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धान किसानों को आठ करोड़ की चपत
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Nov 2015 10:58 PM IST
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सरकारी एजेंसियों की लापरवाही और मिलीभगत से धान किसानों को अब तक लगभग आठ करोड़ का चूना लग चुका है। धीमी सरकारी खरीद के कारण किसानों को मजबूरी में निजी व्यापारी के हाथों एक हजार से 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर अपना धान बेचना पड़ रहा है।
जबकि सरकारी खरीद रेट 1410 रुपये प्रति क्विंटल है। बाद में यही धान निजी व्यापारी सरकारी एजेंसियों को देर एक क्विंटल पर तीन सौ से चार सौ रुपये तक मुनाफा कमाएंगे। अब तक सरकारी एजेंसियों ने जहां सिर्फ 11 हजार क्विंटल खरीद की हैं वहीं निजी व्यापारियों ने लगभग ढाई लाख क्विंटल धान खरीदकर भंडारण कर लिया है।
जिले में इस वर्ष धान की खरीद एक नवंबर से शुरू हुई और अब तक महज 11 हजार क्विंटल ही धान की खरीद की जा सकी है। जबकि किसानों का धान अक्टूबर में ही तैयार होने लगा था। सरकारी खरीद में देरी की वजह से किसानों को अगली फसल बोने के लिए पैसे की जरूरत थी जिसके चलते औने-पौने दामों पर धान बेचना उनकी मजबूरी बन गया था।
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उधर मंडी कर्मियों से मिली भगत करते हुए निजी व्यापारियों ने इसका खूब फायदा उठाया और किसानों का करीब ढाई लाख क्विंटल धान एक हजार से लेकर 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद डाला। इसी धान को बाद में जब धान खरीद की समय सीमा खत्म होने लगेगी तो सरकारी एजेंसियों को बेचकर प्रति क्विंटल तीन सौ से चार सौ रुपये का मोटा मुनाफा कमाएंगे। इस तरह से अब तक धान बेचने वाले किसानों को करीब आठ करोड़ रुपये की चपत लगी है।
सब कुछ जानने के बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। सरकार वर्ष 2015 को किसान दिवस के रूप में मना रही है। लेकिन जिले के किसानों का हाल किसी से छिपा नहीं है। किसानों का हर तरफ से शोषण हो रहा है। क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नहीं हो रही है और निजी व्यापारी समर्थन मूल्य से कम पर धान खरीद कर मालामाल हो रहे हैं।
नवीन मंडी में दो लाख और सफदरगंज मंडी में बिका 50 हजार क्विंटल
जिले में दो मंडियां है एक नवीन सब्जी मंडी और दूसरी सफदरगंज मंडी। इन दोनों मंडियों के सचिवों की माने तो नवीन सब्जी मंडी को निजी व्यापारियों ने जो लेखा जोखा उपलब्ध कराया है उसके मुताबिक करीब दो लाख तथा सफदरगंज मंडी सचिव के मुताबिक 50 हजार क्विंटल धान खरीद का विवरण दिया है। व्यापारियों ने इस बात का कोई जिक्र नहीं किया है कि उन्होंने किसानों से घोषित समर्थन मूल्य से कम पर धान खरीदा है।
ऐसे होता है खेल
किसानों का धान अक्टूबर में तैयार हो जाता है। सरकारी खरीद हमेशा देरी से होती है या फिर धीमी गति से। ऐसे में किसानों को बिचौलिये के पास जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं रहता है। सरकारी रेट 1410 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि किसानों से धान एक हजार से 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा जाता है। बाद में जब खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं होता तब बिचौलियों से धान खरीद होती है। ऐसे में निजी व्यापारी डेढ़ महीने में ही एक क्विंटल धान पर लगभग चार सौ रुपये का मुनाफा कमा लेते हैं।
औने-पौने दाम में धान बेचना मजबूरी
सरकारी क्रय केंद्रों पर तैनात प्रभारी सीधे मुंह बात नहीं करते। वह धान में तमाम प्रकार कि कमियां बताकर लौटा देते हैं जबकि हम किसानों आलू और गेहूं की फसल की बोआई के लिए तुरंत पैसे की जरूरत होती है। औने-पौने दामों पर धान बेचना किसानों की मजबूरी बन गया है।
- भगौती प्रसाद, किसान
व्यापारी और अफसरों की मिलीभगत से किसान परेशान
केंद्र प्रभारी और निजी व्यापारियों की मिलीभगत का नतीजा किसानों को भुगतना पड़ता है। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नहीं की जा रही है। जिससे किसान मजबूरी में निजी व्यापारियों के हाथों अपना धान बेच रहे हैं।
- राम भवन, किसान
किसानों का हो रहा शोषण
ऐसा पहली बार नहीं हुआ हमेशा किसानों का ही शोषण होता रहा है। सरकारी मशीनरी हो या निजी व्यापारी सभी किसानों की मजबूरी का खूब फायदा उठाते हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नहीं की जा रही है।
- रामसुख, किसान
एक माह देर से खुला धान खरीद केंद्र
अधिकारियों और व्यापारियों की मिलीभगत का खामियाजा किसान उठा रहा है। इस बार धान खरीद केंद्र एक माह देर से खोले गए तब किसान अपना आधे से ज्यादा धान निजी व्यापारियों के हाथों औने-पौने दामों पर बेच चुका था क्योंकि उसे अगली फसल की बोआई के लिए पैसे की जरूरत थी।
- राज कुमार, किसान
