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सफाई देने की नहीं कराने की जरूरत, हकीकत बयां कर रहे हालात
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बाराबंकी। प्रयोगशाला में नदारद उपकरण... बेंच व खिड़कियों पर जमी धूल, परिसर में उगी झाड़ियां, फैली गंदगी तथा शैक्षिक गुणवत्ता पूरी तरह से ध्वस्त होने की पोल माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री गुलाब देवी के निरीक्षण में खुली।
यह देख मंत्री बोलीं- सफाई देने नहीं कराने की जरूरत है। हालात स्वयं हकीकत बयां कर रहे हैं। इस पर उन्होंने संबंधित पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए तो डीआईओएस कार्यालय में घुसते ही बाथरूम से आ रही दुर्गंध को लेकर डीआईओएस को जिम्मेदार ठहराते हुए लौट गईं।
बुधवार दोपहर ढाई बजे के करीब माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी शहर स्थित जीजीआईसी पहुंचीं। उन्होंने उपस्थिति रजिस्टर देख अवकाश पर शिक्षक व कर्मचारियों के होने का कारण व प्रार्थनापत्र मांगा तो प्रधानाचार्या ने मोबाइल पर अवकाश लेने की बात बताई।
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मगर, छात्र उपस्थिति से मंत्री असंतुष्ट दिखीं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के क्लास में जाकर बैठने व खड़े होकर बात करने के बजाय छात्रों को पढ़ाएं तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
क्लास के निरीक्षण में चौंकाने वाले हालात सामने आए। गृहविज्ञान की शिक्षिका पढ़ा रही थी।
बच्चों से बातचीत की तो वे कुछ बता ही नहीं पाए। तब शिक्षिका ने फाइल बनाने की बात बताई तो उन्होंने कहा कि यह प्रारंभिक शिक्षा है। छात्राओं की कॉपी मांगी तो वह नहीं दिखा पाई। दूसरी कक्षा में शिक्षिका संगठन के बारे में पढ़ा रही थी। मगर, एक भी छात्रा उसके बारे में बता नहीं सकी।
फिर क्या, विज्ञान प्रयोगशाला के निरीक्षण की ओर मंत्री बढ़ीं तो सफाई व्यवस्था की पोल खुल गई। मैैदान में बड़ी-बडी घास देख मंत्री बोलीं कि इन झाड़ियों में सांप व मच्छर रहते हैं। ऐसे में अगर बच्चों को काट लिया तो प्रधानाचार्या साहिबा कोई उत्तर नहीं दे पाओगी।
बिजली के झूलते तार व गंदगी देख कहा कि हम लोग स्वच्छता अभियान चला रहे हैं और यहां के हालात ऐसे हैं। लाइब्रेरी देखते ही मंत्री का गुस्सा बढ़ गया। बोलीं कि बताने की जरूरत नहीं हालात दिख रहे हैं। यहां बेंच व उपकरण धूल खा रहे थे तो प्रकाश तक की व्यवस्था नहीं थी।
इस पर मंत्री ने डीआईओएस से जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। प्रधानाचार्या ने लाइब्रेरी देखने को कहा तो मंत्री ने कहा कि अगर मैचिंग मिलाने के बजाय इन स्थितियों पर ध्यान दिया होता तो स्थित बेहतर होगी।
इसके बाद जीआईसी पहुंचते ही मंत्री दीवार के सहारे झूलते तार देख भड़क उठीं। कहा कि इससे हादसे से इंकार नहीं किया सकता। छोटे-छोटे कार्य कराने के लिए ‘अ’ से ‘अनार’ बताने की बात नहीं है।
यहां भी विज्ञान प्रयोगशाला देख मंत्री ने कहा कि प्रिंसपल हालात देखिए, ऐसे में बच्चों को क्या प्रयोग कराया जाता होगा, बताने की जरूरत नहीं है। बाथरूम देख भी नाराजगी जाहिर की और खामियों को ठीक कराने की जिम्मेदारी डीआईओएस को दी।
डीआईओएस आफिस में घुसते ही मंत्री बोलीं- इधर शौचालय है क्या। कहा कि इतनी दुर्गंध यहां पर है, कर्मचारी काम कैसे करते हैं। डीआईओएस साहब इसके तो आप जिम्मेदार हैं। ...और पूरे कार्यालय का निरीक्षण किए बिना मंत्री बाहर निकलीं और अपनी गाड़ी में बैठकर चली गईं।
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यह देख मंत्री बोलीं- सफाई देने नहीं कराने की जरूरत है। हालात स्वयं हकीकत बयां कर रहे हैं। इस पर उन्होंने संबंधित पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए तो डीआईओएस कार्यालय में घुसते ही बाथरूम से आ रही दुर्गंध को लेकर डीआईओएस को जिम्मेदार ठहराते हुए लौट गईं।
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बुधवार दोपहर ढाई बजे के करीब माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी शहर स्थित जीजीआईसी पहुंचीं। उन्होंने उपस्थिति रजिस्टर देख अवकाश पर शिक्षक व कर्मचारियों के होने का कारण व प्रार्थनापत्र मांगा तो प्रधानाचार्या ने मोबाइल पर अवकाश लेने की बात बताई।
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मगर, छात्र उपस्थिति से मंत्री असंतुष्ट दिखीं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के क्लास में जाकर बैठने व खड़े होकर बात करने के बजाय छात्रों को पढ़ाएं तो बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
क्लास के निरीक्षण में चौंकाने वाले हालात सामने आए। गृहविज्ञान की शिक्षिका पढ़ा रही थी।
बच्चों से बातचीत की तो वे कुछ बता ही नहीं पाए। तब शिक्षिका ने फाइल बनाने की बात बताई तो उन्होंने कहा कि यह प्रारंभिक शिक्षा है। छात्राओं की कॉपी मांगी तो वह नहीं दिखा पाई। दूसरी कक्षा में शिक्षिका संगठन के बारे में पढ़ा रही थी। मगर, एक भी छात्रा उसके बारे में बता नहीं सकी।
फिर क्या, विज्ञान प्रयोगशाला के निरीक्षण की ओर मंत्री बढ़ीं तो सफाई व्यवस्था की पोल खुल गई। मैैदान में बड़ी-बडी घास देख मंत्री बोलीं कि इन झाड़ियों में सांप व मच्छर रहते हैं। ऐसे में अगर बच्चों को काट लिया तो प्रधानाचार्या साहिबा कोई उत्तर नहीं दे पाओगी।
बिजली के झूलते तार व गंदगी देख कहा कि हम लोग स्वच्छता अभियान चला रहे हैं और यहां के हालात ऐसे हैं। लाइब्रेरी देखते ही मंत्री का गुस्सा बढ़ गया। बोलीं कि बताने की जरूरत नहीं हालात दिख रहे हैं। यहां बेंच व उपकरण धूल खा रहे थे तो प्रकाश तक की व्यवस्था नहीं थी।
इस पर मंत्री ने डीआईओएस से जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। प्रधानाचार्या ने लाइब्रेरी देखने को कहा तो मंत्री ने कहा कि अगर मैचिंग मिलाने के बजाय इन स्थितियों पर ध्यान दिया होता तो स्थित बेहतर होगी।
इसके बाद जीआईसी पहुंचते ही मंत्री दीवार के सहारे झूलते तार देख भड़क उठीं। कहा कि इससे हादसे से इंकार नहीं किया सकता। छोटे-छोटे कार्य कराने के लिए ‘अ’ से ‘अनार’ बताने की बात नहीं है।
यहां भी विज्ञान प्रयोगशाला देख मंत्री ने कहा कि प्रिंसपल हालात देखिए, ऐसे में बच्चों को क्या प्रयोग कराया जाता होगा, बताने की जरूरत नहीं है। बाथरूम देख भी नाराजगी जाहिर की और खामियों को ठीक कराने की जिम्मेदारी डीआईओएस को दी।
डीआईओएस आफिस में घुसते ही मंत्री बोलीं- इधर शौचालय है क्या। कहा कि इतनी दुर्गंध यहां पर है, कर्मचारी काम कैसे करते हैं। डीआईओएस साहब इसके तो आप जिम्मेदार हैं। ...और पूरे कार्यालय का निरीक्षण किए बिना मंत्री बाहर निकलीं और अपनी गाड़ी में बैठकर चली गईं।