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Barabanki News: मनरेगा का नाम बदला, काम ठप, 25 हजार श्रमिकों का 22 करोड़ अटका
Thu, 26 Feb 2026 01:57 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 26 Feb 2026 01:57 AM IST
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बाराबंकी। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा पोर्टल अपडेट कर नई वीबी-जी राम जी योजना लागू किए जाने के बाद जिले में 31 दिसंबर के बाद करीब 25 हजार से अधिक मनरेगा मजदूरों का 22 करोड़ रुपये की मजदूरी नही मिल सकी है। नाम बदल गया, काम ठप हो गया है, ऐसे में ग्राम पंचायतों में स्वीकृत विकास कार्य भी रूक गए हैं। होली नजदीक है पर 25 हजार मजदूराें को भुगतान कब तक होगा कुछ कहा नहीं जा सकता।
नए वित्तीय वर्ष की तैयारियों के बीच ऑनलाइन प्रणाली में बदलाव के कारण कई ग्राम पंचायतों की पुरानी वर्क आईडी अस्थायी रूप से बंद हो गई हैं। 30 दिसंबर के बाद से मजदूरों को न तो नया काम आवंटित हो पा रहा है और न ही पूर्व में किए गए कार्यों का भुगतान मिल सका है।
जिले के 15 ब्लॉकों की 1155 से अधिक ग्राम पंचायतें मनरेगा पर निर्भर हैं। ग्रामीण परिवारों के लिए यह आय का मुख्य स्रोत है। वर्क आईडी बंद होने से तालाब खुदाई, खड़ंजा व इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण और कच्ची सड़क मरम्मत जैसे विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। करीब डेढ़ महीने से मजदूरी न मिलने के कारण मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है और त्योहार फीका पड़ने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में 60 प्रतिशत कच्चे और 40 प्रतिशत पक्के कार्य मनरेगा के तहत होते हैं। भुगतान रुकने से विकास की रफ्तार भी थम गई है। पंचायतों में स्वीकृत योजनाएं अधर में लटक गई हैं।
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डीसी मनरेगा बृजेश कुमार का कहना है कि कि वीबी-जी राम जी योजना के तहत पोर्टल अपडेट किया जा रहा है। तकनीकी प्रक्रिया पूरी होते ही भुगतान शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, मजदूरों को अब भुगतान कब तक मिलेगा, इसे लेकर स्पष्ट समय सीमा नहीं बताई गई है।
मनरेगा मजदूरों की होली फीकी, जनवरी से नहीं मिला भुगतान
दरियाबाद। होली का त्यौहार नजदीक है, लेकिन मनरेगा श्रमिकों के चेहरे पर खुशियों की जगह चिंता दिखाई दे रही है। 71 ग्राम पंचायतों में कार्य करने वाले मजदूरों को 10 जनवरी से 177 लाख का भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनकी होली फीकी रहने की आशंका है। बीकापुर निवासी श्रमिक राम शंकर ने बताया कि त्योहार सिर पर है, लेकिन मजदूरी न मिलने से परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। वहीं पहरूपुर के शिव कुमार ने कहा कि ग्राम पंचायत में काम करने के बावजूद अब तक भुगतान नहीं हुआ है और कोई फसल भी तैयार नहीं है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है। एपीओ अनूप भार्गव के अनुसार जनवरी से मनरेगा मजदूरों की मजदूरी प्रशासन से उनके खातों में नहीं आई है।
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नए वित्तीय वर्ष की तैयारियों के बीच ऑनलाइन प्रणाली में बदलाव के कारण कई ग्राम पंचायतों की पुरानी वर्क आईडी अस्थायी रूप से बंद हो गई हैं। 30 दिसंबर के बाद से मजदूरों को न तो नया काम आवंटित हो पा रहा है और न ही पूर्व में किए गए कार्यों का भुगतान मिल सका है।
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जिले के 15 ब्लॉकों की 1155 से अधिक ग्राम पंचायतें मनरेगा पर निर्भर हैं। ग्रामीण परिवारों के लिए यह आय का मुख्य स्रोत है। वर्क आईडी बंद होने से तालाब खुदाई, खड़ंजा व इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण और कच्ची सड़क मरम्मत जैसे विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। करीब डेढ़ महीने से मजदूरी न मिलने के कारण मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है और त्योहार फीका पड़ने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में 60 प्रतिशत कच्चे और 40 प्रतिशत पक्के कार्य मनरेगा के तहत होते हैं। भुगतान रुकने से विकास की रफ्तार भी थम गई है। पंचायतों में स्वीकृत योजनाएं अधर में लटक गई हैं।
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डीसी मनरेगा बृजेश कुमार का कहना है कि कि वीबी-जी राम जी योजना के तहत पोर्टल अपडेट किया जा रहा है। तकनीकी प्रक्रिया पूरी होते ही भुगतान शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, मजदूरों को अब भुगतान कब तक मिलेगा, इसे लेकर स्पष्ट समय सीमा नहीं बताई गई है।
मनरेगा मजदूरों की होली फीकी, जनवरी से नहीं मिला भुगतान
दरियाबाद। होली का त्यौहार नजदीक है, लेकिन मनरेगा श्रमिकों के चेहरे पर खुशियों की जगह चिंता दिखाई दे रही है। 71 ग्राम पंचायतों में कार्य करने वाले मजदूरों को 10 जनवरी से 177 लाख का भुगतान नहीं मिला है, जिससे उनकी होली फीकी रहने की आशंका है। बीकापुर निवासी श्रमिक राम शंकर ने बताया कि त्योहार सिर पर है, लेकिन मजदूरी न मिलने से परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। वहीं पहरूपुर के शिव कुमार ने कहा कि ग्राम पंचायत में काम करने के बावजूद अब तक भुगतान नहीं हुआ है और कोई फसल भी तैयार नहीं है, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया है। एपीओ अनूप भार्गव के अनुसार जनवरी से मनरेगा मजदूरों की मजदूरी प्रशासन से उनके खातों में नहीं आई है।