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Barabanki News: डेढ़ करोड़ की ठगी में मास्टरमाइंड एजेंट और साथी गिरफ्तार
Fri, 06 Feb 2026 11:49 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 06 Feb 2026 11:49 PM IST
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पुलिस हिरासत में ग्रामीणों से ठगी करने वाला एजेंट।
अंबेडकरनगर। पंजाब नेशनल बैंक की छज्जापुर शाखा टांडा में ग्रामीणों से हुई डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मुख्य आरोपी बीमा एजेंट उमेर अहमद को फुलवरिया तिराहे से और पॉलिसी एडिटर शरद को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया है।
शुक्रवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता में पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर शंकर ने बताया कि चार फरवरी को जनता दर्शन के दौरान रूपवती देवी के साथ करीब 15-16 ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि उमेर अहमद ने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर एनटीपीसी और एनएचएआई से मिले उनके मुआवजे की रकम को फर्जी पॉलिसी और एफडी के नाम पर हड़प लिया है। सीओ टांडा शुभम कुमार और इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी की जांच में आया कि उमेर वर्ष 2019 से ही लोगों को पैसे दोगुने करने का झांसा देकर ठगी कर रहा था। जांच में तत्कालीन बैंक मैनेजर और दो कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। उमेर इन कर्मियों को महंगे गैजेट्स और तोहफे देकर अपने प्रभाव में रखता था। पुलिस ने ठगी की कमाई से खरीदी एक अर्टिका कार, एक बुलेट मोटरसाइकिल और एक स्कूटी, एक आईफोनऔर एक सैमसंग मोबाइल जब्त किया है। साथ ही ठगी की रकम से जुड़े 13 बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया है।
बैंक में बैठकर ही ग्रामीणों को लूटता था एजेंट उमेर
एसपी के अनुसार बीमा एजेंट उमेर अहमद की बैंक शाखा में बहुत गहरी पैठ थी। वह ग्रामीणों को बैंक परिसर में ही बुलाकर ठगी का शिकार बनाता था। शुरुआत में उसने एक-दो लाख रुपये की पॉलिसी में हेराफेरी की, लेकिन सफलता मिलने पर उसका हौसला बढ़ता गया और उसने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रच डाली। ठगी को अंजाम देने के लिए उमेर टांडा के मीरापुर निवासी शरद मौर्य की मदद लेता था। शरद, जो मूल रूप से शादियों की फोटो और वीडियो एडिटिंग का काम करता है, एडिटिंग के जरिए असली जैसे दिखने वाले फर्जी पॉलिसी बांड तैयार करता था। उमेर प्रत्येक फर्जी दस्तावेज तैयार करने के बदले शरद को 2,000 रुपये का भुगतान करता था।
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पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
उमेर ने पुलिस को दिए बयान में पहले उन दो बैंक अधिकारियों के नाम लिए, जो वर्तमान में अयोध्या और बस्ती में तैनात हैं। हालांकि, जब पुलिस इन अफसरों को पूछताछ के लिए लाई, तो पता चला कि इन्हीं अधिकारियों ने वर्ष 2024 में उमेर की गड़बड़ियों को उजागर कर उसे एजेंट के पद से हटवाया था। इसी रंजिश में उमेर ने जांच की दिशा मोड़ने और उन्हें फंसाने की कोशिश की थी।
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शुक्रवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता में पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर शंकर ने बताया कि चार फरवरी को जनता दर्शन के दौरान रूपवती देवी के साथ करीब 15-16 ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई थी। ग्रामीणों का आरोप था कि उमेर अहमद ने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर एनटीपीसी और एनएचएआई से मिले उनके मुआवजे की रकम को फर्जी पॉलिसी और एफडी के नाम पर हड़प लिया है। सीओ टांडा शुभम कुमार और इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी की जांच में आया कि उमेर वर्ष 2019 से ही लोगों को पैसे दोगुने करने का झांसा देकर ठगी कर रहा था। जांच में तत्कालीन बैंक मैनेजर और दो कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है। उमेर इन कर्मियों को महंगे गैजेट्स और तोहफे देकर अपने प्रभाव में रखता था। पुलिस ने ठगी की कमाई से खरीदी एक अर्टिका कार, एक बुलेट मोटरसाइकिल और एक स्कूटी, एक आईफोनऔर एक सैमसंग मोबाइल जब्त किया है। साथ ही ठगी की रकम से जुड़े 13 बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया है।
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बैंक में बैठकर ही ग्रामीणों को लूटता था एजेंट उमेर
एसपी के अनुसार बीमा एजेंट उमेर अहमद की बैंक शाखा में बहुत गहरी पैठ थी। वह ग्रामीणों को बैंक परिसर में ही बुलाकर ठगी का शिकार बनाता था। शुरुआत में उसने एक-दो लाख रुपये की पॉलिसी में हेराफेरी की, लेकिन सफलता मिलने पर उसका हौसला बढ़ता गया और उसने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रच डाली। ठगी को अंजाम देने के लिए उमेर टांडा के मीरापुर निवासी शरद मौर्य की मदद लेता था। शरद, जो मूल रूप से शादियों की फोटो और वीडियो एडिटिंग का काम करता है, एडिटिंग के जरिए असली जैसे दिखने वाले फर्जी पॉलिसी बांड तैयार करता था। उमेर प्रत्येक फर्जी दस्तावेज तैयार करने के बदले शरद को 2,000 रुपये का भुगतान करता था।
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पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
उमेर ने पुलिस को दिए बयान में पहले उन दो बैंक अधिकारियों के नाम लिए, जो वर्तमान में अयोध्या और बस्ती में तैनात हैं। हालांकि, जब पुलिस इन अफसरों को पूछताछ के लिए लाई, तो पता चला कि इन्हीं अधिकारियों ने वर्ष 2024 में उमेर की गड़बड़ियों को उजागर कर उसे एजेंट के पद से हटवाया था। इसी रंजिश में उमेर ने जांच की दिशा मोड़ने और उन्हें फंसाने की कोशिश की थी।