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प्रतिमा को प्रतीक मान सियासी गणित साधेंगे अखिलेश
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बाराबंकी। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शनिवार को जिले के कद्दावर नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। एक स्मारिका के विमोचन के बाद सभा को संबोधित करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनावी वर्ष और पंचायत चुनाव के शंखनाद के वक्त प्रतिमा के प्रतीक के सहारे कई सियासी गणित को साधेंगे।
पूर्व मंत्री राकेश वर्मा कार्यक्रम को पूरी तरह सफल बनाने के लिए जुटे हुए हैं तो पार्टी के दिग्गज नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक अपने नेता की अगवानी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे। लखनऊ सीमा से लेकर कार्यक्रम स्थल तक का रास्ता होर्डिंग्स और बैनर से पाट दिया गया है।
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी साथी और राजनीति के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम हासिल करने वाले बेनी प्रसाद वर्मा अपनी बेबाक, बेलौस और कड़क राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं। जिले में सड़कों का जाल हो या फिर घर-घर संचार सुविधा उपलब्ध कराने का जब जिक्र होता है तो यह उपलब्धि बेनी बाबू के खाते मेें गिनी जाती है।
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सत्तर के दशक से गन्ना किसानों के मुद्दों पर राजनीति में कदम रखने वाले बेनी बाबू को विकास पुरुष के रूप में भी स्थान मिला। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दरियाबाद और मसौली से लगातार विधायक तो चुने ही गए बल्कि गोंडा और कैसरगंज से सांसद भी बने। अपने अक्खड़ स्वभाव के कारण सपा से अलग होकर पार्टी भी बनाई। कांग्रेस में भी गए, मंत्री रहे। पर उनका मन सपा में ही रहा। यही कारण था कि वह फिर लौट आए।
एक वर्ष पहले 27 मार्च को उनका देहांत हो गया। पहली पुण्यतिथि पर मोहन लाल वर्मा एजूकेशनल इंस्टीट्यूट में प्रतिमा अनावरण एवं श्रद्घांजलि सभा होनी है। इसके मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव होंगे। कई दिनों से बेनी बाबू के पुत्र व पूर्व मंत्री राकेश वर्मा अपनी पूूरी टीम के साथ तैयारियों में जुटे हैं तो पार्टी के नेता व कार्यकर्ता भी ऐतिहासिक स्वागत करने की तैयारी में हैं।
चुनावी वर्ष और पंचायत चुनाव के शंखनाद के बीच अखिलेश यादव श्रद्घांजलि सभा में प्रतिमा को प्रतीक मानकर कई सियासी गणित साध सकते हैं। कुर्मी मतदाताओं को साधने के साथ ही पहली बार पांच सीट जीतकर सपा के गढ़ को फतह करने वाली भाजपा को मात देने के लिए बेनी बाबू के पुराने रिश्तों का जिक्र कर पार्टी में नई ऊर्जा भरेंगे। जिसका असर आसपास के जिले गोंडा, बहराइच, अयोध्या, रायबरेली पर भी पड़ सकता है।
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पूर्व मंत्री राकेश वर्मा कार्यक्रम को पूरी तरह सफल बनाने के लिए जुटे हुए हैं तो पार्टी के दिग्गज नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक अपने नेता की अगवानी के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे। लखनऊ सीमा से लेकर कार्यक्रम स्थल तक का रास्ता होर्डिंग्स और बैनर से पाट दिया गया है।
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समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी साथी और राजनीति के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम हासिल करने वाले बेनी प्रसाद वर्मा अपनी बेबाक, बेलौस और कड़क राजनीति करने के लिए जाने जाते हैं। जिले में सड़कों का जाल हो या फिर घर-घर संचार सुविधा उपलब्ध कराने का जब जिक्र होता है तो यह उपलब्धि बेनी बाबू के खाते मेें गिनी जाती है।
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सत्तर के दशक से गन्ना किसानों के मुद्दों पर राजनीति में कदम रखने वाले बेनी बाबू को विकास पुरुष के रूप में भी स्थान मिला। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दरियाबाद और मसौली से लगातार विधायक तो चुने ही गए बल्कि गोंडा और कैसरगंज से सांसद भी बने। अपने अक्खड़ स्वभाव के कारण सपा से अलग होकर पार्टी भी बनाई। कांग्रेस में भी गए, मंत्री रहे। पर उनका मन सपा में ही रहा। यही कारण था कि वह फिर लौट आए।
एक वर्ष पहले 27 मार्च को उनका देहांत हो गया। पहली पुण्यतिथि पर मोहन लाल वर्मा एजूकेशनल इंस्टीट्यूट में प्रतिमा अनावरण एवं श्रद्घांजलि सभा होनी है। इसके मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव होंगे। कई दिनों से बेनी बाबू के पुत्र व पूर्व मंत्री राकेश वर्मा अपनी पूूरी टीम के साथ तैयारियों में जुटे हैं तो पार्टी के नेता व कार्यकर्ता भी ऐतिहासिक स्वागत करने की तैयारी में हैं।
चुनावी वर्ष और पंचायत चुनाव के शंखनाद के बीच अखिलेश यादव श्रद्घांजलि सभा में प्रतिमा को प्रतीक मानकर कई सियासी गणित साध सकते हैं। कुर्मी मतदाताओं को साधने के साथ ही पहली बार पांच सीट जीतकर सपा के गढ़ को फतह करने वाली भाजपा को मात देने के लिए बेनी बाबू के पुराने रिश्तों का जिक्र कर पार्टी में नई ऊर्जा भरेंगे। जिसका असर आसपास के जिले गोंडा, बहराइच, अयोध्या, रायबरेली पर भी पड़ सकता है।