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Barabanki News: चिकनकारी से महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं इंदिरा
Sat, 06 Jun 2026 02:52 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 06 Jun 2026 02:52 AM IST
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बाराबंकी। बंकी ब्लॉक के माती गांव की इंदिरा देवी ने चिकनकारी के हुनर से स्वयं के साथ अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। उनके साथ करीब 100 महिलाएं नियमित रूप से चिकनकारी के काम में लगी हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने इन महिलाओं के हुनर को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मिशन के तहत प्रशिक्षण के साथ उन्हें एक निजी संस्था के लिए काम करने का अवसर मिला। संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए कच्चे माल में कढ़ाई कर वे उसे विदेशों तक भेजने लायक बनाती हैं। इंदिरा देवी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही चिकन कढ़ाई की जानकारी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय आजीविका मिशन से उन्हें स्वरोजगार का मौका मिला।
वर्ष 2020 में उन्होंने स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह का नेतृत्व करते हुए अन्य महिलाओं को इससे जोड़ा। एक कंपनी ने उनकी चिकनकारी को पसंद कर नियमित काम दिया है। गांव की करीब 25 महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं।
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इसके अलावा पड़ोस के गांवों हड़ौरी, अल्लीपुर, रेंदुआ, पल्हरी, मोहनलाल पुरवा, बस्ती और डूडा कॉलोनी चिनहट समेत अन्य स्थानों की करीब 100 महिलाएं भी इस काम से जुड़ी हैं। वे घर बैठे चिकनकारी से प्रतिमाह ढाई से तीन हजार रुपये कमा रही हैं। लखनऊ के चौक और सीतापुर के व्यापारियों से भी उन्हें काम मिल रहा है।
काम की निरंतरता के कारण बड़े व्यापारियों का भरोसा बढ़ा है और आमदनी भी बढ़ रही है। इंदिरा देवी चिकनकारी के साथ-साथ त्योहारी उपयोगी वस्तुएं भी बनाती हैं। होली पर वे हर्बल गुलाब और दीपावली पर मोम के दीए बनाने का अच्छा काम करती हैं। उनके बनाए हर्बल गुलाब और मोम के दीयों की बाजार में खूब मांग है। इससे उन्हें चिकनकारी के अतिरिक्त अच्छी आमदनी होती है।
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मिशन के तहत प्रशिक्षण के साथ उन्हें एक निजी संस्था के लिए काम करने का अवसर मिला। संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए कच्चे माल में कढ़ाई कर वे उसे विदेशों तक भेजने लायक बनाती हैं। इंदिरा देवी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही चिकन कढ़ाई की जानकारी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय आजीविका मिशन से उन्हें स्वरोजगार का मौका मिला।
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वर्ष 2020 में उन्होंने स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह का नेतृत्व करते हुए अन्य महिलाओं को इससे जोड़ा। एक कंपनी ने उनकी चिकनकारी को पसंद कर नियमित काम दिया है। गांव की करीब 25 महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं।
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इसके अलावा पड़ोस के गांवों हड़ौरी, अल्लीपुर, रेंदुआ, पल्हरी, मोहनलाल पुरवा, बस्ती और डूडा कॉलोनी चिनहट समेत अन्य स्थानों की करीब 100 महिलाएं भी इस काम से जुड़ी हैं। वे घर बैठे चिकनकारी से प्रतिमाह ढाई से तीन हजार रुपये कमा रही हैं। लखनऊ के चौक और सीतापुर के व्यापारियों से भी उन्हें काम मिल रहा है।
काम की निरंतरता के कारण बड़े व्यापारियों का भरोसा बढ़ा है और आमदनी भी बढ़ रही है। इंदिरा देवी चिकनकारी के साथ-साथ त्योहारी उपयोगी वस्तुएं भी बनाती हैं। होली पर वे हर्बल गुलाब और दीपावली पर मोम के दीए बनाने का अच्छा काम करती हैं। उनके बनाए हर्बल गुलाब और मोम के दीयों की बाजार में खूब मांग है। इससे उन्हें चिकनकारी के अतिरिक्त अच्छी आमदनी होती है।