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Barabanki News: अब सजा ही नहीं अपराधियों के साम्राज्य का हो रहा अंत

Thu, 26 Mar 2026 01:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Thu, 26 Mar 2026 01:49 AM IST
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Now not only punishment but the empire of criminals is coming to an end.
बाराबंकी। कभी जेल जाना अपराधियों के लिए मुश्किल काम नहीं था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अपराध कर बच निकलने की सोच रखने वालों के लिए न्यायिक व्यवस्था कड़ा संदेश दे रही है। अब अपराध करने का मतलब है, सख्त सजा और साम्राज्य का अंत। गैंगस्टर एक्ट के तहत अपराधियों पर आर्थिक चोट की जा रही है। यह बात प्रदेश के महानिदेशक अभियोजन ललित मुद्गल ने बुधवार को बाराबंकी में पत्रकारों से बातचीत में कही।
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अभियोजन कार्यों की समीक्षा करने पहुंचे ललित मुद्गल ने बताया कि योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत न सिर्फ अपराधियों को तेजी से सजा दिलाई जा रही है, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क को भी ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक जुलाई 2024 से 28 फरवरी 2026 के बीच महिला अपराधों में सात को, पॉक्सो के मामलों में 11 को अदालतों ने मृत्युदंड की सजा दी। अन्य मामलों में छह लोगों को मृत्युदंड दिया गया। इनमें महिला अपराधों में 290 को उम्रकैद मिली जबकि अन्य अपराधों में 38 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
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महानिदेशक ने बताया कि पहले गवाही के लिए पुलिस को गवाहों को ढूंढकर कोर्ट तक लाना पड़ता था। समय भी लगता था और पैसा भी। अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ने इस पूरी प्रक्रिया को बदल दिया है। अब तक 53,514 गवाहियों की रिकॉर्डिंग ऑनलाइन हो चुकी है। पारंपरिक तरीके से यह प्रक्रिया होती तो करीब 45 करोड़ रुपये खर्च होते। इस मौके पर संयुक्त निदेशक नागेश कुमार दीक्षित समेत कई न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
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जिलों के 544 अपराधियों को दंड
प्रदेश में अब अपराधियों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में 68 चिन्हित माफिया में से 36 को 62 मामलों में सजा दिलाई जा चुकी। जिलों के टॉप-10 अपराधियों के 381 मामलों में 544 दोषियों को दंड मिला।

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1400 पद स्वीकृत लेकिन आधे खाली
सख्ती के बीच कुछ समस्याएं भी सामने आई हैं। अभियोजन विभाग में 1400 पद स्वीकृत हैं, लेकिन आधे खाली हैं। मुद्गल ने माना कि कई मामलों में गवाह मुकर जाते हैं, जिससे आरोपी बच निकलते हैं। ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान तो है, लेकिन सामाजिक कारणों से सख्ती कम हो पाती है।
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