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भाजपा और सपा के बीच होगा जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव
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बाराबंकी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मतदान होना तय हो गया है। मंगलवार को निर्धारित समय सीमा बीतने केे बाद सपा प्रत्याशी द्वारा नाम वापस नहीं लिये जाने से पूरे दिन चली अटकलों पर पूरी तरह से विराम लग गया है। हालांकि भाजपा की ओर से सपा प्रत्याशी को मनाने और अपने पक्ष में लाने के हरसंभव प्रयास किए गए लेकिन भाजपाई इसमें सफल नहीं हो पाए और कई दिनों से इसको लेकर चल रही कसरत बेकार हो गई। सपा द्वारा नाम वापस नहीं लिए जाने से अब भाजपा और सपा के बीच चुनाव होना तय है।
भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पूर्व विधायक राजरानी रावत को अपना उम्मीदवार घोषित किया है तो सपा ने भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ीं नेहा सिंह आनंद पर अपना दांव लगाया है। दोनों दलों के उम्मीदवारों ने पूरे लाव लश्कर के साथ नामांकन कर चुनाव जीतने का दावा किया था। सत्ता पक्ष के लोग निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने के प्रयास में पिछले कई दिनों से लगे हुए थे।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इसके लिए सपा उम्मीदवार को कई प्रलोभन भी दिए गए लेकिन सपा उम्मीदवार को भाजपा अपने पाले में लाने में पूरी तरह से विफल रही और उसकी निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष जितवाने की मंशा पर उस समय पानी फिर गया जब मंगलवार को निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी सपा उम्मीदवार ने अपना नामांकन पत्र वापस नहीं लिया।
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भाजपाइयों को आखिरी समय तक इस बात की उम्मीद थी कि उनके द्वारा अपनाए जा रहे हथकंडे काम कर जाएंगे और सपा उम्मीदवार अपना नामांकन वापस ले लेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सत्तापक्ष द्वारा अपनाए गए सभी हथकंडे धरे के धरे रह गए। सपा उम्मीदवार द्वारा नाम वापस नहीं लिए जाने से दोनों दलों के बीच अब 3 जुलाई को चुनाव होना तय है।
मालपुआ काट रहे जिला पंचायत सदस्य
मौजूदा समय में जिले में जिला पंचायत सदस्यों की संख्या 57 है। इनमें से दो-चार को छोड़ दिया जाए तो बाकी गायब हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा ने ऐसी चाल चली है कि इनमें से ज्यादातर सदस्य भाजपा के पाले में चले गए हैं। भाजपा ने इन्हें किसी गुप्त स्थान पर रखा है जहां पर रहकर ये मालपुआ काट रहे हैं।
ये सदस्य कहां पर हैं, इस बात की किसी को कानोंकान भनक न लगे, इसके भाजपाइयों द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि सपा ने भी इन सदस्यों का पता लगाने के लिए अपने गुप्तचर लगा रखे हैं जो पल-पल की खबर सपा के शीर्ष नेताओं को दे रहे हैं। सपा भले ही जादुई आंकड़े के करीब नजर न आती हो लेकिन उसने भाजपाइयों की रातों की नींद जरूर उड़ा रखी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और सपा उम्मीदवारों ने अपना-अपना नामांकन किया था। जांच में दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्र वैध पाए गए थे। नाम वापसी के अंतिम दिन मंगलवार को किसी भी दल के उम्मीदवार ने अपना नाम वापस नहीं लिया है। ऐसे में अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 3 जुलाई को मतदान होगा।
-डॉ. राजेेश कुमार, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी
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भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पूर्व विधायक राजरानी रावत को अपना उम्मीदवार घोषित किया है तो सपा ने भाजपा से बागी होकर चुनाव लड़ीं नेहा सिंह आनंद पर अपना दांव लगाया है। दोनों दलों के उम्मीदवारों ने पूरे लाव लश्कर के साथ नामांकन कर चुनाव जीतने का दावा किया था। सत्ता पक्ष के लोग निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने के प्रयास में पिछले कई दिनों से लगे हुए थे।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इसके लिए सपा उम्मीदवार को कई प्रलोभन भी दिए गए लेकिन सपा उम्मीदवार को भाजपा अपने पाले में लाने में पूरी तरह से विफल रही और उसकी निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष जितवाने की मंशा पर उस समय पानी फिर गया जब मंगलवार को निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी सपा उम्मीदवार ने अपना नामांकन पत्र वापस नहीं लिया।
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भाजपाइयों को आखिरी समय तक इस बात की उम्मीद थी कि उनके द्वारा अपनाए जा रहे हथकंडे काम कर जाएंगे और सपा उम्मीदवार अपना नामांकन वापस ले लेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सत्तापक्ष द्वारा अपनाए गए सभी हथकंडे धरे के धरे रह गए। सपा उम्मीदवार द्वारा नाम वापस नहीं लिए जाने से दोनों दलों के बीच अब 3 जुलाई को चुनाव होना तय है।
मालपुआ काट रहे जिला पंचायत सदस्य
मौजूदा समय में जिले में जिला पंचायत सदस्यों की संख्या 57 है। इनमें से दो-चार को छोड़ दिया जाए तो बाकी गायब हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा ने ऐसी चाल चली है कि इनमें से ज्यादातर सदस्य भाजपा के पाले में चले गए हैं। भाजपा ने इन्हें किसी गुप्त स्थान पर रखा है जहां पर रहकर ये मालपुआ काट रहे हैं।
ये सदस्य कहां पर हैं, इस बात की किसी को कानोंकान भनक न लगे, इसके भाजपाइयों द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि सपा ने भी इन सदस्यों का पता लगाने के लिए अपने गुप्तचर लगा रखे हैं जो पल-पल की खबर सपा के शीर्ष नेताओं को दे रहे हैं। सपा भले ही जादुई आंकड़े के करीब नजर न आती हो लेकिन उसने भाजपाइयों की रातों की नींद जरूर उड़ा रखी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और सपा उम्मीदवारों ने अपना-अपना नामांकन किया था। जांच में दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्र वैध पाए गए थे। नाम वापसी के अंतिम दिन मंगलवार को किसी भी दल के उम्मीदवार ने अपना नाम वापस नहीं लिया है। ऐसे में अब जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए 3 जुलाई को मतदान होगा।
-डॉ. राजेेश कुमार, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी