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विदेशी पक्षियों की सैरगाह बनीं जिले की झीलें

Sun, 12 Nov 2017 10:50 PM IST
बाराबंकी
बाराबंकी Updated Sun, 12 Nov 2017 10:50 PM IST
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Lake of the district made the resort of foreign birds
बेलहरा की किरकिच्ची झील में विदेशी पक्षी(फाइल)। - फोटो : अमर उजाला
देश ही नहीं, विदेशी से आने वाले पक्षियों की शरणगाह जिले की नामचीन झीलें संरक्षण के अभाव में अपना अस्तित्व खोती जा रही हैं। पिछले वर्ष जाड़े के मौसम में वातावरण अपने अनुकूल पाकर हिमाचल, तिब्बत, लद्दाख के अलावा चीन, पाकिस्तान के करीब 300 साइबेरियन पक्षी यहां पहुंचे थे। लगातार पक्षियों के शिकारी व झीलों में पानी की कमी पर ध्यान न देने से झीलों की हालत दिनों दिन बिगड़ती जा रही है। आसपास लोग अवैध कब्जा भी करते जा रहे हैं।
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जिले में एक दर्जन से अधिक झीलें हैं। इनमें से देवा की सारस विहार, बेलहरा की किरकिच्ची, जैदपुर की कमरावां, रामनगर की सराही व सूरतगंज के पास भगहर झील प्रमुख हैं। यहां पर हर वर्ष सर्दी के मौसम में हिमाचल प्रदेश, तिब्बत व लद्दाख के अलावा चीन, पाकिस्तान समेत जहां पर बर्फबारी अधिक होने से झीलों का पानी जम जाता है।
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तभी वहां के पक्षी अपने अनुकूल जलवायु की ओर विचरण करते हुए यहां आते हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नवंबर से पक्षियों का आना शुरू हो जाता है। विगत वर्ष कमरावां व सराही झील पर विदेशी पक्षियों के सर्वे में 300-350 की संख्या सामने आई थी। विभाग द्वारा ऐसे पक्षियों के शिकार पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। 
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