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और बढ़ी घाघरा, 13 गांवों में घुसा पानी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sun, 31 Jul 2016 11:37 PM IST
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बारिश होने से बाढ़ पीड़ितों की बढ़ीं दिक्कतें
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा नदी का पानी तराई में कहर बरपा रहा है। रात में नदी का पानी खतरे के निशान से 64 सेमी ऊपर पहुंच जाने से तराई में हड़कंप मच गया। नदी का पानी क्षेत्र के 13 गावों में घुस गया है जिससे यहां के लोगों का सुरक्षित स्थानों की तलाश में परिवारीजनों और मवेशियों के साथ पलायन तेज हो गया है।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.716 पर पहुंच गया है। नदी का पानी रात में इतनी तेजी से बढ़ा की तराई के लोग कुछ समझ नहीं पाए और देखते ही देखते उनके घरों में पानी भरने लगा। इससे क्षेत्र के तेलवारी, गोबरहा, सनावां, कोठरी गौरिया, अतरसुइयां, बसंतपुर, कटरा, सेमरी, सोनबरसा, अटवा, मिलार, रानीमऊ तराई और सुबेदार का पुरवा आदि गांवों के लोगों में हड़कंप मच गया।
रात से ही ग्रामीणों का गांवों से सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन शुरू हो गया। यहां के लोगों का कहना है कि रात में पानी इतनी तेजी के साथ बढ़ा कि कुछ समझ में नहीं आया। जो सामान हाथ लगा उसे लेकर परिवार और मवेशियों को साथ लेकर निकल लिए। लेकिन रविवार को दोपहर के बाद पानी थम गया।
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इसलिए घरों में जो सामान ऊंचे स्थानों पर था उसे निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। लेकिन बारिश होने की वजह से सबसे ज्यादा दिक्कत मवेशियों के चारे को लेकर होने लगी है। क्योंकि घरों में जो भूसा आदि रखा हुआ था वह सब पानी से भीग गया है जिसकी वजह से यह खिलाने लायक नहीं रह गया है।
जिन गांवों में पानी भर गया है यहां के लोग अलीनगर रानीमऊ तटबंध तथा कुछ लोग एल्गिन चरसड़ी तटबंध पर शरण ले रहे हैं। वहीं कुछ बाढ़ पीड़ित ऊंचे स्थानों पर भी शरण लिए हुए हैं। यहां पर पहले से ही परसवाल, रायपुर, नैपुरा आदि गांवों के लोग शरण लिए हुए हैं।
इन लोगों का कहना है कि लगभग 15 दिनों से हम लोग बंधे पर परिवार के साथ रह रहे हैं लेकिन कोई हाल लेने तक नहीं आया है। गांव में इतना पानी भर गया है कि वापस जाना आसान नहीं है।
टिकैतनगर क्षेत्र के 13 गांव नदी के पानी से घिरने की सूचना मिली है। मामले की जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के एसडीएम निर्देशित किया गया है कि वह राजस्व कर्मियों को मौके पर भेज बाढ़ पीड़ितों की जो यथा संभव हो वह मदद कराएं। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी
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घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.716 पर पहुंच गया है। नदी का पानी रात में इतनी तेजी से बढ़ा की तराई के लोग कुछ समझ नहीं पाए और देखते ही देखते उनके घरों में पानी भरने लगा। इससे क्षेत्र के तेलवारी, गोबरहा, सनावां, कोठरी गौरिया, अतरसुइयां, बसंतपुर, कटरा, सेमरी, सोनबरसा, अटवा, मिलार, रानीमऊ तराई और सुबेदार का पुरवा आदि गांवों के लोगों में हड़कंप मच गया।
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रात से ही ग्रामीणों का गांवों से सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन शुरू हो गया। यहां के लोगों का कहना है कि रात में पानी इतनी तेजी के साथ बढ़ा कि कुछ समझ में नहीं आया। जो सामान हाथ लगा उसे लेकर परिवार और मवेशियों को साथ लेकर निकल लिए। लेकिन रविवार को दोपहर के बाद पानी थम गया।
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इसलिए घरों में जो सामान ऊंचे स्थानों पर था उसे निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। लेकिन बारिश होने की वजह से सबसे ज्यादा दिक्कत मवेशियों के चारे को लेकर होने लगी है। क्योंकि घरों में जो भूसा आदि रखा हुआ था वह सब पानी से भीग गया है जिसकी वजह से यह खिलाने लायक नहीं रह गया है।
जिन गांवों में पानी भर गया है यहां के लोग अलीनगर रानीमऊ तटबंध तथा कुछ लोग एल्गिन चरसड़ी तटबंध पर शरण ले रहे हैं। वहीं कुछ बाढ़ पीड़ित ऊंचे स्थानों पर भी शरण लिए हुए हैं। यहां पर पहले से ही परसवाल, रायपुर, नैपुरा आदि गांवों के लोग शरण लिए हुए हैं।
इन लोगों का कहना है कि लगभग 15 दिनों से हम लोग बंधे पर परिवार के साथ रह रहे हैं लेकिन कोई हाल लेने तक नहीं आया है। गांव में इतना पानी भर गया है कि वापस जाना आसान नहीं है।
टिकैतनगर क्षेत्र के 13 गांव नदी के पानी से घिरने की सूचना मिली है। मामले की जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के एसडीएम निर्देशित किया गया है कि वह राजस्व कर्मियों को मौके पर भेज बाढ़ पीड़ितों की जो यथा संभव हो वह मदद कराएं। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी