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23 गांवों के मनरेगा कार्य में हुई जमकर धांधली
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बाराबंकी। जिले के निंदूरा ब्लॉक में मनरेगा योजना के तहत 23 गांवों में कराए गए कार्यों में जमकर धांधली की गई है। इस मामले की जांच के बाद यह बातें सामने आ रही है। अब अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि पूरा गड़बड़ झाला कितने पैसों का है। इसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
निंदूरा ब्लॉक की 23 ग्राम पंचायतों में अनियमितता हुई थी। करीब दो साल पहले हुए इस मामले के दौरान तत्कालीन बीडीओ और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर से खेल होने की बात उजागर हुई थी। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी एकता सिंह के निर्देश पर यह जांच कराई गई थी।
सीडीओ ने इसकी जांच डीसी मनरेगा बृजेश त्रिपाठी को सौंपी हैं। सीडीओ ने बताया कि इस मामले में वित्तीय अनियमितता बरतने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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क्या है नियम
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का उद्देश्य और नियम है कि गांवों में लोगों को रोजगार से जोड़कर काम दिया जाए। इसलिए मनरेगा की कुल राशि से 60 प्रतिशत पैसा मजदूरी पर खर्च किया जाता है और 40 प्रतिशत सामग्री पर। विभाग से जुड़े लोगों की माने तो निंदूरा इलाके के एक-एक ग्राम पंचायत में 82 प्रतिशत सिर्फ सामग्री पर ही खर्च करवा दिया। वहीं इसमें ऐसी फार्मों को भुगतान किया गया, जिनका जीएसटी नंबर तक नहीं था। इसके बाद यह गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद जांच शुरू कराई गई थी।
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निंदूरा ब्लॉक की 23 ग्राम पंचायतों में अनियमितता हुई थी। करीब दो साल पहले हुए इस मामले के दौरान तत्कालीन बीडीओ और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर से खेल होने की बात उजागर हुई थी। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी एकता सिंह के निर्देश पर यह जांच कराई गई थी।
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सीडीओ ने इसकी जांच डीसी मनरेगा बृजेश त्रिपाठी को सौंपी हैं। सीडीओ ने बताया कि इस मामले में वित्तीय अनियमितता बरतने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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क्या है नियम
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का उद्देश्य और नियम है कि गांवों में लोगों को रोजगार से जोड़कर काम दिया जाए। इसलिए मनरेगा की कुल राशि से 60 प्रतिशत पैसा मजदूरी पर खर्च किया जाता है और 40 प्रतिशत सामग्री पर। विभाग से जुड़े लोगों की माने तो निंदूरा इलाके के एक-एक ग्राम पंचायत में 82 प्रतिशत सिर्फ सामग्री पर ही खर्च करवा दिया। वहीं इसमें ऐसी फार्मों को भुगतान किया गया, जिनका जीएसटी नंबर तक नहीं था। इसके बाद यह गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद जांच शुरू कराई गई थी।