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डेंगू ने ली एक और महिला की जान
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बाराबंकी। डेंगू अब कोरोना से ज्यादा डरावना होने लगा है। बृहस्पतिवार को जिले में एक और महिला की डेंगू से मौत हो गई। साथ ही डेंगू से पीड़ित 12 नए मरीज भी पाए गए हैं जबकि तीन लोगों की हालत गंभीर होने पर उन्हें रेफर कर दिया गया है।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक बुखार के मरीजों से भरे पड़े हैं। यहां पर इलाज और जांच के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है। यही कारण है कि तीमारदार मजबूरन निजी अस्पतालों का सहारा ले रहे हैं। जिले में एक माह के अंदर आठ लोगों की जान डेंगू से जा चुकी है।
कुर्सी कस्बे की रहने वाली ज्योति मिश्रा (30) पत्नी शशिकांत मिश्रा की डेंगू से बृहस्पतिवार को लखनऊ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद उपचार किया जा रहा था।
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इसके अलावा जिला अस्पताल में भर्ती बबुरिहा के आशीष, जुरावन पुरवा के ऋतिक, अभय नगर के प्रतीक को रेफर किया गया है। वहीं डफरापुर की सोनम, सिसवारा की नंदनी, कोठी के रामपाल, कस्बा इचौली के दयाराम और नितिन को डेंगू जैसे लक्षण होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कुर्सी कस्बे के मुकीम, नईम, शाकिब, वहीद, रामलखन, शिवकुमार, देवीदीन को डेंगू की आशंका पर अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जिले में डेंगू जिस तेजी के साथ फैल रहा है उसने लोगों में कोरोना से ज्यादा डर पैदा होने लगा है। लोग हल्का सा बुखार होने पर भी अस्पतालों और पैथालॉजी में पहुंच डेंगू की जांच करा रहे हैं।
15 सौ से दो हजार रुपये की जांच
पैथालॉजी वालों की दुकान एक बार फिर चल निकली है। वह डेंगू की जांच के 1500 से लेकर 2000 रुपये तक वसूल रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में एलाइजा जांच की व्यवस्था न होने के कारण लोग निजी पैथालॉजी में पहुंचकर जांच कराने को मजबूर हैं और पैथालॉजी संचालक इसी का जमकर मनमाना पैसा वसूल रहे हैं।
कुर्सी कस्बे में महिला की मौत की जानकारी मिली है। घुंघटेर सीएचसी अधीक्षक को मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट देखने के बाद भी कुछ कहा जा सकता है कि महिला की मौत कैसे हुई है। डेंगू को लेकर विभाग पूरी तरह से सतर्क है। प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
-डॉ. अवधेश कुमार यादव, सीएमओ
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक बुखार के मरीजों से भरे पड़े हैं। यहां पर इलाज और जांच के नाम पर महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है। यही कारण है कि तीमारदार मजबूरन निजी अस्पतालों का सहारा ले रहे हैं। जिले में एक माह के अंदर आठ लोगों की जान डेंगू से जा चुकी है।
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कुर्सी कस्बे की रहने वाली ज्योति मिश्रा (30) पत्नी शशिकांत मिश्रा की डेंगू से बृहस्पतिवार को लखनऊ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद उपचार किया जा रहा था।
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इसके अलावा जिला अस्पताल में भर्ती बबुरिहा के आशीष, जुरावन पुरवा के ऋतिक, अभय नगर के प्रतीक को रेफर किया गया है। वहीं डफरापुर की सोनम, सिसवारा की नंदनी, कोठी के रामपाल, कस्बा इचौली के दयाराम और नितिन को डेंगू जैसे लक्षण होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कुर्सी कस्बे के मुकीम, नईम, शाकिब, वहीद, रामलखन, शिवकुमार, देवीदीन को डेंगू की आशंका पर अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जिले में डेंगू जिस तेजी के साथ फैल रहा है उसने लोगों में कोरोना से ज्यादा डर पैदा होने लगा है। लोग हल्का सा बुखार होने पर भी अस्पतालों और पैथालॉजी में पहुंच डेंगू की जांच करा रहे हैं।
15 सौ से दो हजार रुपये की जांच
पैथालॉजी वालों की दुकान एक बार फिर चल निकली है। वह डेंगू की जांच के 1500 से लेकर 2000 रुपये तक वसूल रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में एलाइजा जांच की व्यवस्था न होने के कारण लोग निजी पैथालॉजी में पहुंचकर जांच कराने को मजबूर हैं और पैथालॉजी संचालक इसी का जमकर मनमाना पैसा वसूल रहे हैं।
कुर्सी कस्बे में महिला की मौत की जानकारी मिली है। घुंघटेर सीएचसी अधीक्षक को मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट देखने के बाद भी कुछ कहा जा सकता है कि महिला की मौत कैसे हुई है। डेंगू को लेकर विभाग पूरी तरह से सतर्क है। प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।
-डॉ. अवधेश कुमार यादव, सीएमओ