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बिना प्रदूषण जांच के दौड़ रहे 1661 एंबुलेंस व 337 सरकारी वाहन
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बाराबंकी। आम आदमी के वाहन का प्रदूषण प्रमाण-पत्र न मिलने पर 10 हजार रुपया का भारी भरकम जुर्माना होता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जिले में पंजीकृत 1998 सरकारी वाहन बिना प्रदूषण जांच के दौड़ रहे हैं। इनमें 1661 एंबुलेंस हैं। इनमें कई सरकारी वाहन ऐसे भी हैं जिनकी सालों से जांच ही नहीं हुई। इन वाहनों से जिले में विभिन्न विभागों के आला अधिकारी सफर करते हैं। मामले का खुलासा होने के बाद अब एआरटीओ का कहना है कि सभी को नोटिस जारी किया जा रहा है।
वाहन के संचालन के लिए प्रदूषण की जांच अनिवार्य है। इसके लिए वाहन को प्रदूषण जांच केंद्र पर ले जाना होता है। वाहन के साइलेंसर में मशीन से जांच के बाद तय किया जाता है कि वाहन प्रदूषण फैला रहा है कि नहीं। यदि धुएं में कार्बन की मात्रा अधिक पाई जाती है तो वाहन को फिट कराया जाता है।
तब जाकर प्रदूषण प्रमाण पत्र वाहन स्वामी को मिलता है। इसके लिए जिले में 18 प्रदूषण जांच केंद्र संचालित हैं। बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन संचालित होने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माने का नियम है। मगर जिले में पंजीकृत 1998 सरकारी वाहन बिना प्रदूषण जांच के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें 1661 एंबुलेंस व 337 विभिन्न सरकारी विभागों के वाहन हैं।
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एंबुलेंस की संख्या इसलिए इतनी ज्यादा है क्योंकि प्रदेश के कई जिलों की एंबुलेंस का पंजीकरण बाराबंकी के एआरटीओ कार्यालय से ही हुआ है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केवल विभागों के 337 वाहन का मतलब है करीब करीब सभी सरकारी वाहन। चौंकाने वाली बात यह है कि जनता को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने वाली सरकारी व्यवस्था स्वयं नियमों का पालन नहीं कर रही है।
परिवहन आयुक्त द्वारा इसका ब्योरा तलब करने के बाद से हड़कंप मचा है। आयुक्त ने इस बात पर हैरानी जताई है कि इतनी भारी संख्या में सरकारी वाहन बिना प्रदूषण जांच के ही संचालित हैं। अब इसे लेकर सभी को नोटिस जारी करने की बात एआरटीओ द्वारा कही जा रही है। (संवाद)
सरकारी वाहनों का प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने की दशा में 10 हजार रुपये का जुर्माना निर्धारित है। छानबीन में पाया गया है कि सरकारी वाहनों का बड़े पैमाने पर प्रदूषण जांच नहीं हुई है। इसे लेकर नोटिस जारी किया जा रहा है। परिवहन आयुक्त को पूरी रिपोर्ट भेज दी है।
-पंकज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन
प्रदेश के कई जिलों की एंबुलेंस का पंजीकरण बाराबंकी में ही हुआ है। एंबुलेंस के प्रदूषण जांच का मामला बहुत गंभीर है। इसे लेकर डिप्टी सीएमओ अवधेश मौर्या को नोडल अधिकारी बना दिया गया है। नोडल अधिकारी एआरटीओ से तालमेल बनाकर एंबुलेंस की प्रदूषण जांच कराकर प्रमाण पत्र दिलवाएंगे।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ
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वाहन के संचालन के लिए प्रदूषण की जांच अनिवार्य है। इसके लिए वाहन को प्रदूषण जांच केंद्र पर ले जाना होता है। वाहन के साइलेंसर में मशीन से जांच के बाद तय किया जाता है कि वाहन प्रदूषण फैला रहा है कि नहीं। यदि धुएं में कार्बन की मात्रा अधिक पाई जाती है तो वाहन को फिट कराया जाता है।
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तब जाकर प्रदूषण प्रमाण पत्र वाहन स्वामी को मिलता है। इसके लिए जिले में 18 प्रदूषण जांच केंद्र संचालित हैं। बिना प्रदूषण प्रमाण पत्र के वाहन संचालित होने पर 10 हजार रुपये तक का जुर्माने का नियम है। मगर जिले में पंजीकृत 1998 सरकारी वाहन बिना प्रदूषण जांच के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें 1661 एंबुलेंस व 337 विभिन्न सरकारी विभागों के वाहन हैं।
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एंबुलेंस की संख्या इसलिए इतनी ज्यादा है क्योंकि प्रदेश के कई जिलों की एंबुलेंस का पंजीकरण बाराबंकी के एआरटीओ कार्यालय से ही हुआ है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, केवल विभागों के 337 वाहन का मतलब है करीब करीब सभी सरकारी वाहन। चौंकाने वाली बात यह है कि जनता को यातायात नियमों का पाठ पढ़ाने वाली सरकारी व्यवस्था स्वयं नियमों का पालन नहीं कर रही है।
परिवहन आयुक्त द्वारा इसका ब्योरा तलब करने के बाद से हड़कंप मचा है। आयुक्त ने इस बात पर हैरानी जताई है कि इतनी भारी संख्या में सरकारी वाहन बिना प्रदूषण जांच के ही संचालित हैं। अब इसे लेकर सभी को नोटिस जारी करने की बात एआरटीओ द्वारा कही जा रही है। (संवाद)
सरकारी वाहनों का प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने की दशा में 10 हजार रुपये का जुर्माना निर्धारित है। छानबीन में पाया गया है कि सरकारी वाहनों का बड़े पैमाने पर प्रदूषण जांच नहीं हुई है। इसे लेकर नोटिस जारी किया जा रहा है। परिवहन आयुक्त को पूरी रिपोर्ट भेज दी है।
-पंकज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रशासन
प्रदेश के कई जिलों की एंबुलेंस का पंजीकरण बाराबंकी में ही हुआ है। एंबुलेंस के प्रदूषण जांच का मामला बहुत गंभीर है। इसे लेकर डिप्टी सीएमओ अवधेश मौर्या को नोडल अधिकारी बना दिया गया है। नोडल अधिकारी एआरटीओ से तालमेल बनाकर एंबुलेंस की प्रदूषण जांच कराकर प्रमाण पत्र दिलवाएंगे।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