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नेपाली पानी से फिर तबाही मचाएगी घाघरा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Aug 2017 11:42 PM IST
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नेपाल से छोड़े गए 6.5 लाख क्यूसेक पानी से एक बार फिर घाघरा की तराई में तबाई मच सकती है। पहले से ही खतरे के निशान से 33 सेमी ऊपर बह रही घाघरा एक सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़नी शुरू हो गई है। उधर, सचिव राजस्व अभाव एवं दैवीय आपदा राहत रंजन कुमार ने कंट्रोल रूम और मंडी परिषद में बाढ़ पीड़ितों के लिए तैयार किए जा रहे राहत सामग्री की पैकिंग का जायजा लिया।
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जिलाधिकारी ने बाढ़ इलाके को तीन क्षेत्रों में बांट कर विकास विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी है। यह सभी अधिकारी बाढ़ पीड़ितों को त्वरित राहत से लेकर आवास व अन्य स्थाई सुविधाएं मुहैया कराने का कार्य करेंगे। गुरुवार को सुबह से लेकर शाम तक पांच बार में शारदा बैराज साढे़ छह लाख क्यूसेक पानी घाघरा में छोड़ा गया। जिसके बाद घाघरा का जलस्तर बढ़ने लगा।
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इससे जिले की रामनगर, सिरौलीगौसपुर, रामसनेहीघाट तहसील के दो सौ से अधिक गांवों की ढाई लाख आबादी के सामने मुसीबतें और बढ़ा दी है। तीन दिन से घटने वाली घाघरा से लोगों में आस बंधी थी कि जल्द ही जलभराव से मुक्ति मिलेगी और लोग अपना जीवन यापन ठीक से कर पाएंगे। पर एक बार फिर नेेेपाली पानी छोड़े जाने से हालात जल्द सुधरने के आसार नजर नही आ रहे हैं।
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हेतमापुर क्षेत्र में गुरुवार को बाढ़ पीड़ितों की मदद को निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने पहुंच कर दवाईयां बांटी और मच्छरों के मारने की दवा का छिड़काव किया। इसी क्रम में पंडित पुरवा गांव पहुंचे एसडीएम लव कुमार सिंह की टीम ने विझला, पर्वतपुर, बल्लुपुर व असौना गांव के 222 परिवारों राहत सामग्री वितरित कराई।
उधर, गुरुवार सचिव राजस्व रंजन कुमार बाढ़ कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की स्थाई समाधान को लेकर बाढ़ प्रभावित इलाका तीन जोन में बांटने की बात जिलाधिकारी से कही। बाढ़ प्रभावित रामनगर, सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसीलों के तीन जोनों में बांटा गया है।