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Barabanki News: डॉक्टरों की कमी से बढ़ रहा मरीजों का दर्द
Fri, 09 Jun 2023 01:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 09 Jun 2023 01:11 AM IST
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बाराबंकी। प्रसव और इलाज के लिए अगर कोई गर्भवती जिला महिला अस्पताल आना चाहे तो वह एक बार विचार अवश्य कर ले। चिकित्सकों की कमी से लेकर तमाम अन्य अव्यवस्थाओं के चलते अस्पताल खुद ही बीमार है। यहां की ओपीडी मात्र एक चिकित्सक के सहारे चल रही है। वहीं प्रसव के लिए तैनात तीन सर्जन में से एक का स्थानांतरण कर दिया गया है। एनेस्थीसिया के चिकित्सक के सेवानिवृत्त होने के बाद जिस डॉक्टर को यहां जिम्मेदारी दी गई है, वह अब तक नहीं आए हैं। इसके चलते ओपीडी से लेकर लेबर रूम व ऑपरेशन थियेटर तक गर्भवती महिलाएं जगह-जगह दर्द से कराहती दिख रही हैं। वहीं अस्पताल का स्टाफ मरीजों को बस रेफर कर रहा है। ऐसे में निजी अस्पतालों में भारी रकम देकर इलाज कराने के लिए लोग मजबूर हैं।
जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में बृहस्पतिवार को महिलाओं को भीड़ लगी रही। इलाज कराने आईं महिलाएं कुर्सियों की कमी के चलते जमीन पर बैठी नजर आ रही थीं। जानकारी करने पर पता लगा कि अस्पताल की ओपीडी मात्र एक चिकित्सक के सहारे ही चल रही है। इसी के चलते मरीजों को देखने में समय लग रहा है और भीड़ बढ़ती जा रही है। बताते हैं कि ओपीडी में मरीजों को दो चिकित्सक देखते थे। उनमें से एक डॉ. किशोर 31 मई को सेवानिवृत्त हो गए। उनके स्थान पर एक चिकित्सक को यहां भेजा गया, लेकिन उन्होंने कार्यभार ही ग्रहण नहीं किया है। इसकी वजह से वर्तमान में सीएमओ कार्यालय से संबद्ध एकमात्र चिकित्सक डॉ. अरुणा के सहारे ओपीडी चल रही है।
सर्जरी करने वाले तीन चिकित्सकों में से एक डॉ. रीना वर्मा का स्थानांतरण लखनऊ कर दिया गया है। ऐसे में पूरा अस्पताल मात्र एक फिजीशियन और दो सर्जन के सहारे चलाया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए सिजेरियन की व्यवस्था वाला जिला मुख्यालय पर एकमात्र सरकारी अस्पताल होने की वजह से यहां प्रतिदिन पांच सौ से अधिक महिलाएं इलाज के लिए आती हैं।
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बृहस्पतिवार को ओपीडी में अपनी बारी का इंतजार कर रही फतेहपुर तहसील क्षेत्र के कुतलूपुर गांव निवाली अंजली गुप्ता ने बताया कि वह पति के साथ सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंच गई थीं, लेकिन 12 बजे तक डॉक्टर को दिखाने की उनकी बारी नहीं आई। वहीं इस संबंध में सीएमएस डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि चिकित्सकों की कमी को अवगत कराते हुए उच्चाधिकारियों से मांग की गई है, जल्द ही समस्या का हल निकलेगा।
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जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में बृहस्पतिवार को महिलाओं को भीड़ लगी रही। इलाज कराने आईं महिलाएं कुर्सियों की कमी के चलते जमीन पर बैठी नजर आ रही थीं। जानकारी करने पर पता लगा कि अस्पताल की ओपीडी मात्र एक चिकित्सक के सहारे ही चल रही है। इसी के चलते मरीजों को देखने में समय लग रहा है और भीड़ बढ़ती जा रही है। बताते हैं कि ओपीडी में मरीजों को दो चिकित्सक देखते थे। उनमें से एक डॉ. किशोर 31 मई को सेवानिवृत्त हो गए। उनके स्थान पर एक चिकित्सक को यहां भेजा गया, लेकिन उन्होंने कार्यभार ही ग्रहण नहीं किया है। इसकी वजह से वर्तमान में सीएमओ कार्यालय से संबद्ध एकमात्र चिकित्सक डॉ. अरुणा के सहारे ओपीडी चल रही है।
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सर्जरी करने वाले तीन चिकित्सकों में से एक डॉ. रीना वर्मा का स्थानांतरण लखनऊ कर दिया गया है। ऐसे में पूरा अस्पताल मात्र एक फिजीशियन और दो सर्जन के सहारे चलाया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के लिए सिजेरियन की व्यवस्था वाला जिला मुख्यालय पर एकमात्र सरकारी अस्पताल होने की वजह से यहां प्रतिदिन पांच सौ से अधिक महिलाएं इलाज के लिए आती हैं।
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बृहस्पतिवार को ओपीडी में अपनी बारी का इंतजार कर रही फतेहपुर तहसील क्षेत्र के कुतलूपुर गांव निवाली अंजली गुप्ता ने बताया कि वह पति के साथ सुबह नौ बजे अस्पताल पहुंच गई थीं, लेकिन 12 बजे तक डॉक्टर को दिखाने की उनकी बारी नहीं आई। वहीं इस संबंध में सीएमएस डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव ने बताया कि चिकित्सकों की कमी को अवगत कराते हुए उच्चाधिकारियों से मांग की गई है, जल्द ही समस्या का हल निकलेगा।