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पहले ही प्रयास में आईपीएस बन आदर्श ने बढ़ाया मान
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बाराबंकी। सिविल सेवा परीक्षा में उत्तीर्ण शहर के आदर्शकांत शुक्ला अपने परिवार के साथ।
- फोटो : BARABANKI
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बाराबंकी। संघ लोक सेवा आयोग की भारतीय सिविल सेवा परीक्षा-2020 पास कर आदर्शकांत शुक्त ने जिले का मान बढ़ाया है। पहले ही प्रयास में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले आदर्श को इस परीक्षा में 149वीं रैंक हासिल हुई है।
जिले की रामनगर तहसील के मडना गांव निवासी राधाकांत शुक्ल के बेटे आदर्श कांत ने सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि जिले का नाम रोशन किया हैै। मात्र 22 साल की उम्र में इस मुकाम को हासिल करने के लिए घर पर रहकर ही आदर्श ने कठिन परिश्रम से तैयारी की।
आदर्श ने शहर के मयूर विहार कॉलोनी स्थित आवास में रहकर श्री सांई इंटर कॉलेज से अपनी पढ़ाई की। यहां से आदर्श ने वर्ष 2013 में हाईस्कूल की परीक्षा 95.66 अंकों के साथ उत्तीर्ण कर प्रदेश की टॉपटेन सूची में छठवी रैंक हासिल की थी। वहीं इंटरमीडिएट की परीक्षा भी 94 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण कर लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज से मैथ से बीएससी की।
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इसके बाद आदर्श ने अपने घर पर रहकर ही सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की। 22 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर आदर्श ने इतिहास रचा। शुक्रवार को जारी हुई अंतिम परीक्षा परिणाम में उसे 149वीं रैंक मिली।
इस हिसाब से संभावना है कि वह आईपीएस अफसर बनेगा। आदर्श के पिता राधाकांत शुक्ल वाणिज्य कर के अधिवक्ता व माता गीता शुक्ला गृहिणी है। वहीं बड़ी बहन पारूल पीसीएस जे की तैयारी कर रही है। आदर्श की सफलता की सूचना मिलते ही उनके घर बधाई देने वालों का आना-जाना शुरू हो गया।
फैमिली सपोर्ट व हार्डवर्क को बताया सफलता का मंत्र
भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले आदर्श मध्य वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह परिवार के सपोर्ट और अपने हार्डवर्क को सफलता की कुंजी बताते हैं। उनका कहना है कि परिवार के बीच रहकर पढ़ाई करने से जहां कठिन वर्क करने में सबका सहयोग मिलता हैं। वहीं कंटेंट व हार्डवर्क से सब संभव है। वह अपने पिता राधाकांत शुक्ल को अपना आदर्श मानते हैं।
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जिले की रामनगर तहसील के मडना गांव निवासी राधाकांत शुक्ल के बेटे आदर्श कांत ने सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि जिले का नाम रोशन किया हैै। मात्र 22 साल की उम्र में इस मुकाम को हासिल करने के लिए घर पर रहकर ही आदर्श ने कठिन परिश्रम से तैयारी की।
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आदर्श ने शहर के मयूर विहार कॉलोनी स्थित आवास में रहकर श्री सांई इंटर कॉलेज से अपनी पढ़ाई की। यहां से आदर्श ने वर्ष 2013 में हाईस्कूल की परीक्षा 95.66 अंकों के साथ उत्तीर्ण कर प्रदेश की टॉपटेन सूची में छठवी रैंक हासिल की थी। वहीं इंटरमीडिएट की परीक्षा भी 94 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण कर लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज से मैथ से बीएससी की।
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इसके बाद आदर्श ने अपने घर पर रहकर ही सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू की। 22 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर आदर्श ने इतिहास रचा। शुक्रवार को जारी हुई अंतिम परीक्षा परिणाम में उसे 149वीं रैंक मिली।
इस हिसाब से संभावना है कि वह आईपीएस अफसर बनेगा। आदर्श के पिता राधाकांत शुक्ल वाणिज्य कर के अधिवक्ता व माता गीता शुक्ला गृहिणी है। वहीं बड़ी बहन पारूल पीसीएस जे की तैयारी कर रही है। आदर्श की सफलता की सूचना मिलते ही उनके घर बधाई देने वालों का आना-जाना शुरू हो गया।
फैमिली सपोर्ट व हार्डवर्क को बताया सफलता का मंत्र
भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले आदर्श मध्य वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं। वह परिवार के सपोर्ट और अपने हार्डवर्क को सफलता की कुंजी बताते हैं। उनका कहना है कि परिवार के बीच रहकर पढ़ाई करने से जहां कठिन वर्क करने में सबका सहयोग मिलता हैं। वहीं कंटेंट व हार्डवर्क से सब संभव है। वह अपने पिता राधाकांत शुक्ल को अपना आदर्श मानते हैं।