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न जांच न दवाएं, लखनऊ के सहारे है डेंगू के मरीज
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बाराबंकी। वायरल बुखार की चपेट में अब बड़ों के साथ बच्चे भी आने लगे हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या ज्यादा दिखाई दी। बच्चों के रोग की चपेट में आने की वजह से इनके माता-पिता की रातों की नींद हराम हो गई है। वहीं अस्पतालों में तैनात चिकित्सक मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं और मरीजों को बाहर से दवाएं लिख रहे हैं।
इसके अलावा अस्पतालों में डेंगूू से निपटने के लिए भले ही बेड आरक्षित कर लिए गए हों लेकिन पर्याप्त संसाधन न होने की वजह से डेंगू से निपटना विभाग के लिए आसान नहीं होगा। डेंगू का इलाज कराने के लिए लोग लखनऊ की तरफ रुख कर रहे हैं। क्योंकि जिले में अब तक डेंगू और जेई के जितने भी मरीज मिले हैं उन सभी को रेफर ही किया गया है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को काफी भीड़ देखने को मिली। इनमें बच्चों की संख्या कुछ ज्यादा ही दिखाई दी। अस्पताल प्रशासन की मानें तो ओपीडी में भले ही प्रतिदिन 1400 के आसपास मरीज आ रहे हैं लेकिन इनमें बच्चों की संख्या कितनी है ये बता पाना आसान नहीं है।
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सूत्रों की मानें तो अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को बच्चों की वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या 15 से 20 के आसपास जरूर रही होगी। लक्ष्मी, मुन्ना, सादिक, पप्पू, कुसुमा, दिव्या आदि को उपचार के लिए लेकर आए अभिभावकों ने बताया कि तीन दिन से बच्चे बुखार से पीड़ित हैं लेकिन हालत में सुुुधार नहीं होने पर जिला अस्पताल लाया गया।
उधर वायरल की चपेट में आ रहे बच्चों की बढ़ती संख्या से स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मच गया है। वहीं डेंगू के मरीजों के लिए अस्पतालों में भले ही बेड आरक्षित कर दिए गए हो लेकिन पर्याप्त संसाधन न होने की वजह से अब तक जितने भी मरीज मिले हैं उन सभी को रेफर ही किया गया है। विभाग दवाएं और जांच की सुविधा होने का भले ही दावा कर रहा हो लेकिन हकीकत में उसके पास प्लेटलेट्स तक की व्यवस्था नहीं है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीके सिंह ने बताया कि वायरल बुखार और डेंगू की जांच की सुविधा अस्पताल में है। हमारी पास इन रोगों से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाएं भी उपलब्ध हैं। मंगलवार में ओपीडी में वायरल से पीड़ित मरीजों की संख्या ज्यादा रही। इसे देखते हुए चिकित्सकों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बाहर से दवाएं लिख रहे चिकित्सक
सीएचसी त्रिवेदीगंज पर बच्चे की दवा लेने आए शकील ने बताया कि चिकित्सक ने देखा तो जरूर लेकिन कई दवाएं बाहर से लिख दीं। जब वह ये दवाएं लेने मेडिकल स्टोर पर पहुंचा तो मेडिकल स्टोर वाले ने उसे 400 रुपये का बिल थमा दिया। इसी प्रकार हैदरगढ़ कस्बा निवासी लक्षमन ने बताया कि बेेटी सोनी पिछले तीन दिनों से बुखार से पीड़ित थी।
निजी चिकित्सक से इलाज कराने के बाद भी कोई सुधार नहीं होने पर सीएचसी लाया था। जहां पर दो दवाएं अस्पताल से दी गईं और दो दवाएं बाहर से लिख दी गईं। जबकि विभाग ने बाहर से दवाएं लिखने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है इसके बावजूद डॉक्टर बाज नहीं आ रहे हैं।
वायरल बुखार और डेंगू के बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए प्रत्येक सीएचसी पर बेड आरक्षित करा दिए गए हैं। सभी चिकित्सकों को इस संबंध में आवश्यक निर्देेश दिए जा चुके हैं। अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध हैं। इसके बाद भी यदि चिकित्सक बाहर से दवाएं लिख रहे हैं तो यह गलत इसकी जांच कराई जाएगी।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ
मरीज चिहिन्त करने को शुरू हुआ अभियान
बाराबंकी। शासन के आदेश पर मंगलवार से घर-घर जाकर वायरल बुखार, डेंगू, कोरोना, टीबी आदि के मरीजों को चिहिन्त करने का अभियान शुरू किया गया। इसके तहत लगाई गई टीमों ने गांवों पहुंचकर लोगों की जांच आदि का कार्य भी शुरू कर दिया है।
सीएमओ डॉ. रामजी वर्मा ने बताया कि शासन के आदेश पर घर-घर जाकर मरीजों को चिहिन्त करने का अभियान शुरू करा दिया गया है। इस संबंध में सभी सीएचसी अधीक्षकों को पहले ही निर्देेश जारी किए जा चुके हैं। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। (संवाद)
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इसके अलावा अस्पतालों में डेंगूू से निपटने के लिए भले ही बेड आरक्षित कर लिए गए हों लेकिन पर्याप्त संसाधन न होने की वजह से डेंगू से निपटना विभाग के लिए आसान नहीं होगा। डेंगू का इलाज कराने के लिए लोग लखनऊ की तरफ रुख कर रहे हैं। क्योंकि जिले में अब तक डेंगू और जेई के जितने भी मरीज मिले हैं उन सभी को रेफर ही किया गया है।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को काफी भीड़ देखने को मिली। इनमें बच्चों की संख्या कुछ ज्यादा ही दिखाई दी। अस्पताल प्रशासन की मानें तो ओपीडी में भले ही प्रतिदिन 1400 के आसपास मरीज आ रहे हैं लेकिन इनमें बच्चों की संख्या कितनी है ये बता पाना आसान नहीं है।
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सूत्रों की मानें तो अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को बच्चों की वायरल बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या 15 से 20 के आसपास जरूर रही होगी। लक्ष्मी, मुन्ना, सादिक, पप्पू, कुसुमा, दिव्या आदि को उपचार के लिए लेकर आए अभिभावकों ने बताया कि तीन दिन से बच्चे बुखार से पीड़ित हैं लेकिन हालत में सुुुधार नहीं होने पर जिला अस्पताल लाया गया।
उधर वायरल की चपेट में आ रहे बच्चों की बढ़ती संख्या से स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मच गया है। वहीं डेंगू के मरीजों के लिए अस्पतालों में भले ही बेड आरक्षित कर दिए गए हो लेकिन पर्याप्त संसाधन न होने की वजह से अब तक जितने भी मरीज मिले हैं उन सभी को रेफर ही किया गया है। विभाग दवाएं और जांच की सुविधा होने का भले ही दावा कर रहा हो लेकिन हकीकत में उसके पास प्लेटलेट्स तक की व्यवस्था नहीं है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीके सिंह ने बताया कि वायरल बुखार और डेंगू की जांच की सुविधा अस्पताल में है। हमारी पास इन रोगों से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाएं भी उपलब्ध हैं। मंगलवार में ओपीडी में वायरल से पीड़ित मरीजों की संख्या ज्यादा रही। इसे देखते हुए चिकित्सकों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बाहर से दवाएं लिख रहे चिकित्सक
सीएचसी त्रिवेदीगंज पर बच्चे की दवा लेने आए शकील ने बताया कि चिकित्सक ने देखा तो जरूर लेकिन कई दवाएं बाहर से लिख दीं। जब वह ये दवाएं लेने मेडिकल स्टोर पर पहुंचा तो मेडिकल स्टोर वाले ने उसे 400 रुपये का बिल थमा दिया। इसी प्रकार हैदरगढ़ कस्बा निवासी लक्षमन ने बताया कि बेेटी सोनी पिछले तीन दिनों से बुखार से पीड़ित थी।
निजी चिकित्सक से इलाज कराने के बाद भी कोई सुधार नहीं होने पर सीएचसी लाया था। जहां पर दो दवाएं अस्पताल से दी गईं और दो दवाएं बाहर से लिख दी गईं। जबकि विभाग ने बाहर से दवाएं लिखने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है इसके बावजूद डॉक्टर बाज नहीं आ रहे हैं।
वायरल बुखार और डेंगू के बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए प्रत्येक सीएचसी पर बेड आरक्षित करा दिए गए हैं। सभी चिकित्सकों को इस संबंध में आवश्यक निर्देेश दिए जा चुके हैं। अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध हैं। इसके बाद भी यदि चिकित्सक बाहर से दवाएं लिख रहे हैं तो यह गलत इसकी जांच कराई जाएगी।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ
मरीज चिहिन्त करने को शुरू हुआ अभियान
बाराबंकी। शासन के आदेश पर मंगलवार से घर-घर जाकर वायरल बुखार, डेंगू, कोरोना, टीबी आदि के मरीजों को चिहिन्त करने का अभियान शुरू किया गया। इसके तहत लगाई गई टीमों ने गांवों पहुंचकर लोगों की जांच आदि का कार्य भी शुरू कर दिया है।
सीएमओ डॉ. रामजी वर्मा ने बताया कि शासन के आदेश पर घर-घर जाकर मरीजों को चिहिन्त करने का अभियान शुरू करा दिया गया है। इस संबंध में सभी सीएचसी अधीक्षकों को पहले ही निर्देेश जारी किए जा चुके हैं। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। (संवाद)