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न अस्पताल न डॉक्टर और एंबुलेंस का हो गया पंजीकरण

Fri, 02 Apr 2021 01:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Apr 2021 01:07 AM IST
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Neither the hospital nor the doctor, the ambulance has been registered
बाराबंकी। माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल से पेशी पर ले जाने के लिए जिस एंबुलेंस का प्रयोग किया गया वह बाराबंकी के एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत है। चार साल से इंश्योरेंस व छह साल से इसकी फिटनेस भी नहीं कराई गई है। सबसे गंभीर पहलू यह कि जिस पते पर अस्पताल व डॉक्टर का नाम बताया गया है, वह कई वर्षों से वजूद में ही नहीं है। स्वास्थ्य महकमा इस नाम के किसी अस्पताल का पंजीकरण न होने का दावा कर रहा है।
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वहीं परिवहन विभाग फिटनेस न कराने पर एक साल पहले डॉ. अलका राय को नोटिस भेजकर खानापूर्ति कर चुका है। सूत्र बताते हैं कि एंबुलेंस के नाम से दर्ज यह वाहन माफिया के निजी कार्य में लगातार प्रयोग किया जा रहा था। इसकी भनक लगने के बाद स्थानीय पुलिस व प्रशासन दिनभर इस मामले की छानबीन में जुटा रहा। वहीं लखनऊ एसटीएफ ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है।
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मऊ जिले का रहने वाला माफिया डॉन मुख्तार अंसारी काफी दिनों से पंजाब के रोपड़ जेल में बंद है। प्रदेश सरकार उसे वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मुख्तार को लेने यूपी की पुलिस पंजाब गई थी। वहीं से पेशी पर पहुंचे मुख्तार ने बाराबंकी जिले की पंजीकृत निजी एंबुलेंस (यूपी 41 एटी 7171) का प्रयोग किया था।
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इसकी भनक लगने के बाद सरकारी अमला बाराबंकी में सतर्क हो गया है। गुरुवार को मीडिया मेें समाचार प्रकाशित होने के बाद हलचल तेज हो गई। एआरटीओ कार्यालय में एंबुलेंस का पता डॉ. अलका राय, 56, श्याम सन अस्पताल, रफीनगर, बाराबंकी दर्ज है। जो हकीकत में कई वर्षों से है ही नहीं। पुलिस ने भी इस पते पर पहुंचकर जांच की लेकिन कोई भी सुराग हाथ नहीं लगा। पूरे दिन सरकारी अमला गुपचुप तरीके से मुख्तार के इस कनेक्शन की तलाश में जुटा रहा।
उधर, एआरटीओ कार्यालय में इनके कागजात निकालकर छानबीन की गई जिसमें पाया गया कि इसका पंजीकरण 13 दिसंबर 2013 को हुआ था और एक फरवरी 2016 से एंबुलेंस का फिटनेस नहीं है और जनवरी 2017 से इसका इंश्योरेंस भी नहीं कराया गया है। वहीं एंबुलेंस की मालकिन डॉ. अलका राय मऊ जिले की निवासी बताई गई हैं। 20 जनवरी 2020 को इसका नोटिस एआरटीओ द्वारा डॉ. अलका राय को भेजा गया था। वहीं सीएमओ कार्यालय में इस नाम के किसी भी अस्पताल का पंजीकरण नहीं पाया गया है।
बाराबंकी के अस्पताल में मुख्तार अंसारी की एंबुलेंस दर्ज होने का मामला सामने आने के बाद पुलिस व प्रशासनिक अमले में भी अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। हाल यह है कि गुरुवार को पूरे दिन पुलिस अफसर इसी मामले की जानकारी में लगे रहे। यही नहीं, अफसरों के पास शासन व मीडिया से लगातार फोन भी आते रहे और पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी जाती रही। इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद अभी तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
एंबुलेंस के पते में जो मोबाइल नंबर दर्ज है, वह भी किसी दूसरे व्यक्ति का है। बताया जा रहा है कि यह नंबर बुधवार तक ऑन था लेकिन जब मामला सुर्खियों में आ गया तो इस नंबर को स्विच ऑफ कर दिया गया है। अब पुलिस इस मोबाइल नंबर के आधार पर भी कुछ लोगों तक पहुंच सकेगी।

इस मामले में अब एंबुलेंस स्वामी व अस्पताल संचालक के साथ जिसकी भूमिका इसमें होगी, उन लोगों पर केस भी दर्ज हो सकता है। हालांकि पुलिस को अभी परिवहन व स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। इसके बाद यदि केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो जिले के कई लोग भी इस जद में आ सकते है। डीएम डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि बाराबंकी में पंजीकृत निजी एंबुलेंस के प्रकरण पर कड़ी नजर रखी जा रही है। शासन द्वारा मिले दिशा-निर्देशों के क्रम में कार्रवाई की जाएगी।
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