ढाल बनकर खड़े रहे। उन्होंने शिक्षक के साथ-साथ पिता और भाई की भूमिका भी निभाई। पूजा ने कहा। राजीव सर और उनके परिवार के सहयोग के बिना यह सफलता संभव नहीं थी।