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सेहत के लिए खतरनाक हुई बाराबंकी की हवा
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बाराबंकी। सेहत के लिए बाराबंकी की हवा खतरनाक हो गई है। दो दिनों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 250 के पार पहुंच गया है। ये हालात दीपावली पर छुड़ाए गए पटाखों और खेतों में जलाई जा रही पराली के कारण बिगड़े हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने जिले के जिम्मेदारों को चेताया है कि समय रहते हालात पर काबू न किया गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार तीन दिन पहले तक बाराबंकी का एक्यूआई का स्तर 200 था। मगर, इधर दो दिनों में यह बढ़कर 250 पार कर गया है। ऐसे में यह मानक बच्चों, बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक के लिए बेहद नुकसानदायक माना जाता है। जिले के कृषि विभाग, नगर पालिका परिषद, एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग व यातायात प्रशासन इन हालात से निपटने के लिए अंजान बने हुए हैं।
प्रदूषण बोर्ड लखनऊ के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. यूसी शुक्ला ने बताया कि गर्मी के दिनों में जमा हुई धूल और अब ठंड में तापमान गिरने से नीचे से एक्यूआई का स्तर और बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि खेतों में पराली जलाने, सड़क व हाईवे के गड्ढों में मिट्टी जमने, सिग्नल प्वाइंट पर स्टार्ट वाहन व कूड़ा जलाने पर रोक लगानी होगी तभी हवा को जहरीली होने से रोका जा सकता है।
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क्या है एक्यूआई
एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई हवा की गुणवत्ता जांचने के लिए एक मानक तय किया गया है। इसे शून्य से 500 तक मापा जाता है। शून्य से 50 तक एक्यूआई सेहत के लिए सबसे बेहतर होता है। वहीं एक्यूआई 200 के पार होने पर हवा सभी के लिए खतरनाक हो जाती है।
दो दिनों में बाराबंकी का एक्यूआई का स्तर औसतन 250 पार कर गया है। जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसको लेकर जिम्मेदार नहीं चेते तो ठंड में हालात भयावह होंगे। जिले के संबंधित विभागों के अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है कि समय रहते बचाव के लिए सक्रिय हो जाएं।
-डॉ. यूसी शुक्ला, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण बोर्ड लखनऊ
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार तीन दिन पहले तक बाराबंकी का एक्यूआई का स्तर 200 था। मगर, इधर दो दिनों में यह बढ़कर 250 पार कर गया है। ऐसे में यह मानक बच्चों, बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक के लिए बेहद नुकसानदायक माना जाता है। जिले के कृषि विभाग, नगर पालिका परिषद, एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग व यातायात प्रशासन इन हालात से निपटने के लिए अंजान बने हुए हैं।
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प्रदूषण बोर्ड लखनऊ के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. यूसी शुक्ला ने बताया कि गर्मी के दिनों में जमा हुई धूल और अब ठंड में तापमान गिरने से नीचे से एक्यूआई का स्तर और बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि खेतों में पराली जलाने, सड़क व हाईवे के गड्ढों में मिट्टी जमने, सिग्नल प्वाइंट पर स्टार्ट वाहन व कूड़ा जलाने पर रोक लगानी होगी तभी हवा को जहरीली होने से रोका जा सकता है।
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क्या है एक्यूआई
एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई हवा की गुणवत्ता जांचने के लिए एक मानक तय किया गया है। इसे शून्य से 500 तक मापा जाता है। शून्य से 50 तक एक्यूआई सेहत के लिए सबसे बेहतर होता है। वहीं एक्यूआई 200 के पार होने पर हवा सभी के लिए खतरनाक हो जाती है।
दो दिनों में बाराबंकी का एक्यूआई का स्तर औसतन 250 पार कर गया है। जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसको लेकर जिम्मेदार नहीं चेते तो ठंड में हालात भयावह होंगे। जिले के संबंधित विभागों के अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है कि समय रहते बचाव के लिए सक्रिय हो जाएं।
-डॉ. यूसी शुक्ला, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण बोर्ड लखनऊ