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Barabanki News: अव्यवस्थाओं से जूझे मरीज, कड़ी मशक्कत के बाद मिला इलाज
Tue, 16 Dec 2025 12:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 16 Dec 2025 12:09 AM IST
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जिला अस्पताल में लगी मरीज की भीड़।
बाराबंकी। जिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं से इलाज को आने वाले मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घंटों इंतजार के बाद न तो इलाज मिल पा रहा है और न ही जांचें हो पाती हैं, जिससे मरीज बिना इलाज के ही वापस लौट जाते हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में सोमवार को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 1950 मरीज देखे गए। इनमें सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या करीब 529, सांस रोग के मरीजों की संख्या 107, पेटदर्द के 398, बदन दर्द के 489, हड्डी रोग के 424, नेत्ररोग के 258, त्वचारोग के 458 मरीज देखे गए। इलाज के लिए रामशंकर, महेंद्र, किशोरीलाल, रामप्रसाद, हैदर अली, महजबी ने बताया कि परचा बनवाने के लिए हम लोग सुबह नौ बजे ही लाइन में लग गए थे। डेढ़ घंटे तक लाइन में लगे रहने के बाद जाकर परचा बन सका। एक घंटे तक डॉक्टरों को दिखाने और करीब सवा घंटे तक दवा लेने के लिए लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ा। इन लोगों ने बताया कि जब जांच कराने पहुंचे तो वहां से समय समाप्त होने की बात कहकर वापस कर दिया गया। वहीं भीड़ इतनी ज्यादा रही कि विनीता, शांति, रामरूप, कौशल बिना इलाज के ही वापस लौट गए। सीएमएस डॉ. जेपी मौर्य का कहना है ओपीडी में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिले इसको लेकर प्रयास चल रहे हैं। नया पंजीकरण बनकर तैयार है इसके शुरू होते ही दिक्कतें कम हो जाएंगी।
तीन माह से नहीं हो रहा अल्ट्रासाउंड
जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को चिकित्सक अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन जिला अस्पताल में पिछले तीन माह से मरीजों को अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। क्योंकि यहां पर चार साल से कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। अभी तक प्रशिक्षुओं के सहारे काम चल रहा था लेकिन प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अब प्रशिक्षु भी नहीं आ रहे हैं। जिससे मरीज बाहर से जांच कराने को मजबूर हैं।
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अप्रशिक्षत बना रहे परचा
पंजीकरण कक्ष पर परचा बनाने का कार्य इन दिनों अप्रशिक्षितों के हाथों में है जिसकी वजह से मरीजों को परचा बनवाने में पसीना बहाना पड़ता है। क्योंकि ज्यादतर परचे ऑनलाइन बनाए जाते हैं और कर्मियों को कंप्यूटर पर कार्य करने का अनुभव न होने की वजह से दिक्कतें हो रही हैं।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में करीब 1950 मरीज देखे गए। इनमें सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या करीब 529, सांस रोग के मरीजों की संख्या 107, पेटदर्द के 398, बदन दर्द के 489, हड्डी रोग के 424, नेत्ररोग के 258, त्वचारोग के 458 मरीज देखे गए। इलाज के लिए रामशंकर, महेंद्र, किशोरीलाल, रामप्रसाद, हैदर अली, महजबी ने बताया कि परचा बनवाने के लिए हम लोग सुबह नौ बजे ही लाइन में लग गए थे। डेढ़ घंटे तक लाइन में लगे रहने के बाद जाकर परचा बन सका। एक घंटे तक डॉक्टरों को दिखाने और करीब सवा घंटे तक दवा लेने के लिए लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ा। इन लोगों ने बताया कि जब जांच कराने पहुंचे तो वहां से समय समाप्त होने की बात कहकर वापस कर दिया गया। वहीं भीड़ इतनी ज्यादा रही कि विनीता, शांति, रामरूप, कौशल बिना इलाज के ही वापस लौट गए। सीएमएस डॉ. जेपी मौर्य का कहना है ओपीडी में आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिले इसको लेकर प्रयास चल रहे हैं। नया पंजीकरण बनकर तैयार है इसके शुरू होते ही दिक्कतें कम हो जाएंगी।
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तीन माह से नहीं हो रहा अल्ट्रासाउंड
जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को चिकित्सक अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन जिला अस्पताल में पिछले तीन माह से मरीजों को अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। क्योंकि यहां पर चार साल से कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। अभी तक प्रशिक्षुओं के सहारे काम चल रहा था लेकिन प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अब प्रशिक्षु भी नहीं आ रहे हैं। जिससे मरीज बाहर से जांच कराने को मजबूर हैं।
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अप्रशिक्षत बना रहे परचा
पंजीकरण कक्ष पर परचा बनाने का कार्य इन दिनों अप्रशिक्षितों के हाथों में है जिसकी वजह से मरीजों को परचा बनवाने में पसीना बहाना पड़ता है। क्योंकि ज्यादतर परचे ऑनलाइन बनाए जाते हैं और कर्मियों को कंप्यूटर पर कार्य करने का अनुभव न होने की वजह से दिक्कतें हो रही हैं।