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Barabanki News: स्टॉक में नहीं जीवनरक्षक दवाएं, बाहर से खरीदना मजबूरी
Wed, 05 Feb 2025 01:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 05 Feb 2025 01:48 AM IST
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बाराबंकी। मौसम में बदलाव की वजह से जहां जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है वहीं, जीवन रक्षक दवाएं भी स्टाॅक में नहीं बची हैं। अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों को डॉक्टर बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। इन दवाओं को खरीदना मरीजों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। जिम्मेदार इससे अंजान बने हुए हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में औसतन प्रतिदिन 1,200 से 1,500 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मौसम में आए बदलाव की वजह से मरीजों की भीड़ बढ़ी है। लेकिन अस्पताल से जीवन रक्षक दवाएं जैसे सोडियम वालपोरेट 500 एमजी, क्लोबाजाम पांच एमजी, सिनारजिन, रेस्पेरीडोम, एस्कारबिक एसिड, एनटासिड, एससिरालोप्रम, यूटियापाइन, थाइराक्सिन समेत कई दवाएं स्टॉक में उपलब्ध नहीं है।
इनकी डिमांड बनाकर सीएमएसडी स्टोर मसौली को भेजी गईं, लेकिन वहां पर भी दवाएं उपलब्ध नहीं मिलीं। जिसके चलते डॉक्टर इन दवाओं को बाहर से खरीदने के लिए लिख रहे हैं। मंगलवार को इलाज कराने पहुंचे सीताराम, प्रदीप कुमार, रामसेवक ने बताया कि डॉक्टरों के अगल-बगल एमआर बैठे रहते हैं। इनके इशारे पर डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखते हैं। इस ओर कोई भी अधिकारी घ्यान नहीं दे रहा है। सीएमएस डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि जो दवाएं नहीं हैं, उनकी डिमांड बनाकर सीएमएसडी स्टोर काे भेजी गईं हैं।
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ट्राॅमा सेंटर में बाहर की दवाओं से इलाज
ट्राॅमा सेंटर में आने वाले मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं। इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। हालांकि, अमर उजाला ऐसे किसी भी वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। तीमारदारों का आराेप है कि ट्राॅमा में आने वाले ज्यादातर मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं।
सीएमएसडी स्टोर में ज्यादातर दवाएं उपलब्ध हैं जिनका प्रतिदिन अस्पतालों के लिए वितरण होता है। कभी-कभी कुछ दवाएं खत्म भी हो जाती हैं। जिनकी डिमांड तत्काल भेज दी जाती है।
डॉ. डीके श्रीवास्तव, नोडल, एसीएमओ
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जिला अस्पताल की ओपीडी में औसतन प्रतिदिन 1,200 से 1,500 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मौसम में आए बदलाव की वजह से मरीजों की भीड़ बढ़ी है। लेकिन अस्पताल से जीवन रक्षक दवाएं जैसे सोडियम वालपोरेट 500 एमजी, क्लोबाजाम पांच एमजी, सिनारजिन, रेस्पेरीडोम, एस्कारबिक एसिड, एनटासिड, एससिरालोप्रम, यूटियापाइन, थाइराक्सिन समेत कई दवाएं स्टॉक में उपलब्ध नहीं है।
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इनकी डिमांड बनाकर सीएमएसडी स्टोर मसौली को भेजी गईं, लेकिन वहां पर भी दवाएं उपलब्ध नहीं मिलीं। जिसके चलते डॉक्टर इन दवाओं को बाहर से खरीदने के लिए लिख रहे हैं। मंगलवार को इलाज कराने पहुंचे सीताराम, प्रदीप कुमार, रामसेवक ने बताया कि डॉक्टरों के अगल-बगल एमआर बैठे रहते हैं। इनके इशारे पर डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखते हैं। इस ओर कोई भी अधिकारी घ्यान नहीं दे रहा है। सीएमएस डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि जो दवाएं नहीं हैं, उनकी डिमांड बनाकर सीएमएसडी स्टोर काे भेजी गईं हैं।
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ट्राॅमा सेंटर में बाहर की दवाओं से इलाज
ट्राॅमा सेंटर में आने वाले मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं। इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। हालांकि, अमर उजाला ऐसे किसी भी वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। तीमारदारों का आराेप है कि ट्राॅमा में आने वाले ज्यादातर मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जाती हैं।
सीएमएसडी स्टोर में ज्यादातर दवाएं उपलब्ध हैं जिनका प्रतिदिन अस्पतालों के लिए वितरण होता है। कभी-कभी कुछ दवाएं खत्म भी हो जाती हैं। जिनकी डिमांड तत्काल भेज दी जाती है।
डॉ. डीके श्रीवास्तव, नोडल, एसीएमओ