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Barabanki News: खुली पोल, 1190 में सिर्फ 166 विद्यालय ही निपुण
Thu, 15 Feb 2024 03:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 15 Feb 2024 03:55 AM IST
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बाराबंकी। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ विद्यालय को निपुण बनाने की महत्वपूर्ण कवायद लापरवाही की भेंट चढ़ रही है। गत दिनों में डायट प्रशिक्षुओं द्वारा किए गए असेसमेंट टेस्ट के बाद जो रिजल्ट आया है उसमें 1190 स्कूलों में से केवल 166 स्कूल ही निपुण घोषित किए जा सके हैं। जबकि दिसंबर 2023 तक ही सबको निपुण होना था।
जिले में 2,626 परिषदीय विद्यालयों में करीब 3.50 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। बीते पांच जुलाई 2021 से निपुण भारत अभियान शुरू किया गया है। इसका मकसद कक्षा एक से तीन में पढ़ रहे बच्चों को आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्रदान करना है, ताकि उनमें पढ़ने, लिखने, अंकगणित और व्याख्या करने की क्षमता में सुधार किया जा सके।
जिले में अब तक 113 विद्यालयों को निपुण घोषित किया जा चुका है। निदेशालय की ओर से 31 दिसंबर 2023 तक 1,256 विद्यालय को निपुण बनाने का लक्ष्य है। 70 एआरपी को 10-10 विद्यालय दिए गए हैं। विभाग के ही अनुसार 687 विद्यालय आरपी को और 678 विद्यालय संकुल शिक्षकों के जिम्मे हैं। पिछले साल नवंबर में 1190 विद्यालयों में निपुणता आंकने के लिए डायट के प्रशिक्षु लगाए गए थे। इन प्रशिक्षुओं की टीम ने एक से तीन तक हर कक्षा से 12-12 बच्चों का निपुण एप के माध्यम से ऑनलाइन मूल्यांकन किया था। जिसका विवरण निदेशालय भेज दिया गया था और वहां से रिजल्ट का इंतजार था।
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विभाग के अधिकारियों के अनुसार केवल 166 विद्यालयों को निपुण माना गया है। हालांकि इन विद्यालयों की अभी फिर जांच होगी। जानकारों को माने तो जिले में बच्चों की कम उपस्थिति इस पर भारी पड़ रही है। यहां बच्चों की उपस्थिति प्रदेश में सबसे कम पाई गई थी। बीएसए संतोष देव पांडे ने बताया कि बाकी विद्यालय निपुणता पाने की ओर अग्रसर हैं। जहां भी कमियां है दूर की जाएंगी।
2027 तक निपुण घोषित होना है जिला
सरकार का लक्ष्य है कि निपुण भारत अभियान के माध्यम से कक्षा तीन से छह में पढ़ने वाले सभी बच्चे वर्ष 2026-27 तक पढ़ना, लिखना और अंग्रेजी सीख जाएं। ताकि उनका सही समय पर सही विकास हो सके। इसकी समीक्षा लगातार हो रही है। पहले विद्यालय फिर ब्लॉक और फिर जिला निपुण घोषित किया जाएगा।
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जिले में 2,626 परिषदीय विद्यालयों में करीब 3.50 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। बीते पांच जुलाई 2021 से निपुण भारत अभियान शुरू किया गया है। इसका मकसद कक्षा एक से तीन में पढ़ रहे बच्चों को आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्रदान करना है, ताकि उनमें पढ़ने, लिखने, अंकगणित और व्याख्या करने की क्षमता में सुधार किया जा सके।
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जिले में अब तक 113 विद्यालयों को निपुण घोषित किया जा चुका है। निदेशालय की ओर से 31 दिसंबर 2023 तक 1,256 विद्यालय को निपुण बनाने का लक्ष्य है। 70 एआरपी को 10-10 विद्यालय दिए गए हैं। विभाग के ही अनुसार 687 विद्यालय आरपी को और 678 विद्यालय संकुल शिक्षकों के जिम्मे हैं। पिछले साल नवंबर में 1190 विद्यालयों में निपुणता आंकने के लिए डायट के प्रशिक्षु लगाए गए थे। इन प्रशिक्षुओं की टीम ने एक से तीन तक हर कक्षा से 12-12 बच्चों का निपुण एप के माध्यम से ऑनलाइन मूल्यांकन किया था। जिसका विवरण निदेशालय भेज दिया गया था और वहां से रिजल्ट का इंतजार था।
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विभाग के अधिकारियों के अनुसार केवल 166 विद्यालयों को निपुण माना गया है। हालांकि इन विद्यालयों की अभी फिर जांच होगी। जानकारों को माने तो जिले में बच्चों की कम उपस्थिति इस पर भारी पड़ रही है। यहां बच्चों की उपस्थिति प्रदेश में सबसे कम पाई गई थी। बीएसए संतोष देव पांडे ने बताया कि बाकी विद्यालय निपुणता पाने की ओर अग्रसर हैं। जहां भी कमियां है दूर की जाएंगी।
2027 तक निपुण घोषित होना है जिला
सरकार का लक्ष्य है कि निपुण भारत अभियान के माध्यम से कक्षा तीन से छह में पढ़ने वाले सभी बच्चे वर्ष 2026-27 तक पढ़ना, लिखना और अंग्रेजी सीख जाएं। ताकि उनका सही समय पर सही विकास हो सके। इसकी समीक्षा लगातार हो रही है। पहले विद्यालय फिर ब्लॉक और फिर जिला निपुण घोषित किया जाएगा।