निजी व्यापारी यदि घोषित समर्थन मूल्य 1410 रुपये प्रति क्विंटल के बजाए कम दामों पर किसानों से धान खरीद कर रहे हैं तो वह गलत कर रहे हैं। इसकी जांच कराई जाएगी और जिन व्यापारियों ने ऐसा किया उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी
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जबकि सरकारी खरीद रेट 1410 रुपये प्रति क्विंटल है। बाद में यही धान निजी व्यापारी सरकारी एजेंसियों को देर एक क्विंटल पर तीन सौ से चार सौ रुपये तक मुनाफा कमाएंगे। अब तक सरकारी एजेंसियों ने जहां सिर्फ 11 हजार क्विंटल खरीद की हैं वहीं निजी व्यापारियों ने लगभग ढाई लाख क्विंटल धान खरीदकर भंडारण कर लिया है।
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जिले में इस वर्ष धान की खरीद एक नवंबर से शुरू हुई और अब तक महज 11 हजार क्विंटल ही धान की खरीद की जा सकी है। जबकि किसानों का धान अक्टूबर में ही तैयार होने लगा था। सरकारी खरीद में देरी की वजह से किसानों को अगली फसल बोने के लिए पैसे की जरूरत थी जिसके चलते औने-पौने दामों पर धान बेचना उनकी मजबूरी बन गया था।
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उधर मंडी कर्मियों से मिली भगत करते हुए निजी व्यापारियों ने इसका खूब फायदा उठाया और किसानों का करीब ढाई लाख क्विंटल धान एक हजार से लेकर 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद डाला। इसी धान को बाद में जब धान खरीद की समय सीमा खत्म होने लगेगी तो सरकारी एजेंसियों को बेचकर प्रति क्विंटल तीन सौ से चार सौ रुपये का मोटा मुनाफा कमाएंगे। इस तरह से अब तक धान बेचने वाले किसानों को करीब आठ करोड़ रुपये की चपत लगी है।
सब कुछ जानने के बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। सरकार वर्ष 2015 को किसान दिवस के रूप में मना रही है। लेकिन जिले के किसानों का हाल किसी से छिपा नहीं है। किसानों का हर तरफ से शोषण हो रहा है। क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नहीं हो रही है और निजी व्यापारी समर्थन मूल्य से कम पर धान खरीद कर मालामाल हो रहे हैं।
नवीन मंडी में दो लाख और सफदरगंज मंडी में बिका 50 हजार क्विंटल
जिले में दो मंडियां है एक नवीन सब्जी मंडी और दूसरी सफदरगंज मंडी। इन दोनों मंडियों के सचिवों की माने तो नवीन सब्जी मंडी को निजी व्यापारियों ने जो लेखा जोखा उपलब्ध कराया है उसके मुताबिक करीब दो लाख तथा सफदरगंज मंडी सचिव के मुताबिक 50 हजार क्विंटल धान खरीद का विवरण दिया है। व्यापारियों ने इस बात का कोई जिक्र नहीं किया है कि उन्होंने किसानों से घोषित समर्थन मूल्य से कम पर धान खरीदा है।
ऐसे होता है खेल
किसानों का धान अक्टूबर में तैयार हो जाता है। सरकारी खरीद हमेशा देरी से होती है या फिर धीमी गति से। ऐसे में किसानों को बिचौलिये के पास जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं रहता है। सरकारी रेट 1410 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि किसानों से धान एक हजार से 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक खरीदा जाता है। बाद में जब खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं होता तब बिचौलियों से धान खरीद होती है। ऐसे में निजी व्यापारी डेढ़ महीने में ही एक क्विंटल धान पर लगभग चार सौ रुपये का मुनाफा कमा लेते हैं।
औने-पौने दाम में धान बेचना मजबूरी
सरकारी क्रय केंद्रों पर तैनात प्रभारी सीधे मुंह बात नहीं करते। वह धान में तमाम प्रकार कि कमियां बताकर लौटा देते हैं जबकि हम किसानों आलू और गेहूं की फसल की बोआई के लिए तुरंत पैसे की जरूरत होती है। औने-पौने दामों पर धान बेचना किसानों की मजबूरी बन गया है।
- भगौती प्रसाद, किसान
व्यापारी और अफसरों की मिलीभगत से किसान परेशान
केंद्र प्रभारी और निजी व्यापारियों की मिलीभगत का नतीजा किसानों को भुगतना पड़ता है। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नहीं की जा रही है। जिससे किसान मजबूरी में निजी व्यापारियों के हाथों अपना धान बेच रहे हैं।
- राम भवन, किसान
किसानों का हो रहा शोषण
ऐसा पहली बार नहीं हुआ हमेशा किसानों का ही शोषण होता रहा है। सरकारी मशीनरी हो या निजी व्यापारी सभी किसानों की मजबूरी का खूब फायदा उठाते हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नहीं की जा रही है।
- रामसुख, किसान
एक माह देर से खुला धान खरीद केंद्र
अधिकारियों और व्यापारियों की मिलीभगत का खामियाजा किसान उठा रहा है। इस बार धान खरीद केंद्र एक माह देर से खोले गए तब किसान अपना आधे से ज्यादा धान निजी व्यापारियों के हाथों औने-पौने दामों पर बेच चुका था क्योंकि उसे अगली फसल की बोआई के लिए पैसे की जरूरत थी।
- राज कुमार, किसान
निजी व्यापारी यदि घोषित समर्थन मूल्य 1410 रुपये प्रति क्विंटल के बजाए कम दामों पर किसानों से धान खरीद कर रहे हैं तो वह गलत कर रहे हैं। इसकी जांच कराई जाएगी और जिन व्यापारियों ने ऐसा किया उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी