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Barabanki News: दादी की परंपरा को पोतियां दे रहीं नया जीवन
Sat, 28 Feb 2026 02:05 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 28 Feb 2026 02:05 AM IST
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बाराबंकी। रंगों के त्योहार होली की आहट अब घरों में सुनाई देने लगी है। एक ओर जहां बाजार सजने लगे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में एक पुरानी और प्यारी परंपरा फिर से जीवित हो उठी है। बीते कुछ वर्षों से जहां रेडीमेड पकवानों का चलन बढ़ गया था, वहीं अब मिलावट और बाजार में गुणवत्तापूर्ण सामग्री की कमी के चलते लोग एक बार फिर अपने हाथों से पारंपरिक पकवान बनाने की ओर लौट रहे हैं। कोटवाधाम क्षेत्र के खजुरी गांव में, युवा पीढ़ी, खासकर बेटियां, अपनी दादी की सीख को आगे बढ़ा रही हैं और होली के लिए घर पर ही पारंपरिक पकवान तैयार कर रही हैं।
खजुरी गांव की छात्राएं श्रद्धा, अनुष्का, तन्नू, अनन्या और आरची आलू के चिप्स, कचरी, पापड़ आदि बनाने में उत्साह से जुटी दिखीं। उन्होंने बताया कि अपनी दादी से सीखे हुए हुनर का इस्तेमाल करते हुए होली के लिए तरह-तरह के पकवान बनाना शुरू कर दिया है। इन सभी पकवानों को पारंपरिक तरीके से धूप में सुखाया जा रहा है।
बेटियों का यह भी कहना है कि पहले वे होली के लिए ये चीजें बाजार से खरीद लाती थीं, लेकिन उनमें वह स्वाद और अपनापन नहीं होता था जो घर पर बने पकवानों में होता है। मिलावट के इस दौर में, घर पर बने पकवान न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं, बल्कि उनका स्वाद भी अनूठा होता है। अपने हाथों से बनाए इन पकवानों को वे खुशी-खुशी होली पर अपने परिवार के साथ बांटेंगी। संवाद
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खजुरी गांव की छात्राएं श्रद्धा, अनुष्का, तन्नू, अनन्या और आरची आलू के चिप्स, कचरी, पापड़ आदि बनाने में उत्साह से जुटी दिखीं। उन्होंने बताया कि अपनी दादी से सीखे हुए हुनर का इस्तेमाल करते हुए होली के लिए तरह-तरह के पकवान बनाना शुरू कर दिया है। इन सभी पकवानों को पारंपरिक तरीके से धूप में सुखाया जा रहा है।
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बेटियों का यह भी कहना है कि पहले वे होली के लिए ये चीजें बाजार से खरीद लाती थीं, लेकिन उनमें वह स्वाद और अपनापन नहीं होता था जो घर पर बने पकवानों में होता है। मिलावट के इस दौर में, घर पर बने पकवान न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं, बल्कि उनका स्वाद भी अनूठा होता है। अपने हाथों से बनाए इन पकवानों को वे खुशी-खुशी होली पर अपने परिवार के साथ बांटेंगी। संवाद
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