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35 की जगह मात्र 13 डॉक्टरों की ही तैनाती
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बाराबंकी। जिले का एक मात्र जिला महिला अस्पताल इन दिनों डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। जिससे अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सकों की कमी के कारण यहां पर आने वाली इन महिलाओं को बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिल पाती है। इसके कारण तमाम तीमारदार अपने मरीजों को लेकर निजी अस्पताल चले जाते हैं। जहां पर अस्पताल संचालक इसका जमकर फायदा उठाते हैं और इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल करते हैं। लेकिन अस्पताल प्रशासन इस समस्या का कोई हल नहीं निकाल पा रहा है।
सौ बेड के जिला महिला अस्पताल में देखा जाए तो डॉक्टरों के स्वीकृत पदों की संख्या 35 है, परंतु मौजूदा समय में यहां महज 13 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें सिर्फ पांच स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। जिनके सहारे ही अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी का आलम यह हैं कि यदि किसी गर्भवती की रात में हालत बिगड़ जाए तो सिवाय रेफर करने के अस्पताल के पास इसका कोई हल नहीं है। देखा जाए तो इस समय महिला अस्पताल की प्रतिदिन की ओपीडी करीब 400 की है और महीने में करीब 400 से ज्यादा प्रसव होते हैं।
इनमें से करीब दो सौ प्रसव ऑपरेशन के जरिए कराए जाते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कतें यहां पर चिकित्सकों की कमी की वजह से हो रही हैं। महिला डॉक्टरों की कमी के कारण ही अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिल पाती है। इसका सबसे ज्यादा फायदा निजी अस्पताल संचालक उठाते हैं और बेहतर सुविधाएं देने के नाम पर जमकर शोषण कर मोटी रकम भी वसूलते हैं। लेकिन इस समस्या का कोई हल नहीं निकल पा रहा है।
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आठ माह से नहीं है पैथालॉजिस्ट
महिला अस्पताल की ओपीडी में भले ही चार सौ मरीज प्रतिदिन देखे जा रहे हों लेकिन इन्हें अस्पताल से जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इनमें से ज्यादातर मरीज अपनी जांच निजी पैथालॉजी में कराने को मजबूर हैं। क्योंकि यहां पर तैनात पैथालॉजी प्रभारी का मार्च माह में तबादला हो गया था। तब से यहां पर किसी की तैनाती नहीं हो सकी है और यहां पर स्थित लैब टेक्नीशियनों के सहारे चल रही है।
सीएचसी का भी रहता है लोड
जिले में मौजूदा समय में 19 सीएचसी संचालित हैं। लेकिन इनमें पांच सीएचसी ऐसी हैं जिन्हें फर्स्ट रेफरल यूनिट का दर्जा मिला हुआ है। यहां पर सामान्य प्रसव कराने से लेकर ऑपरेशन तक सभी प्रकार की सुविधाएं हैं लेकिन इसका लाभ यहां पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल पाता है। यहीं कारण है कि यहां पर आने वाली प्रसूताओं को गंभीर बता तत्काल महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
महिला अस्पताल में डॉक्टरों के 35 पद स्वीकृत हैं लेकिन मौजूदा समय में महज 13 डॉक्टर ही कार्यरत हैं इनमें पांच स्त्रीरोग विशेषज्ञ है जिनके सहारे अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से शासन को अवगत करा दिया गया है और समय-समय पर चिकित्सकों की तैनाती की मांग भी की जाती है। इसके बाद भी अस्पताल में आने वाली प्रसूताओं को बेहतर उपचार की सुविधा देने का पूरा प्रयास किया जाता है।
-डॉ. संगीता श्रीवास्तव, सीएमएस जिला महिला अस्पताल
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सौ बेड के जिला महिला अस्पताल में देखा जाए तो डॉक्टरों के स्वीकृत पदों की संख्या 35 है, परंतु मौजूदा समय में यहां महज 13 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें सिर्फ पांच स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। जिनके सहारे ही अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। डॉक्टरों की कमी का आलम यह हैं कि यदि किसी गर्भवती की रात में हालत बिगड़ जाए तो सिवाय रेफर करने के अस्पताल के पास इसका कोई हल नहीं है। देखा जाए तो इस समय महिला अस्पताल की प्रतिदिन की ओपीडी करीब 400 की है और महीने में करीब 400 से ज्यादा प्रसव होते हैं।
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इनमें से करीब दो सौ प्रसव ऑपरेशन के जरिए कराए जाते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कतें यहां पर चिकित्सकों की कमी की वजह से हो रही हैं। महिला डॉक्टरों की कमी के कारण ही अस्पताल में आने वाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर उपचार की सुविधा नहीं मिल पाती है। इसका सबसे ज्यादा फायदा निजी अस्पताल संचालक उठाते हैं और बेहतर सुविधाएं देने के नाम पर जमकर शोषण कर मोटी रकम भी वसूलते हैं। लेकिन इस समस्या का कोई हल नहीं निकल पा रहा है।
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आठ माह से नहीं है पैथालॉजिस्ट
महिला अस्पताल की ओपीडी में भले ही चार सौ मरीज प्रतिदिन देखे जा रहे हों लेकिन इन्हें अस्पताल से जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इनमें से ज्यादातर मरीज अपनी जांच निजी पैथालॉजी में कराने को मजबूर हैं। क्योंकि यहां पर तैनात पैथालॉजी प्रभारी का मार्च माह में तबादला हो गया था। तब से यहां पर किसी की तैनाती नहीं हो सकी है और यहां पर स्थित लैब टेक्नीशियनों के सहारे चल रही है।
सीएचसी का भी रहता है लोड
जिले में मौजूदा समय में 19 सीएचसी संचालित हैं। लेकिन इनमें पांच सीएचसी ऐसी हैं जिन्हें फर्स्ट रेफरल यूनिट का दर्जा मिला हुआ है। यहां पर सामान्य प्रसव कराने से लेकर ऑपरेशन तक सभी प्रकार की सुविधाएं हैं लेकिन इसका लाभ यहां पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल पाता है। यहीं कारण है कि यहां पर आने वाली प्रसूताओं को गंभीर बता तत्काल महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
महिला अस्पताल में डॉक्टरों के 35 पद स्वीकृत हैं लेकिन मौजूदा समय में महज 13 डॉक्टर ही कार्यरत हैं इनमें पांच स्त्रीरोग विशेषज्ञ है जिनके सहारे अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से शासन को अवगत करा दिया गया है और समय-समय पर चिकित्सकों की तैनाती की मांग भी की जाती है। इसके बाद भी अस्पताल में आने वाली प्रसूताओं को बेहतर उपचार की सुविधा देने का पूरा प्रयास किया जाता है।
-डॉ. संगीता श्रीवास्तव, सीएमएस जिला महिला अस्पताल